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Chandigarh News: बड़माजरा, बलौंगी व ढकोली में फैला डायरिया, हैजा के भी तीन मरीज मिले
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मोहाली/पंचकूला/चंडीगढ़। कुछ दिन पहले भारी बारिश और जलभराव के बाद अब ट्राइसिटी में बीमारियों का प्रकोप शुरू हो गया है। मोहाली, पंचकूला और चंडीगढ़ के अस्पतालों में उल्टी-दस्त और डायरिया के मरीज बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। मोहाली जिले की स्थिति ज्यादा खराब है। यहां के बलौंगी, बड़माजरा और ढकोली क्षेत्र में डायरिया के साथ हैजा के भी मरीज मिले हैं। बड़माजरा में दो और बलौंगी में हैजा का एक मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। पानी के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। लोगों से पानी उबालकर पीने की सलाह दी गई है।
मोहाली में मिले हैजा के तीनों मरीजों को पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया था। जिन्हें इलाज के बाद छुट्टी दे दी और ये मरीज अब घर पर स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग इन पर नजर बनाए हुए है ताकि इलाके में महामारी न फैले।स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, बलौंगी में अब तक डायरिया के 78, बड़माजरा से 47 और ढकोली से 10 केस सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि इन इलाकों में बड़ी संख्या में लोगों को उल्टी-दस्त हो रहे हैं। एसडीएम सरबजीत कौर, नगर निगम की संयुक्त कमिश्नर और सिविल सर्जन डॉ. महेश आहूजा ने शनिवार को बलौंगी का दौरा कर वहां प्रबंधों की जांच की और अफसरों को जरूरी निर्देश दिए।
मोहाली के ज्यादतर मरीज फेज-1 स्थित सिविल अस्पताल में भर्ती हैं। शनिवार को जिले के दस मरीजों को चंडीगढ़ के जीएमसीएच-16 में भर्ती करवाया गया था, जहां से दो मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया गया है, बाकी आठ मरीजों की स्थिति सामान्य बनी हुई है। बलौंगी में डायरिया के मामले सामने आने के बाद वहां विशेष मेडिकल जांच कराई गई और एहतियात के तौर पर जिले में पानी की सैंपलिंग में तेजी लाने को कहा गया है ताकि बीमारियों को फैलने से पहले ही रोका जा सके। वहीं, जीएमएसएच-16 स्थित इमरजेंसी के प्रभारी डॉ. राजविंदर सिंह ने बताया कि तीन दिनों के दौरान मोहाली से डायरिया के कुल 21 मरीज अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं, जिनमें बच्चों की संख्या 7 है। भर्ती मरीजों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी जा रही है। फिलहाल किसी भी मरीज की स्थिति गंभीर नहीं है।
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मोहाली में निगरानी के लिए तीन तीन एडीसी तैनात
जिले में बाढ़ के बाद से बढ़ रही दूषित पानी से पैदा होने वाली बीमारियों से लोगों को बचाने के लिए डीसी आशिका जैन ने स्वास्थ्य गतिविधियों की निगरानी के लिए प्रशासनिक टीम के तीन शीर्ष अधिकारियों की तैनाती अलग-अलग क्षेत्रों में कर दी है। डीसी के आदेश के मुताबिक, एडीसी (जनरल) परमदीप सिंह को मोहाली सब-डिवीजन की निगरानी सौंपी गई है जबकि एडीसी (शहरी विकास) दमनजीत सिंह मान को डेराबस्सी सब-डिवीजन समेत खरड़ के शहरी क्षेत्र की निगरानी सौंपी गई है। इसी तरह एडीसी (ग्रामीण विकास) अमित बैंबी मोहाली के ग्रामीण क्षेत्र की देखभाल करेंगे।
पंचकूला में डायरिया के रोजाना आ रहे 30 केस
पंचकूला जिले में डायरिया के रोजाना 30 केस सामने आ रहे हैं। उल्टी-दस्त और पेट दर्द के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सिविल अस्पताल समेत कालका, पिंजौर, बरवाला और रायपुररानी के अस्पतालों में अधिकतर मरीज कॉलोनियों से आ रहे हैं। इसके अलावा बलटाना, जीरकुपर, चंडीगढ़ से भी मामले सामने आए हैं। सेक्टर-6 सिविल अस्पताल में रोजाना करीब 3500 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। इनमें 500 मरीज एमडी मेडिसिन में इलाज करवाने के लिए आ रहे हैं। पेट दर्द, टाइफाइड, उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या अधिक है। सेक्टर-6 सिविल अस्पताल के एमडी मेडिसिन डॉ. अश्वनी भटनाकर ने बताया कि जो मरीज इमरजेंसी में दाखिल हो रहे हैं, उन्हें दो दिन से दस्त और उल्टी की शिकायत है। 80 फीसदी लोगों को दूषित पानी के पीने से ही पेट की बीमारी हो रही है।
