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पंजाब से उठी मांग, गवर्नर को बनाया जाए पीयू का चांसलर
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चंडीगढ़। पीयू शासन सुधार और कॉलेजों के बंटवारे के प्रस्ताव के बाद पंजाब से मांग उठ रही है कि गवर्नर को पीयू का चांसलर बनाया जाए। हितधारकों का तर्क है कि पीयू राज्य का विश्वविद्यालय है। इसके बेहतर संचालन के लिए राज्य सरकार व गवर्नर सही निर्णय ले सकेंगे। पहले यह व्यवस्था चली आ रही थी, लेकिन बाद में इसे बदल दिया गया।
पीयू का संचालन अब अलग तरीके से हो रहा है। इसके चांसलर उपराष्ट्रपति हैं। बताते हैं कि यह व्यवस्था तब बदल गई थी, जब केंद्र सरकार ने पीयू को वेतन की रकम देनी शुरू की थी, क्योंकि शिक्षक तीन माह से अधिक दिनों तक हड़ताल पर थे। उस दौरान यह भी तय हो गया था, कि पीयू के वाइस चांसलर की तैनाती केंद्र सरकार की ओर से की जाएगी। अब कुछ महीनों से पीयू शासन सुधार पर काम चल रहा है। सीनेट व सिंडिकेट पीयू का संचालन कैसे करें, इस पर प्रस्ताव तैयार हुआ। साथ ही कॉलेजों को भौगोलिक आधार पर बांटने की भी बात सामने आई। इसका विरोध पंजाब के लोग कर रहे हैं। राजनेताओं से लेकर शिक्षाविद भी सामने आ रहे हैं।
क्या कहते हैं लोग
पीयू के छात्र नेता एवं एनएसयूआई सोशल मीडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज लुबाना का कहना है कि पीयू के चांसलर का अधिकार गवर्नर को दिया जाना चाहिए। गवर्नर पीयू की बेहतरी के बारे में सोचेंगे। पूर्व में यह व्यवस्था थी, लेकिन बदल दी गई। गवर्नर को हर हाल में चांसलर बनाया जाए। यही बात पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष चेतन चौधरी कहते हैं। उनका भी तर्क है कि पीयू पंजाब का विश्वविद्यालय है। ऐसे में पंजाब के लोग ही इसके बारे में अधिक जानते हैं। यहां के युवा भी विश्वविद्यालय में अधिक हैं। ऐसे में पुरानी व्यवस्था बहाल कर देनी चाहिए। शिक्षाविद डॉ. आलोक प्रकाश का कहना है कि पीयू के बारे में वही व्यक्ति बेहतर जान पाएगा, जो उसके नजदीक होगा। ऐसे में पंजाब के गवर्नर को पीयू का चांसलर बनाया जाना चाहिए। इस व्यवस्था से काम बेहतर होगा और पीयू दौड़ लगाएगी।
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पीयू का संचालन अब अलग तरीके से हो रहा है। इसके चांसलर उपराष्ट्रपति हैं। बताते हैं कि यह व्यवस्था तब बदल गई थी, जब केंद्र सरकार ने पीयू को वेतन की रकम देनी शुरू की थी, क्योंकि शिक्षक तीन माह से अधिक दिनों तक हड़ताल पर थे। उस दौरान यह भी तय हो गया था, कि पीयू के वाइस चांसलर की तैनाती केंद्र सरकार की ओर से की जाएगी। अब कुछ महीनों से पीयू शासन सुधार पर काम चल रहा है। सीनेट व सिंडिकेट पीयू का संचालन कैसे करें, इस पर प्रस्ताव तैयार हुआ। साथ ही कॉलेजों को भौगोलिक आधार पर बांटने की भी बात सामने आई। इसका विरोध पंजाब के लोग कर रहे हैं। राजनेताओं से लेकर शिक्षाविद भी सामने आ रहे हैं।
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क्या कहते हैं लोग
पीयू के छात्र नेता एवं एनएसयूआई सोशल मीडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज लुबाना का कहना है कि पीयू के चांसलर का अधिकार गवर्नर को दिया जाना चाहिए। गवर्नर पीयू की बेहतरी के बारे में सोचेंगे। पूर्व में यह व्यवस्था थी, लेकिन बदल दी गई। गवर्नर को हर हाल में चांसलर बनाया जाए। यही बात पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष चेतन चौधरी कहते हैं। उनका भी तर्क है कि पीयू पंजाब का विश्वविद्यालय है। ऐसे में पंजाब के लोग ही इसके बारे में अधिक जानते हैं। यहां के युवा भी विश्वविद्यालय में अधिक हैं। ऐसे में पुरानी व्यवस्था बहाल कर देनी चाहिए। शिक्षाविद डॉ. आलोक प्रकाश का कहना है कि पीयू के बारे में वही व्यक्ति बेहतर जान पाएगा, जो उसके नजदीक होगा। ऐसे में पंजाब के गवर्नर को पीयू का चांसलर बनाया जाना चाहिए। इस व्यवस्था से काम बेहतर होगा और पीयू दौड़ लगाएगी।
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