सेना भर्ती: 1800 युवकों के कपड़े उतरवाए, मुर्गा बनाया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सेना भर्ती की लिखित परीक्षा में शारीरिक परीक्षा जैसा नजारा देखने को मिला। हरियाणा के रोहतक के छोटूराम स्टेडियम में हुई परीक्षा में परीक्षा के बाद एक प्रश्नपत्र गायब होने से सेना हिल गई।
चार जिलों के 1800 जवानों (परीक्षार्थी) को तलाशी के नाम पर 4 घंटे तक रगड़ा गया। सभी के कपड़े उतरवाए गए, कई को मुर्गा बनाया, उठक-बैठक लगवाई और कइयों को एक दूसरे के कंघे पर बैठा दिया गया। चार घंटे बाद मिट्टी में पेपर दबा मिला तो जवानों ने राहत की सांस ली।
बता दें कि 29 अक्टूबर को झज्जर में हुई सेना भर्ती रैली में शारीरिक और मेडिकल टेस्ट पास करने वाले रोहतक, झज्जर, सोनीपत और पानीपत के जवानों को यहां के छोटूराम स्टेडियम में रविवार सुबह 5 बजे लिखित परीक्षा के लिए बुलाया गया था।
इससे पहले, पेपर लीक होने और तीन से साढे़ तीन लाख रुपये में प्रश्नपत्र बिकने की अफवाहों के बीच सुबह 10 बजे लिखित परीक्षा शुरू हुई। भर्ती कार्यालय अधिकारियों ने पेपर लीक होने की बात को सिरे से नकार दिया।
झाड़ियों की ओर अभ्यर्थियों को दौड़ाया गया
सुबह पांच बजे यहां रिपोर्ट करने वाले अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच के साथ हीफिंगर प्रिंट, फोटो मिलान और हस्ताक्षर मिलान किए गए। 1843 जवान परीक्षा देने आए और 31 गैर हाजिर रहे। 1843 में से 94 अभ्यर्थियों को एनसीसी का फायदा मिला और उन्हें परीक्षा से छूट दे दी गई।
ठीक 11 बजे परीक्षा खत्म हुई। सभी जवानों का प्रश्न पत्र और आंसर-की जमा करा ली गई। टोटल किया तो एक पेपर कम मिला। दो-तीन बार गिनती के बाद भी पेपर नहीं मिला तो अफसरों को बताया गया। पेपर गायब होने से अधिकारी हैरत में पड़ गए।
मौखिक पूछताछ के बाद पेपप तलाशने के लिए हरेक परीक्षार्थी की तलाशी ली गई। सभी को जिला वाइज बैठाया गया। जूते-मोजे उतरवाने के बाद भी पेपर नहीं मिला तो सभी के कपड़े भी उतरवाए गए। लेकिन पेपर नहीं मिला।
सूत्रों का कहना है कि एक बारगी तो यह माना जाने लगा था कि पेपर गायब होने का संबंध पेपर लीक होने की अफवाह से तो नहीं है। एक अधिकारी ने राय दी कि अभ्यर्थियों को पेशाब करने के लिए भेजा जाए।
सामने झाड़ियों की ओर अभ्यर्थियों को दौड़ाया गया। जब यह अभ्यर्थी वापस लौटे तब कुछ जवानों को झाड़ियों के आसपास इस उम्मीद से तलाशी लेने भेजा कि शायद किसी अभ्यर्थी ने वहां पेपर फेंक दिया हो। यहां भी निराशा ही हाथ लगी।
जमीन में दबा मिला पेपर
पेपर गायब करने का शक झज्जर जिले के अभ्यर्थी पर जताया गया। इसलिए सबसे लंबी तलाशी झज्जर जिले की चली। अचानक किसी की नजर जमीन में एक गड्ढे में गई तो वहां एक कागज दबा मिला। कागज को बाहर निकाला तो प्रश्न पत्र मिला और सभी ने राहत की सांस ली।
यह कागज बहराणा गांव के एक अभ्यर्थी के पैरों केनीचे दबा था। माना गया कि उसी ने यह पेपर दबाया है। लंबी पूछताछ और जांच में पता चला कि वह अभ्यर्थी अपना पेपर पहले ही जमा करा चुका है और यह किसी और का पेपर है। आखिर तक यह पता नहीं चल पाया कि पेपर किसका था और किसने दबाया। शाम करीब 3 बजे अभ्यर्थियों को बाहर निकाला गया।
इसलिए नहीं पता चला
नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि दरअसल अभ्यर्थियों को रोल नंबर अलॉट किए गए थे। लेकिन यह रोल नंबर आंसर-की पर ही लिखने का नियम था। प्रश्न पत्र पर किसी का रोल नंबर नहीं लिखा गया। पेपर जमा कराते वक्त यह ध्यान नहीं दिया गया कि किस अभ्यर्थी की केवल आंसर-की ही ली गई है।
पेपर लीक झूठी बात
भर्ती निदेशक कर्नल राजन बक्शी का कहना है कि पेपर लीक होने की चर्चा कोरी अफवाह ही है। पेपरों की सील परीक्षा स्थल पर अधिकारियों की मौजूदगी में ही खोली गई है। पेपर गुम होने के सिलसिले में जब मिलने का प्रयास किया गया तो अधिकारियों ने इनकार कर दिया।