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Hindi News ›   Chandigarh ›   Dera Sacha Sauda Chief Gurmeet Ram Rahim Sentenced for 20 years in Sadhvi Rape Case

सजा सुनाते हुए CBI कोर्ट ने की तल्ख टिप्पणी, जानें क्या बोले राम रहीम और वकील?

Tue, 29 Aug 2017 07:29 PM IST
विजेंद्र कौशिक/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
विजेंद्र कौशिक/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा) Updated Tue, 29 Aug 2017 07:29 PM IST
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Dera Sacha Sauda Chief Gurmeet Ram Rahim Sentenced for 20 years in Sadhvi Rape Case
राम रहीम को साध्वी रेप केस में सजा
साध्वी रेप केस में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम को सजा सुनाते हुए कोर्ट ने तल्ख टिप्पणियां की। सीबीआई जज और डेरामुखी के जज ने भी कई दलीलें दी, बाबा भी बिलख पड़े। सीबीआई की अदालत ने राम रहीम को सजा सुनाते हुए कहा कि जो व्यक्ति अपने भक्तों के साथ जंगली जानवरों जैसा व्यवहार करता है, वह दया का पात्र नहीं हो सकता। डेरा मुखी ने मानवता के प्रति सारी हदें पार कर दी।
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जो भक्त उसे पिता के बराबर गुरू और भगवान मानती थी, उनका न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक शोषण भी किया। साथ ही उन्हें भगवान भरोसे भी छोड़ दिया। इस तरह के कृत्य से न केवल पीड़ित का शारीरिक शोषण हुआ, बल्कि उनका व्यक्तित्व भी नष्ट हो गया। जबकि दोषी धार्मिक संस्था डेरा सच्चा सौदा का प्रमुख है। उनके द्वारा ऐसा अपराध देश के अंदर आध्यात्मिक, सामाजिक, धार्मिक और संस्कृति लिए भी नुकसान दायक है। दोषी के कृत्य ने प्राचीन धरा की विरासत को अपूर्णीय क्षति पहुंचाई है। 
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समाज पर पड़ने वाले प्रभाव का बार-बार जिक्र 

Dera Sacha Sauda Chief Gurmeet Ram Rahim Sentenced for 20 years in Sadhvi Rape Case
फाइल फोटो
सीबीआई के जज ने अपने फैसले में बार-बार सामाजिक व्यवस्थाओं का जिक्र किया है। जज ने कहा कि ऐसे अपराधों पर समाज पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। एक अन्य मामले का हवाला देते हुए कहा कि अपराध में सजा का सामाजिक लक्ष्य भी होता है। यह भी कहा गया कि दोषी को यह भी अहसास होना चाहिए कि उसके अपराध से पीड़ित के जीवन को नुकसान के अलावा सामाजिक ताने-बाने को भी क्षति पहुंची है। इसलिए दोषी को उचित सजा देते समय पीड़ित को न्याय देने के साथ ही समाज के बारे में भी ध्यान रखना चाहिए। 

धन की कोई कमी नहीं 
अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि जो व्यक्ति फिल्म बना सकता है। बार-बार विदेश जा सकता है। अपनी फिल्मों के प्रमोशन के लिए कई आयोजन किए हैं। ऐसे में जुर्माना सुनाते समय यह ध्यान रखा गया है कि दोषी के पास धन की कोई कमी नहीं है।

माफी नहीं दी जा सकती 
जज जगदीप सिंह ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि दया के नाम पर और किसी व्यक्ति की पृष्ठभूमि के आधार पर उसके कृत्यों को दफन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। 

अदालत का फैसला, दूसरों के लिए चेतावनी
अपने फैसले में अदालत ने लिखा है कि कोर्ट का फैसला देते समय न केवल पीड़िता के प्रति हुए अन्याय को देखा जाता है, बल्कि अदालत यह भी देखती है कि इस फैसले का समाज में क्या संदेश जाएगा। साथ ही इस तरह के अपराध की मंशा रखने वाले दूसरे लोगों को भी समय रहते चेतावनी मिल सके। कानून से बढ़ा कोई नहीं है।

कोर्ट ने सात केसों का दिया उदाहरण

Dera Sacha Sauda Chief Gurmeet Ram Rahim Sentenced for 20 years in Sadhvi Rape Case
राम रहीम - फोटो : social media
सीबीआई कोर्ट की तरफ से डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को अलग-अलग दो मामलों में 20 साल की कैद सुनाते समय फैसले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए गए सात फैसलों का उदाहरण दिया गया है। इसमें श्याम सुंदर बनाम पूरन (1990), श्याम नारायण बनाम स्टेट 2014, सुमेर सिंह बनाम सूरजभान, अंकुश शिवाजी गायकवाड़ बनाम स्टेट 2013, सरवन सिंह बनाम स्टेट पंजाब 1978, दलीप एस धनकर बनाम कोडम कंपनी 2007, बीजी गोस्वामी बनाम दिल्ली प्रशासन 1974 शामिल हैं।  

पीड़ितों ने दोषी को पिता समान माना, भगवान की तरह पूजा
सजा पर सुनवाई के दौरान मिले 10 मिनट में सीबीआई के वकील ने कहा कि पीड़िताओं ने दोषी को पिता के समान माना और भगवान की तरह उसकी पूजा की। दोषी ने दोनों पीड़िताओं के भरोसे को तोड़ने के साथ उनका शारीरिक और मानसिक शोषण किया। पीड़िताएं डेरे में दोषी राम रहीम के संरक्षण में रहती थीं और यह कृत्य कस्टोडियल रेप से कम नहीं है।

