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Chandigarh News: थानों में वर्षों से खड़े वाहनों के निस्तारण के लिए डीजीपी को 90 दिन का समय

Fri, 16 May 2025 08:25 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 16 May 2025 08:25 PM IST
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DGP gets 90 days to dispose of vehicles parked in police stations for years
-थानों में वर्षों से खड़े वाहनों के निस्तारण के लिए डीजीपी को 90 दिन का समय
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब पुलिस को सख्त निर्देश दिए हैं कि राज्य भर के पुलिस थानों में वर्षों से खड़े लावारिस, जब्त और अनुपयोगी वाहनों के निस्तारण की दिशा में 90 दिन के भीतर ठोस कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने कहा कि इन वाहनों को सुप्रीम कोर्ट के पहले के निर्णयों और केंद्र सरकार की ओर से लागू मोटर व्हीकल स्क्रैपिंग नियम, 2021 के अनुरूप उचित प्रक्रिया अपनाकर हटाया जाए। मुख्य न्यायाधीश शील नागु और न्यायाधीश सुमीत गोयल की खंडपीठ ने यह आदेश जनहित याचिकाकर्ता कंवर पहल सिंह की ओर से दायर याचिका का निपटारा करते हुए पारित किया।
बता दें बीते दिनों मोहाली के विधायक ने भी पंजाब विधानसभा में यह मुद्दा उठाया था। मोहाली के विधायक ने सरकार को थानों में खड़े वाहनों की नीलामी करा उससे अर्जित होने वाली धन राशि को एक जमीन खरीदने में उपयोग में लाने के लिए कहा था। ताकि भविष्य में पुलिस की ओर से पकड़े जाने वाले वाहनों को विशेष जमीन पर पार्क किया जा सके। इससे थानों की सूरत बदल सकेगी।
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याचिकाकर्ता ने कोर्ट से यह आग्रह किया था कि पंजाब के पुलिस थानों में वर्षों से लावारिस अथवा जब्त की गई गाड़ियां खड़ी हैं, जो न केवल खराब हो रही हैं, बल्कि थानों की जगह भी घेरे हुए हैं। कई बार वाहन मालिक इनकी पहचान नहीं कर पाते या फिर वाहन चोरी के मामलों में जब्त होने के बाद वर्षों तक इन्हें छोड़ा नहीं जाता। कंवर पहल सिंह ने अपनी याचिका में बताया कि पंजाब में सैकड़ों की संख्या में वाहन थानों में खड़े हैं, जिनमें से कई सालों से वहीं पड़े हैं। इनमें कुछ वाहन चोरी के मामलों से जुड़े हैं, कुछ दुर्घटनाओं के बाद जब्त किए गए हैं और कई वाहन ऐसे हैं जिनका मालिक कोई सामने नहीं आया है। उन्होंने 9 फरवरी 2025 को राज्य सरकार को इस संबंध में एक विस्तृत प्रतिनिधित्व सौंपा था, जिसमें इन वाहनों के शीघ्र निस्तारण के लिए उचित कदम उठाने की मांग की गई थी, लेकिन सरकार की ओर से न तो कोई निर्णय लिया गया और न ही कोई कार्रवाई की गई। कोर्ट ने डीजीपी पंजाब को निर्देश दिया कि वे सुप्रीम कोर्ट की ओर से कई मामलों में दिए गए निर्देशों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें। सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों में स्पष्ट कहा था कि जब्त किए गए वाहनों को लंबी अवधि तक यूं ही न छोड़ा जाए क्योंकि इससे वाहन खराब हो जाते हैं और सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान होता है।
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