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Chandigarh News: सर्जरी के दौरान डाइग्नोसिस रहती है जारी ताकि अन्य मर्ज का भी हो जाए एक साथ इलाज
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चंडीगढ़। हृदय रोग से ग्रस्त मरीजों का सर्जरी के दौरान भी डाइग्नोसिस जारी रहता है। इसमें विशेषज्ञ उन गड़बड़ियों को तलाशने का प्रयास करते हैं जो सर्जरी से पहले की जांच में सामने नहीं आई होतीं। कार्डियक एनेस्थिसियोलॉजिस्ट सर्जरी के दौरान ट्रांसेसोफिजियल ईकोकार्डियोग्राफी तकनीक का प्रयोग करते हैं। इस तकनीक का इस्तेमाल कर मरीजों को एक बीमारी से बचाव के लिए की जा रही सर्जरी के दौरान ही सामने आने वाली अन्य परेशानियों का भी इलाज करने का प्रयास किया जाता है ताकि मरीज को बार-बार अस्पताल आने, भर्ती होने, सर्जरी करवाने और डॉक्टर का समय बर्बाद होने से बचाया जा सके। यह जानकारी यूएसए के क्लीवलैंड क्लीनिक के डॉ. शिवमूर्ति और कनाडा के यूनिवर्सिटी ऑफ मैनीटोबा के डॉ. सेतू माधवन ने शनिवार को पीजीआई में दी। वे एडवांस कार्डियक सेंटर में सोसाइटी ऑफ ट्रांसेसोफिजियल ईकोकार्डियोग्राफी और एनेस्थिसिया विभाग की ओर से आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला में बतौर वक्ता शामिल थे।
टू डी नहीं अब थ्री डी तकनीक का प्रयोग
डॉ. शिवमूर्ति ने बताया कि हृदय रोग के मरीजों की सर्जरी से पहले जो डाइग्नोसिस होती है उसमें वस्तु स्थिति पूरी तरह सामने नहीं आती। क्योंकि उसे सीने के ऊपर से किया जाता है लेकिन सर्जरी के दौरान ट्रांसेसोफिजियल ईकोकार्डियोग्राफी तकनीक का प्रयोग कर हृदय के बिल्कुल पास से डाइग्नोसिस की जाती है, जो सटीक स्थिति बताता है। वहीं पहले इसके लिए टू डी तकनीक का प्रयोग किया जाता था लेकिन अब थ्री डी डाइमेंशनल तकनीक का प्रयोग कर बेहतर परिणाम प्राप्त किया जा रहा है। इस तकनीक से हृदय को एक बार में कई डाइमेंशन से देखा जा सकता है। इससे सर्जरी में चूक होने की आशंका कम हो जाती है।
इलाज की सही दिशा मिल रही
डॉ. सेतू माधवन का कहना है कि इस तकनीक से प्रमुख लाभ यह है कि एक मर्ज की सर्जरी करने के दौरान ही उससे जुड़ी अन्य परेशानी के बारे में पता चल जाता है। इससे विशेषज्ञ उसी दौरान वह इलाज भी करने का प्रयास करता है। इसके साथ ही इलाज के लिए कई विकल्प भी मिल जाते हैं। जैसे कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी के दौरान हृदय के वॉल्व को भी चेक किया जाता है जिससे उसी दौरान उसकी गड़बड़ी भी सामने आ जाती है और उसका भी इलाज हो जाता है।
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टू डी नहीं अब थ्री डी तकनीक का प्रयोग
डॉ. शिवमूर्ति ने बताया कि हृदय रोग के मरीजों की सर्जरी से पहले जो डाइग्नोसिस होती है उसमें वस्तु स्थिति पूरी तरह सामने नहीं आती। क्योंकि उसे सीने के ऊपर से किया जाता है लेकिन सर्जरी के दौरान ट्रांसेसोफिजियल ईकोकार्डियोग्राफी तकनीक का प्रयोग कर हृदय के बिल्कुल पास से डाइग्नोसिस की जाती है, जो सटीक स्थिति बताता है। वहीं पहले इसके लिए टू डी तकनीक का प्रयोग किया जाता था लेकिन अब थ्री डी डाइमेंशनल तकनीक का प्रयोग कर बेहतर परिणाम प्राप्त किया जा रहा है। इस तकनीक से हृदय को एक बार में कई डाइमेंशन से देखा जा सकता है। इससे सर्जरी में चूक होने की आशंका कम हो जाती है।
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इलाज की सही दिशा मिल रही
डॉ. सेतू माधवन का कहना है कि इस तकनीक से प्रमुख लाभ यह है कि एक मर्ज की सर्जरी करने के दौरान ही उससे जुड़ी अन्य परेशानी के बारे में पता चल जाता है। इससे विशेषज्ञ उसी दौरान वह इलाज भी करने का प्रयास करता है। इसके साथ ही इलाज के लिए कई विकल्प भी मिल जाते हैं। जैसे कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी के दौरान हृदय के वॉल्व को भी चेक किया जाता है जिससे उसी दौरान उसकी गड़बड़ी भी सामने आ जाती है और उसका भी इलाज हो जाता है।
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