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दस लाख की रिश्वत मामले में दिलबाग की जमानत याचिका खारिज
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चंडीगढ़। सीबीआई की विशेष अदालत ने डीएसपी बनकर अंबाला की कंपनी मालिक से 10 लाख की रिश्वत मांगने के मामले में कैथल निवासी दिलबाग सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी है। सीबीआई ने डेढ़ महीने पहले आरोपी दिलबाग सिंह और उसके एक साथी अनिल मोर को गिरफ्तार किया था। दोनों पर कंपनी के मालिक से रिश्वत मांगने का आरोप है।
सीबीआई के सरकारी वकील पीके डोगरा ने सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि अगर आरोपी को जमानत दी जाती है, तो वह गवाहों को प्रभावित और सुबूतों से भी छेड़छाड़ कर सकता है। रिश्वत मांगने में दिलबाग सिंह का पूरा हाथ है, जबकि सह-आरोपी अनिल मोर ने रिश्वत की रकम दिलबाग को दी थी। इसके अलावा अनिल मोर ने रिश्वत की रकम दिलबाग के छोटे भाई तरसेम के खाते में जमा करवाई थी, जोकि बाद में तरसेम ने निकलवा कर अनिल मोर को दी थी। पीके डोगरा ने कहा कि केस की जांच अभी चल रही है, ऐसे में दिलबाग को जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
दूसरी तरफ, दिलबाग सिंह के वकील विशाल गर्ग नरवाणा ने जमानत याचिका में कहा है कि उसका इस केस में कोई लेना देना नहीं है, उसका नाम तो एफआईआर में भी नहीं था। उसने न ही कोई रिश्वत मांगी और न ही कबूला है। बावजूद इसके सीबीआई ने उसके खिलाफ झूठा केस बना दिया है। दोनों पक्षों की बहस के बाद दिलबाग सिंह की जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया है। बता दें कि अंबाला की फेंटेंसी गेमिंग टेक्नोलॉजी के डायरेक्टर मोहित शर्मा ने बताया था कि जीरकपुर पुलिस ने एक केस पर कार्रवाई करते हुए उनके बैंक खाते फ्रीज कर दिए थे। उनके बैंक खाते को दोबारा से खुलवाने के नाम पर मोर और उसके साथियों ने पचास लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी, जिसके बाद सीबीआई ने मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
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सीबीआई के सरकारी वकील पीके डोगरा ने सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि अगर आरोपी को जमानत दी जाती है, तो वह गवाहों को प्रभावित और सुबूतों से भी छेड़छाड़ कर सकता है। रिश्वत मांगने में दिलबाग सिंह का पूरा हाथ है, जबकि सह-आरोपी अनिल मोर ने रिश्वत की रकम दिलबाग को दी थी। इसके अलावा अनिल मोर ने रिश्वत की रकम दिलबाग के छोटे भाई तरसेम के खाते में जमा करवाई थी, जोकि बाद में तरसेम ने निकलवा कर अनिल मोर को दी थी। पीके डोगरा ने कहा कि केस की जांच अभी चल रही है, ऐसे में दिलबाग को जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
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दूसरी तरफ, दिलबाग सिंह के वकील विशाल गर्ग नरवाणा ने जमानत याचिका में कहा है कि उसका इस केस में कोई लेना देना नहीं है, उसका नाम तो एफआईआर में भी नहीं था। उसने न ही कोई रिश्वत मांगी और न ही कबूला है। बावजूद इसके सीबीआई ने उसके खिलाफ झूठा केस बना दिया है। दोनों पक्षों की बहस के बाद दिलबाग सिंह की जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया है। बता दें कि अंबाला की फेंटेंसी गेमिंग टेक्नोलॉजी के डायरेक्टर मोहित शर्मा ने बताया था कि जीरकपुर पुलिस ने एक केस पर कार्रवाई करते हुए उनके बैंक खाते फ्रीज कर दिए थे। उनके बैंक खाते को दोबारा से खुलवाने के नाम पर मोर और उसके साथियों ने पचास लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी, जिसके बाद सीबीआई ने मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
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