ये बीमारियां हो सकती हैं दूषित पानी पीने से
जीएमएसएच-16 के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीके नागपाल का कहना है कि दूषित पानी पीने से हैजा, टाइफाइड, हेपेटाइटिस ए (पीलिया), डायरिया, आंतों की टीबी, एमीबीएसी और डिसेंट्री जैसे बीमारियां हो सकती हैं। दूषित पानी पीने से आंखों में एलर्जी भी हो सकती है या फिर आंखें लाल हो सकती हैं। नाक में भी साइनोसाइटिस इन्फेक्शन दूषित पानी पीने के कारण हो सकता है। इतना ही नहीं कानों के पर्दे का इन्फेक्शन भी बरसात में दूषित पानी पीने से हो सकता है। वहीं मच्छरों से डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया होने का खतरा भी बढ़ गया है।
इस मौसम में सावधानी जरूरी
बरसात के मौसम में बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। सबसे ज्यादा दूषित पानी से होने वाले संक्रमण का डर रहता है क्योंकि बरसात में आपूर्ति वाले पानी की पाइप लाइन कई जगहों पर सीवर पाइप लाइन से मिल जाती है जिससे डायरिया, बुखार, खांसी, दस्त, पेट में दर्द, गले के संक्रमण, गले में दर्द, पेट की अन्य समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में विशेषज्ञों की सलाह है कि पीने का पानी उबालकर ही प्रयोग में लाएं। वहीं ताजा भोजन करें और साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें। वहीं, डेंगू और मलेरिया का खतरा भी इस समय बढ़ जाता है। स्वास्थ विभाग ने ने लोगों से अपील की है कि वे पानी को सीधे न पीएं। पहले इसे उबालें और फिर बैक्टीरिया को मारने के लिए इसे एक निश्चित अवधि के लिए ठंडा करें। इसके अलावा जिस प्रकार सरकारी जलापूर्ति द्वारा पानी को क्लोरीन से उपचारित किया जाता है, उसी प्रकार आम लोग भी क्लोरीन टेबलेट से उपचारित पानी (सावधानी के साथ) पी सकते हैं।
इनसेट-
ऐसे करें बचाव
- बरसात में दूषित पानी के संपर्क में आने के बाद हाथ-पांव साबुन से अच्छी तरह धोएं
- बच्चों को घर के आसपास इकट्ठा हुए पानी से दूर रखें और उनको पानी में न खेलने दें
- खाना खाने से पहले बच्चों के हाथ अच्छी तरह से साबुन से धुलवाएं
- अगर आप सीधे नलकूप या टंकी से पानी पीते हैं तो पहले इसे दो से तीन बार अच्छी तरह से उबाल लें
- शरीर के किसी भी जख्म पर दूषित पानी न लगने दें, इससे संक्रमण फैल सकता है
- मच्छरों से बचने के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करें और बच्चों को पूरी बाजू के कपड़े पहनाएं
- कूलर और छत पर रखे खराब सामानों में पानी इकट्ठा न होने दें। इनमें थोड़ा मिट्टी का तेल या डीजल डाल दें
- बाहर की दुकानों से खाना खाने से परहेज करें
- फलों व सब्जियों को धोकर या पकाकर ही खाएं
इनसेट-
आंखों पर भी मंडराने लगा खतरा
नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. आरके गुप्ता का कहना है कि कंजक्टिवाइटिस एक संक्रामक बीमारी है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को हो सकती है। इसलिए जिसे यह मर्ज हो गया हो उसकी आंखों में न देखें और न ही उसका रुमाल, तौलिया, टॉयलेट की टोंटी, दरवाजे का हैंडल, टेलीफोन के रिसीवर का इस्तेमाल करें। संक्रमण होने पर डॉक्टर की सलाह से दवा का प्रयोग करें।
इनसेट-
बच्चों का रखें विशेष ध्यान
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विक्रम का कहना है कि वायरल समेत अन्य संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए बच्चों के आहार व सफाई पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। बरसात में बड़े और बच्चे सभी को उबला हुआ पानी ही पीना चाहिए, क्योंकि सबसे ज्यादा संक्रमण गंदे पानी से होता है।
बारिश में पैरों की सुरक्षा भी जरूरी
