बटाला: श्रद्धालुओं ने हर्षोउल्लास से मनाया बाबे का विवाह, हजारों की संख्या में संगत हुई नतमस्तक
बटाला स्वागती गेट होर्डिंग से भरा पड़ा था। नगर कीर्तन में ट्रैक्टर-ट्रालियों पर बैठी महिलाओं के कीर्तन जत्थे गुरु की बाणी का गुणगान करने में मस्त थे। बाबे के विवाह को लेकर बटाला शहर खचाखच भरा हुआ था क्योंकि बटाला के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग सोमवार सुबह करीब चार बजे ही बटाला पहुंच गए थे।
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पहली पातशाही श्री गुरु नानक देव जी औैर बीबी सुलक्खनी जी का विवाह पर्व बटाला में सोमवार को पूरे हर्षोउल्लास से मनाया गया। 11 सितंबर को बटाला के सभी गुरुद्वारों में रखे गए अखंड पाठ साहिब के भोग सोमवार सुबह डाले गए। इसके बाद सोमवार सुबह करीब साढे़ आठ बजे श्री अखंड पाठ साहिब के भोग डालने के बाद श्री गुरु ग्रंथ साहिब को पालकी साहिब में सुशोभित करके पंज प्यारों की अगुवाई में एक विशाल और भव्य नगर कीर्तन का आयोजन किया गया।
बटाला के गुरुद्वारा डेहरा साहिब से नगर कीर्तन की शुरुआत की गई। नगर कीर्तन के दौरान पूरा बटाला खालसयी जयकारों से गूंज उठा। नगर कीर्तन की अगुवाई कर रहे पंज प्यारों को रास्ते में विभिन्न संगठनों ने सिरोपा भेंट करके सम्मानित किया। इस नगर कीर्तन में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए इसके अलावा नगर कीर्तन में सुल्तानपुर लोधी से बारात के रूप में बटाला पहुंची संगत ने भी शिरकत की।
पालकी साहिब के आगे-आगे गतका पार्टी के खिलाड़ी अपनी युद्ध कला का प्रदर्शन बड़े ही बखूबी ढंग से कर रहे थे। इस बार संगत की संख्या पहले विवाह पर्वों के मुकाबले तीन गुणा ज्यादा थी। गौरतलब है कि 2020 में कोरोना के चलते नगर कीर्तन न निकाले जाने का फैसला किया गया था।
वहीं गुरु के प्रति आस्था इस हद तक थी कि करीब 100 लोग श्री गुरु ग्रंथ साहिब की पालकी के आगे-आगे नंगे पांवों झाड़ू से रास्ते की सफाई करने में जुटे थे। नगर कीर्तन के दौरान जगह-जगह लंगर और ठंडे मीठे जल के स्टाल लगे हुए थे। बाबे के विवाह पर्व को लेकर सोमवार को बटाला के सभी गुरुद्वारों को सजाया गया था औैर गुरुबाणी का प्रवाह चल रहा था।
बटाला स्वागती गेट होर्डिंग से भरा पड़ा था। नगर कीर्तन में ट्रैक्टर-ट्रालियों पर बैठी महिलाओं के कीर्तन जत्थे गुरु की बाणी का गुणगान करने में मस्त थे। बाबे के विवाह को लेकर बटाला शहर खचाखच भरा हुआ था क्योंकि बटाला के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग सोमवार सुबह करीब चार बजे ही बटाला पहुंच गए थे।
रविवार को बाद दोपहर गुरुद्वारा कंध साहिब में तिल रखने के लिए भी जगह नहीं थी क्योंकि हरेक श्रद्धालु युगों से स्थापित ऐतिहासिक कच्ची कंध के दर्शन करने के लिए उत्सुक था। सारा दिन बटाला में नगर कीर्तन के दौरान गहमा-गहमी रही। सड़कों के किनारे पर रागी, टाढ़ी, प्रचारक और कविशर गुरु नानक जी के जीवन और आदर्शों के बारे में लोगों को जानकारी दे रहे थे। नगर कीर्तन गुरुद्वारा डेहरा साहिब से शुरू होकर पूरे शहर से गुजरते हुए देर शाम को गुरुद्वारा डेहरा साहिब में ही समाप्त हो गया।