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Chandigarh News: जागरूकता के बावजूद महिलाओं की हेलमेट से दूरी, इस साल कटे 52 हजार चालान

Sat, 11 Nov 2023 01:31 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 11 Nov 2023 01:31 AM IST
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Despite awareness, women stay away from helmets, 52 thousand challans issued this year
चंडीगढ़। भले ही यातायात पुलिस हेलमेट को लेकर जागरूकता अभियान चलाने का दावा कर रही है मगर सच्चाई यह है कि अभी भी शहर की सड़कों पर महिला दोपहिया वाहन चालक बिना हेलमेट के नजर आ रही हैं। वहीं, कई महिलाएं दोपहिया वाहन पर पीछे बैठ हेलमेट नहीं पहन रही हैं। चंडीगढ़ यातायात पुलिस के आंकड़ों की मानें तो इस वर्ष 10 महीनों में 52 हजार महिलाओं के बिना हेलमेट के चालान हो चुके हैं। वहीं, पिछले पूरे वर्ष में यह आंकड़ा 20 हजार 774 था। शहर में बाहरी राज्यों से आने वाली अनेकों महिलाएं भी हेलमेट को लेकर जागरूक नहीं हैं। ऐसे में धड़ल्ले से उनके चालान भी हो रहे हैं।
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पिछले वर्ष केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 27 मार्च को सेक्टर-17 में इंटीग्रेटिड कमांड एवं कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) का उद्घाटन किया था। इसके तहत शहर के लगभग 40 लाइट प्वाइंट पर हाई रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इन्हीं के जरिए यह चालान जारी हो रहे हैं। दूसरी ओर यातायात पुलिसकर्मी महिलाओं के हैंडी कैम से भी चालान कर रहे हैं। इनके अलावा सोशल मीडिया पर भी शहरवासी अक्सर बिना हेलमेट और बाकी यातायात नियमों की उल्लंघन की तस्वीरें यातायात पुलिस से साझा कर चालान करवा रहे हैं।
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एक हजार रुपये का चालान और लाइसेंस निलंबन भी

शहर में बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने का चालान एक हजार रुपये का है। वहीं सिख महिलाओं के लिए टर्बन अनिवार्य है। इसके अलावा यदि हेलमेट की स्ट्रिप न बांधने या बीआईएस स्टैंडर्ड का हेलमेट न होने का भी चालान है। बिना हेलमेट पर चालान के अलावा तीन महीने तक लाइसेंस निलंबन की भी कार्रवाई शामिल है। केंद्रीय मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2022 में 237 हादसे हुए और 83 लोगों की मौत हुई थी। 42.9 प्रतिशत हादसों में दोपहिया वाहन शामिल थे।
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सिख महिलाओं के भी चालान हो रहे
शहर में पहले सिख महिलाओं को बिना हेलमेट के छूट थी मगर बाद में पिछले वर्ष 27 जुलाई को राज्य स्तर की सड़क सुरक्षा काउंसिल की बैठक में इस छूट को बंद करने का फैसला हुआ था। उससे पहले 6 जुलाई, 2018 को प्रशासन ने अपनी एक पुरानी नोटिफिकेशन को संशोधित किया था जिसमें सभी सिख महिलाओं को हेलमेट में छूट थी। संशोधन में सिर्फ पगड़ी लगाए महिलाओं को ही छूट दी गई। बाद में दबाव के चलते अक्तूबर 2018 में केंद्र के गृह मंत्रालय ने यूटी प्रशासन को सलाह दी थी कि सभी सिख महिलाओं को छूट दी जाए। ऐसे में दिसंबर 2018 में प्रशासन ने सभी सिख महिलाओं को हेलमेट में छूट दी थी भले ही उन्होंने टर्बन न पहनी हो। इसके बाद पिछले वर्ष केंद्र के मोटर व्हीकल रूल्स को अपनाकर सिख महिलाओं के लिए टर्बन अनिवार्य की गई थी।
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