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एक SMS ने बच्चों और अभिभावकों को दौड़ाया

Sun, 31 Aug 2014 11:52 AM IST
दीपक कश्यप/ अमर उजाला, कुरुक्षेत्र
दीपक कश्यप/ अमर उजाला, कुरुक्षेत्र Updated Sun, 31 Aug 2014 11:52 AM IST
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Department of Education and parents of children drove by SMS

शिक्षा विभाग की लापरवाही लगभग 50 विद्यार्थियों पर भारी पड़ी। वे शिक्षा के अधिकार नियम-134 के तहत आयोजित लर्निंग टेस्ट देने से वंचित रह गए। आनन-फानन में मैसेज के आधार पर परीक्षा देने पहुंचे 61 बच्चों को टेस्ट में बिठाया गया। इससे पहले जिले के इकलौते परीक्षा केंद्र श्रीमद्भगवत गीता वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पर अभिभावकों ने जमकर हंगामा किया।

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हुआ यूं कि शिक्षा विभाग ने जो सूची टेस्ट देने वालों बच्चों भेजी उसमें केवल 356 विद्यार्थियों के ही नाम शामिल थे। जबकि परीक्षा केंद्र पर करीब 450 से अधिक बच्चे पहुंचे। हंगामा तो उस समय हुआ, जब केंद्र अधिकारियों ने सूचीबद्ध बच्चों से ही परीक्षा लेने की बात कही। यह सुनते ही अभिभावक बिफर गए और उन्होंने जमकर विरोध जताया।
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वहीं सूचना मिलने पर जिला शिक्षा अधिकारी सुमन आर्य मौके पर पहुंची और उन्होंने उच्चाधिकारियों से बातचीत कर आनन-फानन में 61 विद्यार्थियों को परीक्षा में बिठाने के लिए केंद्र के अधिकारियों को कहा। हालांकि इससे पहले निराश होकर करीब 50 विद्यार्थी लौट चुके थे।
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अभिभावकों का आरोप है कि बीपीएल परिवारों से संबंधित बच्चों को अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराने का उद्देश्य रख कांग्रेस सरकार द्वारा लागू की गई इस योजना से पात्र विद्यार्थी विभागीय लापरवाही के कारण पूरी तरह लाभांन्वित नहीं हो रहे। उल्लेखनीय है कि शिक्षा का अधिकार नियम 134-ए अंतर्गत बीपीएल परिवारों के बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए लर्निंग टेस्ट श्रीमद्भगवत गीता वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में आयोजित हुआ।

इस दौरान बिफरे अभिभावकों ने केंद्र में जमकर हंगामा किया। परीक्षार्थियों के परिजनों ने आरोप लगाया कि उनके बच्चों का नाम परीक्षा केंद्र के बाहर लगी सूची में नहीं है, जबकि उन्हें मैसेज भेजकर परीक्षा देने के लिए बुलाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा केंद्र अधीक्षक सूची में नाम न होने के कारण परीक्षा में बिठाने से इंकार कर रहे हैं। परिजनों ने इस मामले को लेकर जमकर हंगामा किया।

सूचना मिलने पर पहुंचीं डीईओ
जिला शिक्षा अधिकारी सुमन आर्य परीक्षा केंद्र पहुंचीं और मामले को लेकर उच्चाधिकारियों से चंडीगढ़ फोन पर बातचीत की। निर्देश दिए कि जो भी बच्चा परीक्षा देने आया है, उसे परीक्षा में बिठाया जाए।

जानकारी के अनुसार परीक्षा केंद्र के बाहर लगी परीक्षा सूची में 356 बच्चों के नाम थे। जबकि परीक्षा देने के लिए 450 से अधिक बच्चे आए हुए थे। परीक्षा सुबह दस बजे शुरू हुई। परीक्षा केंद्र के बाहर एक घंटा तक अन्य परीक्षार्थी व उनके परिजन हंगामा करते रहे।

61 अन्य बच्चों को बिठाया परीक्षा में: आर्य
जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि परीक्षा केंद्र पर 356 परीक्षार्थियों की सूची आई थी। इसके अलावा जो परीक्षार्थी परीक्षा देने पहुंचे थे। उनके पास मैसेज आने की उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

लेकिन फिर भी परीक्षा केंद्र के बाहर मौजूद 61 अन्य बच्चों को परीक्षा देने की अनुमति दी गई। उन्होंने बताया कि इस परीक्षा का आयोजन बीपीएल परिवारों के बच्चों को शिक्षा के अधिकार के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश देने के लिए किया गया है।

मैसेज के बाद पहुंचे हैं परीक्षा दिलाने
शाहाबाद से आए गुलशन ने बताया कि उनके पास मैसेज आया था शनिवार को उनके दो बच्चों की इस स्कूल में परीक्षा होगी। लेकिन परीक्षा सूची में बच्चों का नाम न होने से खफा होकर हंगामा करना पड़ा, जिसके बाद बच्चों को परीक्षा में बिठाया गया।
 
सूची में छात्रा का नाम गलत था
शाहाबाद की अंजली रानी ने बताया कि उसकी बेटी का नाम लिस्ट में गलत लिखा था। जिसकी वजह से उसे परीक्षा में नहीं बिठाया गया। फिर जब मोबाइल पर आया मैसेज दिखाया गया। तब नाम की सही पुष्टि हो पाई और बच्ची को परीक्षा में बैठने दिया गया।


मैसेज आया, पर सूची में नाम नहीं
पिहोवा के देवी दयाल ने उनके मोबाइल पर आए मैसेज आरटीई नंबर-100030449 को दिखाते हुए बताया कि उन्हें मैसेज आया था कि उनके दो बच्चों को नौ बजे परीक्षा केंद्र पहुंचना है।

लेकिन यहां देखा कि उनके बच्चों का लिस्ट में कहीं कोई जिक्र तक नहीं है। इसके बाद हंगामा हुआ और बच्चों को लगभग एक घंटे बाद परीक्षा में बैठने दिया गया।

विभाग की व्यवस्था से हुई परेशानी
शाहाबाद की अर्चना रानी ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि शिक्षा विभाग को बच्चों की सुविधा के लिए बेहतर व्यवस्था स्थापित करनी चाहिए।

लेकिन शनिवार को यहां जिस प्रकार की स्थिति बनी है। इससे उन्हें परेशानी हुई। ऐसी व्यवस्था बच्चों व अभिभावक के लिए बड़ी ही चुनौतीपूर्ण है।

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