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विधानसथा में गूंजा घुड़चढ़ी विवाद, 29 घंटे के हंगामे के बाद दलितों की घर वापसी
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल (हरियाणा)
Updated Wed, 08 Mar 2017 02:22 PM IST
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दलित युवक की घुड़चढ़ी को लेकर शनिवार को शुरू हुआ विवाद विधानसभा में भी गूंजा। 29 घंटों के हंगामे के बाद दलित परिवारों में घर वापसी की। मामला करनाल के सग्गा गांव का था। विवाद के चलते सोमवार को गांव छोड़कर करनाल पहुंचे परिवार मंत्रियों और अधिकारियों के आश्वासन के बाद मंगलवार शाम गांव लौट गए। उधर दलितों पर अत्याचार का मामला विधानसभा में भी गूंजा।
विपक्ष ने प्रदेश में दलितों पर अत्याचार बढ़ने को लेकर सरकार को घेरा। इस पर सरकार ने विवाद को सुलझाने का जिम्मा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी और भाजपा विधायक भगवान दास कबीरपंथी को सौंपते हुए उन्हें करनाल भेजा। इस मुद्दे पर विधानसभा में भी जमकर शोर-शराबा हुआ। शून्यकाल में कांग्रेस विधायक कुलदीप शर्मा ने इस मामले पर कहा कि दलित वर्ग के गरीबों को घुड़चढ़ी न निकालने देना भेदभाव है।
विपक्ष के आरोपों पर भाजपा विधायकों व मंत्रियों अनिल विज, कविता जैन, नायब सैनी, सुभाष बराला, ज्ञान चंद गुप्ता ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि दलितों पर उत्पीड़न तो कांग्रेस शासन में भी हुए हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दलित हैं, उनके साथ दिल्ली में हुई घटना सब जानते हैं। कांग्रेस की ओर से विधायक गीता भुक्कल, उदयभान, शकुंतला खटक ने कुलदीप शर्मा का साथ देते हुए सरकार पर दलितों के प्रति गंभीर न होने का आरोप लगाया।
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कुलदीप ने कहा कि गरीब गांव छोड़ने को क्यों मजबूर हो रहे हैं, इस पर सीएम जवाब दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी अनुसूचित जाति के सदस्यों से संबंधित कोई घटना होती है तो उस पर राजनीति शुरू हो जाती है। यहां तक कि दिल्ली और उत्तर प्रदेश के लोग भी उसमें शामिल हो जाते हैं और दूसरों को भी उकसाया जाता है।
इससे पूर्व दोनों समुदाय मुद्दे को सुलझाने पर सहमत हो गए थे, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी थे, जो पुलिस के दर्ज मामलों के अनुसार कार्रवाई करवाना चाहते थे। इसके बाद दोनों पक्ष में फिर विवाद हो गया और सौ से डेढ़ सौ परिवार गांव से पलायन कर करनाल पहुंच गए।
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विपक्ष ने प्रदेश में दलितों पर अत्याचार बढ़ने को लेकर सरकार को घेरा। इस पर सरकार ने विवाद को सुलझाने का जिम्मा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी और भाजपा विधायक भगवान दास कबीरपंथी को सौंपते हुए उन्हें करनाल भेजा। इस मुद्दे पर विधानसभा में भी जमकर शोर-शराबा हुआ। शून्यकाल में कांग्रेस विधायक कुलदीप शर्मा ने इस मामले पर कहा कि दलित वर्ग के गरीबों को घुड़चढ़ी न निकालने देना भेदभाव है।
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विपक्ष के आरोपों पर भाजपा विधायकों व मंत्रियों अनिल विज, कविता जैन, नायब सैनी, सुभाष बराला, ज्ञान चंद गुप्ता ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि दलितों पर उत्पीड़न तो कांग्रेस शासन में भी हुए हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दलित हैं, उनके साथ दिल्ली में हुई घटना सब जानते हैं। कांग्रेस की ओर से विधायक गीता भुक्कल, उदयभान, शकुंतला खटक ने कुलदीप शर्मा का साथ देते हुए सरकार पर दलितों के प्रति गंभीर न होने का आरोप लगाया।
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कुलदीप ने कहा कि गरीब गांव छोड़ने को क्यों मजबूर हो रहे हैं, इस पर सीएम जवाब दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी अनुसूचित जाति के सदस्यों से संबंधित कोई घटना होती है तो उस पर राजनीति शुरू हो जाती है। यहां तक कि दिल्ली और उत्तर प्रदेश के लोग भी उसमें शामिल हो जाते हैं और दूसरों को भी उकसाया जाता है।
इससे पूर्व दोनों समुदाय मुद्दे को सुलझाने पर सहमत हो गए थे, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी थे, जो पुलिस के दर्ज मामलों के अनुसार कार्रवाई करवाना चाहते थे। इसके बाद दोनों पक्ष में फिर विवाद हो गया और सौ से डेढ़ सौ परिवार गांव से पलायन कर करनाल पहुंच गए।
मुख्यमंत्री को देनी पड़ी सफाई
हरियाणा विधानसभा बजट सेशन 2017
सदन में विपक्ष के आरोपों पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि घुड़चढ़ी विवाद के कारण पैदा हुई स्थिति को सामान्य करने, दोनों समुदायों को शांत व संतुष्ट करने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी और विधायक भगवान दास कबीरपंथी को सग्गा गांव भेजा है।