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- कपड़ों और जूतों को साफ रखें
- बारिश में भीग जाने पर घर आकर जरूर नहाएं
- दूसरों के कपड़े व जूतों का इस्तेमाल करने से बचें
- बारिश में एंटीबैक्टीरियल साबुन का उपयोग करें
- पाउडर का इस्तेमाल करें ताकि नमी सोखी जा सके
- बिना धुले कपड़े या मोजे न पहनें
- स्पोर्ट्स शूज पहनते हों तो उन्हें वॉश जरूर करें। ठीक से सूखने पर ही पहनें
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मोहाली में मिले हैजा के तीनों मरीजों को पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया था। जिन्हें इलाज के बाद छुट्टी दे दी और ये मरीज अब घर पर स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग इन पर नजर बनाए हुए है ताकि इलाके में महामारी न फैले।स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, बलौंगी में अब तक डायरिया के 78, बड़माजरा से 47 और ढकोली से 10 केस सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि इन इलाकों में बड़ी संख्या में लोगों को उल्टी-दस्त हो रहे हैं। एसडीएम सरबजीत कौर, नगर निगम की संयुक्त कमिश्नर और सिविल सर्जन डॉ. महेश आहूजा ने शनिवार को बलौंगी का दौरा कर वहां प्रबंधों की जांच की और अफसरों को जरूरी निर्देश दिए।
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मोहाली के ज्यादतर मरीज फेज-1 स्थित सिविल अस्पताल में भर्ती हैं। शनिवार को जिले के दस मरीजों को चंडीगढ़ के जीएमसीएच-16 में भर्ती करवाया गया था, जहां से दो मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया गया है, बाकी आठ मरीजों की स्थिति सामान्य बनी हुई है। बलौंगी में डायरिया के मामले सामने आने के बाद वहां विशेष मेडिकल जांच कराई गई और एहतियात के तौर पर जिले में पानी की सैंपलिंग में तेजी लाने को कहा गया है ताकि बीमारियों को फैलने से पहले ही रोका जा सके। वहीं, जीएमएसएच-16 स्थित इमरजेंसी के प्रभारी डॉ. राजविंदर सिंह ने बताया कि तीन दिनों के दौरान मोहाली से डायरिया के कुल 21 मरीज अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं, जिनमें बच्चों की संख्या 7 है। भर्ती मरीजों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी जा रही है। फिलहाल किसी भी मरीज की स्थिति गंभीर नहीं है।
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मोहाली में निगरानी के लिए तीन तीन एडीसी तैनात
जिले में बाढ़ के बाद से बढ़ रही दूषित पानी से पैदा होने वाली बीमारियों से लोगों को बचाने के लिए डीसी आशिका जैन ने स्वास्थ्य गतिविधियों की निगरानी के लिए प्रशासनिक टीम के तीन शीर्ष अधिकारियों की तैनाती अलग-अलग क्षेत्रों में कर दी है। डीसी के आदेश के मुताबिक, एडीसी (जनरल) परमदीप सिंह को मोहाली सब-डिवीजन की निगरानी सौंपी गई है जबकि एडीसी (शहरी विकास) दमनजीत सिंह मान को डेराबस्सी सब-डिवीजन समेत खरड़ के शहरी क्षेत्र की निगरानी सौंपी गई है। इसी तरह एडीसी (ग्रामीण विकास) अमित बैंबी मोहाली के ग्रामीण क्षेत्र की देखभाल करेंगे।
पंचकूला में डायरिया के रोजाना आ रहे 30 केस
पंचकूला जिले में डायरिया के रोजाना 30 केस सामने आ रहे हैं। उल्टी-दस्त और पेट दर्द के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सिविल अस्पताल समेत कालका, पिंजौर, बरवाला और रायपुररानी के अस्पतालों में अधिकतर मरीज कॉलोनियों से आ रहे हैं। इसके अलावा बलटाना, जीरकुपर, चंडीगढ़ से भी मामले सामने आए हैं। सेक्टर-6 सिविल अस्पताल में रोजाना करीब 3500 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। इनमें 500 मरीज एमडी मेडिसिन में इलाज करवाने के लिए आ रहे हैं। पेट दर्द, टाइफाइड, उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या अधिक है। सेक्टर-6 सिविल अस्पताल के एमडी मेडिसिन डॉ. अश्वनी भटनाकर ने बताया कि जो मरीज इमरजेंसी में दाखिल हो रहे हैं, उन्हें दो दिन से दस्त और उल्टी की शिकायत है। 80 फीसदी लोगों को दूषित पानी के पीने से ही पेट की बीमारी हो रही है।
