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कबूतरबाजी से डंकी रूट तक : खेल वही... खिलाड़ी नए, विदेश में बसने की चाहत ने मिटा दिया वैध-अवैध का फर्क

Sat, 08 Feb 2025 04:40 AM IST
दुष्यंत शर्मा आशीष तिवारी, चंडीगढ़
आशीष तिवारी, चंडीगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 08 Feb 2025 04:40 AM IST
सार

सही और गलत रास्ते से जाने वालों की संख्या भी कम नहीं है। किसी भी कीमत पर विदेश में बसने की चाह ने ही अवैध अप्रवासन का खेल शुरू किया।

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Depotation : the desire to settle in a foreign country has erased the difference between legal and illegal.
अमेरिका जाने का एक डंकी रूट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमेरिका और कनाडा समेत दुनिया के अलग-अलग देशों में बसने की चाह पंजाब के युवाओं में नई नहीं है। सही और गलत रास्ते से जाने वालों की संख्या भी कम नहीं है। किसी भी कीमत पर विदेश में बसने की चाह ने ही अवैध अप्रवासन का खेल शुरू किया।

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यह खेल पुराना है। कभी इसको कबूतरबाजी कहते थे, तो अब डंकी रूट और आईलेट्स वाली दुल्हन के नाम से पुकारा जाने लगा है। डॉलर की चमक दमक में पागल हुए युवाओं को देखकर इसका पूरा फायदा एजेंटों ने उठाया। हाथों में हथकड़ियां और पैरों में बेड़ियों की तस्वीरें देखकर संसद से लेकर सड़क तक हंगामा मचा है, लेकिन इसके पीछे की पटकथा तो हम लोगों ने ही लिखी है।
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सिर्फ और सिर्फ अवैध रूप से विदेश में बसने की चाहत की पटकथा... और उसमें मजबूत किरदार निभाते हैं अवैध इंडस्ट्री के रूप में पनपे वह एजेंट, जो हमारे गलत सपनों को साकार करने का झूठा आश्वासन देकर ठगी करते हैं। इनके ऊपर कभी उस तरह से शिकंजा कसा ही नहीं गया। विदेश में अवैध तरीकों से जाने और फिर बसने के पीछे की शुरुआत होती है आतंकवाद के दौर से।
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1984 में पंजाब में आतंकवाद के दौर के बाद पुलिस की तरफ से जब ऑपरेशन चलाए जा रहे थे, तो भारी संख्या में युवाओं का विदेश की तरफ पलायन शुरू हो गया। अवैध रूप से एजेंटों ने युवाओं को जर्मनी, यूके समेत कनाडा और अमेरिका तक पहुंचा दिया, लेकिन जब 1994 के बाद आतंकवाद की दहकती आग ठंडी पड़ने लगी, तब तक पंजाब में एजेंटों के धंधे ने एक बहुत बड़े उद्योग का रूप धारण कर लिया। 

एक जानकारी के मुताबिक कई सौ करोड़ का सालाना अवैध टर्नओवर इस इंडस्ट्री का होने लगा। अवैध तरीकों से विदेश में भेजने वाले सैकड़ों एजेंट बड़े-बड़े शोरूम से लेकर माल और गलियों में अपनी दुकान सजाने लगे।

नए तरीकों के साथ मैदान में बड़े खिलाड़ी
इस दौरान अवैध रूप से विदेश भेजने वालों में कई नए तरीके ईजाद होने लगे। इसमें खेलों के आयोजन से लेकर स्कूलों व कॉलेजों के टूर समेत बड़े-बड़े गायकों के विदेशी टूर में कबूतरबाजी के धंधे शुरू हुए। इसी कड़ी में पंजाब से कबड्डी क्लब और खेल प्रोमोटरों ने टीमों का गठन किया और विदेश में क्लब के साथ मैचों के लिए टीम तैयार कर खिलाड़ियों को विदेश ले गए। जहां से खिलाड़ी कबूतर बनकर उड़ने लगे। 

  • पंजाब में एक शीर्ष खेल अधिकारी को आधिकारिक रूप से प्रायोजित टीम के हिस्से के रूप में नकली पहलवानों को विदेश भेजने के ऑपरेशन के सरगना के रूप में पहचाना गया है। एक पूर्व कबड्डी खिलाड़ी से पुलिस अधिकारी बने व्यक्ति ने खिलाड़ियों की आड़ में लाखों रुपये इसी धंधे में कमाए। 

ओलंपिक खिलाड़ी तक हो गए गायब
पंजाब के दो मुक्केबाज लक्खा सिंह और गुरचरण सिंह, जिन्होंने एशियाई खेलों में पदक जीते थे और ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था, वह अमेरिका में आधिकारिक खेल दौरे के दौरान गायब हो गए। कपूरथला पुलिस ने पहलवान से फिल्म स्टार बने दारा सिंह के दामाद और बेटी सनी गिल और लवलीन पर 78 युवकों से 3 करोड़ रुपये ठगने के आरोप में मामला दर्ज किया था, जो उन्होंने कुश्ती टीम के सदस्य के रूप में कनाडा जाने का वादा करके उनसे वसूले थे। इसी तरह जालंधर की एक संदिग्ध क्रिकेट टीम की पांच महिला खिलाड़ी लंदन में लापता हो गईं, तो पंजाब में कबूतरबाजी का शोर मचने लगा।

2005 तक परवान चढ़ा रहा कबूतरबाजी का धंधा 
पंजाब में 2005 तक कबूतरबाजी का यह धंधा खुलेआम जारी रहा। जालंधर के एक नामचीन स्कूल का ट्रिप अमेरिका में बच्चों को लेकर गया, लेकिन उसके दसवीं क्लास के बच्चे वहां से गायब हो गए। पता चला कि वह रात को होटल से बाहर निकले और रिश्तेदार की कार में बैठकर खिसक गए। कई स्कूलों के खिलाफ जांच शुरू हुई, लेकिन खेल में लाखों रुपये की राशि थी लिहाजा मामले दबा दिए गए। कई स्कूल तो राष्ट्रीय स्तर पर पहचान वाले थे।

गायक दलेर मेहंदी पर भी दर्ज हुआ था कबूतरबाजी का केस
खेल और स्कूलों के बाद नंबर आया गायकों व स्टेज शो करने वालों का। साल 2003 था। उस वक्त के सबसे बड़े पंजाबी सिंगर दलेर मेहंदी पर कबूतरबाजी का केस दर्ज हुआ था। दलेर और उनके भाई शमशेर सिंह पर लोगों से मोटी रकम वसूलकर उन्हें अपने ग्रुप का सदस्य बनाकर गैरकानूनी ढंग से विदेश भेजने के आरोप थे। 15 साल बाद 16 मार्च, 2018 को पटियाला की जुडिशियल मजिस्ट्रेट निधि सैनी की अदालत ने मेहंदी को धोखाधड़ी और साजिश रचने का दोषी पाया और उन्होंने दो साल की सजा सुनाई थी। 



अब डंकी रुट पर गंवा रहे जान...
26 दिसंबर 1996 को माल्टा के पास नाव पलटने से डूबकर कई पंजाब के युवा मारे गए। इस बोट में कुल 565 लोग सवार थे, जो मुख्य रूप से भारतीय, पाकिस्तानी, श्रीलंकाई और बांग्लादेशी थे। वे बेहतर जीवन की उम्मीद में यूरोप की ओर रवाना हुए थे। वह अवैध रूप से इटली में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे। 

 

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