सूचना के अनुसार ग्रामवासियों ने सर्वसम्मति से गांव में घुड़चढ़ी की प्रथा को खत्म करने का निर्णय लिया था, लेकिन जब अनुसूचित जाति से संबंधित लोग घुड़चढ़ी करना चाहते थे तो दूसरे समुदाय के सदस्यों ने उन्हें ऐसा करने से रोका, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
29 घंटे बाद खत्म हुआ विवाद
सग्गा गांव छोड़कर करनाल में लघु सचिवालय डेरा डाले बैठे लोग 29 घंटे बाद मंगलवार शाम सात बजे गांव को रवाना हुए। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले, राज्यमंत्री मंत्री कृष्ण बेदी, राज्यमंत्री कर्णदेव कंबोज, हरियाणा अनुसूचित जाति की चेयरपर्सन सुनीता दुग्गल के साथ प्रशासनिक अधिकारियों और दोनों समुदाय की ओर से बनाई गई कमेटी की बीच करीब दो घंटे तक बैठक चली।
बैठक से बाहर आकर कृष्ण बेदी ने घोषणा की कि दलित समुदाय की सारी मांगें मान ली गईं हैं। इसलिए प्रदर्शन खत्म किया जाए। इसके बाद पीड़ित पक्ष के लोगों को समझाकर बस में बैठाकर रवाना किया।
सूचना के अनुसार ग्रामवासियों ने सर्वसम्मति से गांव में घुड़चढ़ी की प्रथा को खत्म करने का निर्णय लिया था, लेकिन जब अनुसूचित जाति से संबंधित लोग घुड़चढ़ी करना चाहते थे तो दूसरे समुदाय के सदस्यों ने उन्हें ऐसा करने से रोका, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
29 घंटे बाद खत्म हुआ विवाद
सग्गा गांव छोड़कर करनाल में लघु सचिवालय डेरा डाले बैठे लोग 29 घंटे बाद मंगलवार शाम सात बजे गांव को रवाना हुए। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले, राज्यमंत्री मंत्री कृष्ण बेदी, राज्यमंत्री कर्णदेव कंबोज, हरियाणा अनुसूचित जाति की चेयरपर्सन सुनीता दुग्गल के साथ प्रशासनिक अधिकारियों और दोनों समुदाय की ओर से बनाई गई कमेटी की बीच करीब दो घंटे तक बैठक चली।
बैठक से बाहर आकर कृष्ण बेदी ने घोषणा की कि दलित समुदाय की सारी मांगें मान ली गईं हैं। इसलिए प्रदर्शन खत्म किया जाए। इसके बाद पीड़ित पक्ष के लोगों को समझाकर बस में बैठाकर रवाना किया।
दिनभर चला बैठकों का दौर
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प्रशासनिक अधिकारियों, दलित समुदाय व सवर्ण पक्ष की ओर से गठित कमेटी के बीच दिनभर बैठकों का दौर चला। अधिकारियों ने दलित समुदाय की सभी मांगों को पूरा करने पर सहमति दे दी थी, लेकिन वे आरोपियों की गिरफ्तारी तक प्रदर्शन जारी रखने पर अड़े हुए थे। इस कारण बात सिरे नहीं चढ़ पाई। दोपहर बाद दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले केंद्रीय व राज्यमंत्रियों के पहुंचने पर स्थिति कुछ सामान्य हुई।
शाम करीब चार बजे फिर से बातचीत शुरू हुई। दलित पक्ष ने नामजद 42 आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग रखी। इसके लिए पुलिस प्रशासन ने एक सप्ताह का समय मांगा। मंत्री कृष्ण बेदी ने कहा कि मामले की जांच दलित समुदाय के एसपी से करवाएंगे और सग्गा गांव में पुलिस चौकी का निर्माण किया जाएगा, जिसका इंचार्ज एससी-एसटी से होगा। प्रदर्शन के कारण जिन युवाओं की परीक्षा प्रभावित हुई है, उनको परीक्षा देने का मौका मिलेगा।
गुटों में बंट गया प्रदर्शन
लघु सचिवालय के सामने डटे प्रदर्शनकारी दो गुटों में बंटे नजर आए। एक गुट का मानना था कि प्रशासन ने उनकी सभी मांगे मान ली हैं, इसलिए प्रदर्शन खत्म करना चाहिए, वहीं दूसरे गुट का मानना था कि आरोपियों की गिरफ्तारी तक प्रदर्शन जारी रखें। जब प्रशासन ने सभी मांगों पर सहमति देते हुए गांव लौटने को कहा तो कुछ लोग बसों में जाकर बैठ गए, वहीं कुछ ने फिर से नारेबाजी के साथ प्रदर्शन चालू कर दिया।
शाम करीब चार बजे फिर से बातचीत शुरू हुई। दलित पक्ष ने नामजद 42 आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग रखी। इसके लिए पुलिस प्रशासन ने एक सप्ताह का समय मांगा। मंत्री कृष्ण बेदी ने कहा कि मामले की जांच दलित समुदाय के एसपी से करवाएंगे और सग्गा गांव में पुलिस चौकी का निर्माण किया जाएगा, जिसका इंचार्ज एससी-एसटी से होगा। प्रदर्शन के कारण जिन युवाओं की परीक्षा प्रभावित हुई है, उनको परीक्षा देने का मौका मिलेगा।
गुटों में बंट गया प्रदर्शन
लघु सचिवालय के सामने डटे प्रदर्शनकारी दो गुटों में बंटे नजर आए। एक गुट का मानना था कि प्रशासन ने उनकी सभी मांगे मान ली हैं, इसलिए प्रदर्शन खत्म करना चाहिए, वहीं दूसरे गुट का मानना था कि आरोपियों की गिरफ्तारी तक प्रदर्शन जारी रखें। जब प्रशासन ने सभी मांगों पर सहमति देते हुए गांव लौटने को कहा तो कुछ लोग बसों में जाकर बैठ गए, वहीं कुछ ने फिर से नारेबाजी के साथ प्रदर्शन चालू कर दिया।