ये बीमारियां हो सकती हैं दूषित पानी पीने से
जीएमएसएच-16 के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीके नागपाल का कहना है कि दूषित पानी पीने से हैजा, टाइफाइड, हेपेटाइटिस ए (पीलिया), डायरिया, आंतों की टीबी, एमीबीएसी और डिसेंट्री जैसे बीमारियां हो सकती हैं। दूषित पानी पीने से आंखों में एलर्जी भी हो सकती है या फिर आंखें लाल हो सकती हैं। नाक में भी साइनोसाइटिस इन्फेक्शन दूषित पानी पीने के कारण हो सकता है। इतना ही नहीं कानों के पर्दे का इन्फेक्शन भी बरसात में दूषित पानी पीने से हो सकता है। वहीं मच्छरों से डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया होने का खतरा भी बढ़ गया है।
इस मौसम में सावधानी जरूरी
बरसात के मौसम में बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। सबसे ज्यादा दूषित पानी से होने वाले संक्रमण का डर रहता है क्योंकि बरसात में आपूर्ति वाले पानी की पाइप लाइन कई जगहों पर सीवर पाइप लाइन से मिल जाती है जिससे डायरिया, बुखार, खांसी, दस्त, पेट में दर्द, गले के संक्रमण, गले में दर्द, पेट की अन्य समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में विशेषज्ञों की सलाह है कि पीने का पानी उबालकर ही प्रयोग में लाएं। वहीं ताजा भोजन करें और साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें। वहीं, डेंगू और मलेरिया का खतरा भी इस समय बढ़ जाता है। स्वास्थ विभाग ने ने लोगों से अपील की है कि वे पानी को सीधे न पीएं। पहले इसे उबालें और फिर बैक्टीरिया को मारने के लिए इसे एक निश्चित अवधि के लिए ठंडा करें। इसके अलावा जिस प्रकार सरकारी जलापूर्ति द्वारा पानी को क्लोरीन से उपचारित किया जाता है, उसी प्रकार आम लोग भी क्लोरीन टेबलेट से उपचारित पानी (सावधानी के साथ) पी सकते हैं।
इनसेट-
ऐसे करें बचाव
- बरसात में दूषित पानी के संपर्क में आने के बाद हाथ-पांव साबुन से अच्छी तरह धोएं
- बच्चों को घर के आसपास इकट्ठा हुए पानी से दूर रखें और उनको पानी में न खेलने दें
- खाना खाने से पहले बच्चों के हाथ अच्छी तरह से साबुन से धुलवाएं
- अगर आप सीधे नलकूप या टंकी से पानी पीते हैं तो पहले इसे दो से तीन बार अच्छी तरह से उबाल लें
- शरीर के किसी भी जख्म पर दूषित पानी न लगने दें, इससे संक्रमण फैल सकता है
- मच्छरों से बचने के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करें और बच्चों को पूरी बाजू के कपड़े पहनाएं
- कूलर और छत पर रखे खराब सामानों में पानी इकट्ठा न होने दें। इनमें थोड़ा मिट्टी का तेल या डीजल डाल दें
- बाहर की दुकानों से खाना खाने से परहेज करें
- फलों व सब्जियों को धोकर या पकाकर ही खाएं
इनसेट-
आंखों पर भी मंडराने लगा खतरा
नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. आरके गुप्ता का कहना है कि कंजक्टिवाइटिस एक संक्रामक बीमारी है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को हो सकती है। इसलिए जिसे यह मर्ज हो गया हो उसकी आंखों में न देखें और न ही उसका रुमाल, तौलिया, टॉयलेट की टोंटी, दरवाजे का हैंडल, टेलीफोन के रिसीवर का इस्तेमाल करें। संक्रमण होने पर डॉक्टर की सलाह से दवा का प्रयोग करें।
इनसेट-
बच्चों का रखें विशेष ध्यान
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विक्रम का कहना है कि वायरल समेत अन्य संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए बच्चों के आहार व सफाई पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। बरसात में बड़े और बच्चे सभी को उबला हुआ पानी ही पीना चाहिए, क्योंकि सबसे ज्यादा संक्रमण गंदे पानी से होता है।
बारिश में पैरों की सुरक्षा भी जरूरी
- कपड़ों और जूतों को साफ रखें
- बारिश में भीग जाने पर घर आकर जरूर नहाएं
- दूसरों के कपड़े व जूतों का इस्तेमाल करने से बचें
- बारिश में एंटीबैक्टीरियल साबुन का उपयोग करें
- पाउडर का इस्तेमाल करें ताकि नमी सोखी जा सके
- बिना धुले कपड़े या मोजे न पहनें
- स्पोर्ट्स शूज पहनते हों तो उन्हें वॉश जरूर करें। ठीक से सूखने पर ही पहनें