दोषी ने अपने आपको भगवान जैसा बताते हुए अपनी मजबूत स्थिति का फायदा उठाते हुए निर्दोष लड़कियों के साथ बलात्कार किया। यह कोई साधारण मामला नहीं है बल्कि रेयरेस्ट ऑफ रेयर है। इसका पूरे समाज को संदेश जाएगा, इसलिए दोषी अधिकतम सजा का हकदार है। अगर उसे कम सजा दी जाती है तो देश की सामूहिक अंतरात्मा के लिए चौंकाने वाला होगा।

फैसले में दिया गांधी जी का हवाला 
लैंगिक आधार पर स्त्री को कमजोर कहना महिलाओं के प्रति पुरुषों का अन्याय है। सिर्फ पाश्विक ताकत में ही पुरुष महिलाओं से ज्यादा है। जहां तक बात नैतिक बल की है तो पुरुष की तुलना में स्त्री कहीं श्रेष्ठ है। क्या उसमें सहज बोध पुरुष से ज्यादा नहीं है, क्या वह पुरुष से ज्यादा आत्म बलिदान नहीं करती, क्या उसकी सहनशक्ति पुरुष से ज्यादा नहीं है, क्या वह पुरुष से ज्यादा साहसी नहीं है? उसके बिना पुरुष कुछ नहीं है। यदि अहिंसा के नियम के पालन की बात है तो भविष्य महिलाओं के साथ है। दिल पर असर छोड़ने वाली बात महिलाओं से ज्यादा और कौन कह सकता है। 
- महात्मा गांधी
 
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बलात्कारी बाबा ने रो-रोककर मांगी दया की भीख

Dera Sacha Sauda Chief Gurmeet Ram Rahim Sentenced for 20 years in Sadhvi Rape Case
राम रहीम जेल - फोटो : SELF
जिस राम रहीम के बैठने के लिए लंबे तामझाम कर विशेष आसन लगता था वह सोमवार को अपने लिए दया की भीख मांग रहा था। सुनारिया जेल में लगी सीबीआई की विशेष अदालत में बलात्कारी बाबा पूरी तरह बेबस और लाचार नजर आया। न तो उसके बैठने को विशेष व्यवस्था थी और न ही देखरेख के लिए कोई अनुयायी। कहा जा रहा है कि सजा सुनते ही वह फर्श पर बैठ गया और फफककर रोने लगा।

बलात्कारी बाबा ने कोर्ट से अपनी मां और खुद की बीमारी का हवाला देकर दया की भीख मांगी। राम रहीम ने कहा कि उसकी उम्र 50 साल है। उसे उच्च रक्तचाप, डायबिटीज और गंभीर कमर दर्द की समस्या पिछले आठ सालों से है। उसने समाज के लिए बहुत से काम किए हैं। बूढ़ी मां को कई बीमारियां हैं। उसके संरक्षण में ट्रस्ट के तहत कई स्कूल, कॉलेज और अन्य संस्थान चल रहे हैं और हजारों लोगों को रोजगार दिया है। 

अपराध भी छोटा नहीं है, माफी नहीं दी जा सकती
राम रहीम की रहम की गुहार पर कोर्ट ने कहा कि अपराध भी छोटा नहीं है। इसमें माफी नहीं दी जा सकती। सीबीआई की कोर्ट ने अपने फैसले में पीड़िता एक के मामले में साफ किया है कि आईपीसी की धारा 376 के तहत 10 साल कैद और 15 लाख रुपये जुर्माना भरना होगा। जुर्माना न भरने पर दो साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।

जबकि आईपीसी की धारा 506 के तहत दो साल कैद और 10 हजार रुपये जुर्माना भरने की सजा है। जुर्माना न भरने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी। दुष्कर्म और जान से मारने की धमकी देने के मामले में दोनों सजा एक साथ चलेंगी। दूसरी पीड़िता के केस में भी 10 साल कैद और 15 लाख जुर्माना की सजा रहेगी।
 

कोर्ट ने अधिकारियों को लगाई फटकार

Dera Sacha Sauda Chief Gurmeet Ram Rahim Sentenced for 20 years in Sadhvi Rape Case
ram rahim
वहीं, डेरा प्रमुख को वीआईपी ट्रीटमेंट देने को लेकर कोर्ट ने अधिकारियों को फ टकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि सभी से आम कैदियों की तरह व्यवहार किया जाए। 25 अगस्त को दोषी करार दिये जाने के बाद डेरा प्रमुख को जेल की जगह पीटीसी गेस्ट हाउस में रखा गया था। बाद में उसे जेल में शिफ्ट किया था। साथ ही चर्चा थी कि गेस्ट हाउस में हनीप्रीत भी उसके साथ थी।

इसी को लेकर कोर्ट ने फटकार लगाई। सूत्रों का कहना है कि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि राम रहीम जेल के अंदर आम कैदियों की तरह जेल के कपड़ों में रहेगा। जेल के अंदर जो सब मिलता है वही राम रहीम को मिलेगा। 

यह था मामला 
साल 2000 में डेरा सच्चा सौदा की एक साध्वी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट, राष्ट्रपति व मीडिया को एक गुमनाम पत्र भेजा था। पत्र में साध्वी ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर उसके और कई अन्य साध्वियों के साथ बलात्कार के आरोप लगाए थे।

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने पत्र का संज्ञान लेते हुए सितंबर 2002 को मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए। सीबीआई ने जांच में आरोपों को सही पाया और गुरमीत के खिलाफ विशेष अदालत के समक्ष 31 जुलाई, 2007 में आरोपपत्र दाखिल किया। 25 अगस्त को पंचकूला की सीबीआई अदालत ने इस केस में डेरा मुखी को दोषी करार दिया। 28 अगस्त को दस साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई।
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