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Chandigarh News: एनडीपीएस मामलों के शीघ्र निपटारे के निर्देश, विशेष अदालतों को पालन सुनिश्चित करने काे कहा

Wed, 29 Oct 2025 08:37 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 29 Oct 2025 08:37 PM IST
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Directs speedy disposal of NDPS cases, special courts asked to ensure compliance
-हाईकोर्ट ने कहा- अभियुक्त मुकदमे में देरी का कृत्रिम कारण बनाकर नहीं उठा सकता अनुचित लाभ
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एनडीपीएस के मामलों का शीघ्र निपटारा करने के लिए विशेष अदालतों को नए दिशा निर्देश जारी किए हैं। मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में तेजी लाने के उद्देश्य से तैयार की गई ये गाइडलाइंस एक जनवरी 2026 से लागू होंगी।
हाईकोर्ट ने कहा है कि अभियुक्त स्वयं मुकदमे में देरी का कृत्रिम कारण बनाकर बाद में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत तेजी से मुकदमे के अधिकार का लाभ अनुचित तरीके से नहीं उठा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब देरी अभियुक्त की अपनी रणनीति या आचरण के कारण हो तो उसे अपनी ही गलती से फायदा नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में जहां भारी मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद हुए हैं वहां ट्रायल को प्राथमिकता दी जाए।
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कोर्ट ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि 1000 या अधिक खांसी की सिरप की बोतलें जिनमें प्रत्येक 100 मिली में दो प्रतिशत कोडीन फास्फेट बरामद हों या पापी स्ट्रा, अफीम, चरस, भांग, कोका पत्तियां या कथ एडुलिस जैसी हर्बल ड्रग्स की मात्रा वाणिज्यिक सीमा से 25 गुना अधिक हो तो ऐसे मामलों की सुनवाई को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसी तरह, यदि नशीला पदार्थ पाउडर या कच्चे रूप में हो और उसकी मात्रा वाणिज्यिक सीमा से 10 गुना ज्यादा हो तो ऐसे मामलों का ट्रायल तेजी से पूरा किया जाना चाहिए।
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जांच में देरी है तो निदेशक या उपनिदेशक जिम्मेदार
अदालत ने नौ प्रमुख दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनमें कहा गया है कि फाॅरेंसिक साइंस लैब को एनडीपीएस मामलों के नमूनों की जांच प्राथमिकता से करनी होगी। यदि रिपोर्ट या जांच में देरी होती है तो संबंधित निदेशक या उपनिदेशक इसके लिए जिम्मेदार माने जाएंगे। जांच एजेंसियों को 180 दिनों की वैधानिक सीमा का इंतजार किए बिना जांच पूरी करनी होगी। यदि अभियुक्त अदालत में पेश नहीं होता तो जेल के डीआईजी स्तर का अधिकारी यह जांच करेगा कि देरी का कारण क्या है। अगर सरकारी वकील मुकदमे को टालने की कोशिश करता पाया जाता है तो इसकी सूचना डायरेक्टर आफ प्रासिक्यूशन को दी जाएगी। यदि बचाव पक्ष का वकील जानबूझकर सुनवाई टाल रहा हो तो अदालत आराेपी के साथ एक लीगल एड काउंसिल नियुक्त करेगी। कोर्ट की ओर से देरी होने पर प्रिंसिपल सेशन जज को यह जानकारी प्रशासनिक या पोर्टफोलियो जज को देनी होगी।


आरोपी की चौथी जमानत याचिका खारिज
कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए छह किलो आईस और 21 किलो हेरोइन बरामद के आरोपी की चौथी जमानत याचिका खारिज कर दी। हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि इस फैसले की डिजिटल प्रति पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के सभी सत्र न्यायाधीशों और पुलिस महानिदेशकों को भेजी जाए ताकि सभी संबंधित अधिकारी इन दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित कर सकें।
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