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विभागों के नहीं लगाने होंगे चक्कर, एप से ही पार्षदों को मिलेगी उनके वार्ड के कार्यों की जानकारी
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चंडीगढ़। जनप्रतिनिधियों के लिए लोगों को अब उनके सवालों का जवाब देना आसान होगा। अब एक क्लिक पर पार्षद एप के माध्यम से अपने वार्डों के विकास कार्यों की फाइलों की स्थिति देख सकते हैं। पार्षदों को अब अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। जहां फाइल रुकी होगी वहां जाकर उसकी आपत्ति को दूर कर तत्काल उसे आगे बढ़ाया जा सकेगा। इससे एक ओर पारदर्शिता आएगी, वहीं दूसरी ओर वार्डों के विकास कार्यों में तेजी आएगी। इस माह के अंदर एप को तैयार कर पार्षदों को लॉगइन दे दिया जाएगा।
सदन की बैठक में आम आदमी पार्टी के पार्षद योगेश ढींगरा ने मुद्दा उठाया था कि फाइलें कहीं दबी रह जाती हैं और वार्ड के काम छह-छह माह तक लटके रह जाते हैं। इस पर सहमति जताते हुए कांग्रेस पार्षद गुरुबख्श रावत ने कहा कि वर्ष 2019 में एक एप बना था, जिसमें फाइलों की स्थिति को आसानी से देखा जा सकता था। काफी समय पहले यह व्यवस्था बंद हो गई है। इस व्यवस्था को फिर से शुरू कराना चाहिए क्योंकि किसी काम का रूपरेखा बनने के बाद निगम के पास आ जाती है। जनप्रतिनिधि लोगों को आश्वासन देता है कि उसके क्षेत्र का काम जल्द हो जाएगा, लेकिन फाइल पर आपत्ति लगाकर विभाग में दबी रह जाती है। पार्षद जब चक्कर लगाकर फाइल खोजता है तो पता चलता है कि उस पर आपत्ति लगी है। समय रहते आपत्ति के बारे में पता चल जाए तो उसे खत्म कर फाइल को आगे बढ़ाया जा सकता है। चीफ इंजीनियर एनपी शर्मा ने सदन को बताया कि इस पूरे एप को अपडेट कराया गया है। इसमें कुछ नए फीचर भी डाले हैं, जल्द यह पार्षदों की सुविधा के लिए लागू कर दिया जाएगा।
कोट-
फाइलों को ट्रेस करने वाले एप को अपडेट किया गया है। इसकी जानकारी सदन की बैठक में भी दी जा चुकी है। प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जल्द पार्षदों को उनकी फाइल ट्रेसिंग की व्यवस्था उपलब्ध करा दी जाएगी।
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- आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम
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सदन की बैठक में आम आदमी पार्टी के पार्षद योगेश ढींगरा ने मुद्दा उठाया था कि फाइलें कहीं दबी रह जाती हैं और वार्ड के काम छह-छह माह तक लटके रह जाते हैं। इस पर सहमति जताते हुए कांग्रेस पार्षद गुरुबख्श रावत ने कहा कि वर्ष 2019 में एक एप बना था, जिसमें फाइलों की स्थिति को आसानी से देखा जा सकता था। काफी समय पहले यह व्यवस्था बंद हो गई है। इस व्यवस्था को फिर से शुरू कराना चाहिए क्योंकि किसी काम का रूपरेखा बनने के बाद निगम के पास आ जाती है। जनप्रतिनिधि लोगों को आश्वासन देता है कि उसके क्षेत्र का काम जल्द हो जाएगा, लेकिन फाइल पर आपत्ति लगाकर विभाग में दबी रह जाती है। पार्षद जब चक्कर लगाकर फाइल खोजता है तो पता चलता है कि उस पर आपत्ति लगी है। समय रहते आपत्ति के बारे में पता चल जाए तो उसे खत्म कर फाइल को आगे बढ़ाया जा सकता है। चीफ इंजीनियर एनपी शर्मा ने सदन को बताया कि इस पूरे एप को अपडेट कराया गया है। इसमें कुछ नए फीचर भी डाले हैं, जल्द यह पार्षदों की सुविधा के लिए लागू कर दिया जाएगा।
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कोट-
फाइलों को ट्रेस करने वाले एप को अपडेट किया गया है। इसकी जानकारी सदन की बैठक में भी दी जा चुकी है। प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जल्द पार्षदों को उनकी फाइल ट्रेसिंग की व्यवस्था उपलब्ध करा दी जाएगी।
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- आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम