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पंजाब की तर्ज पर चंडीगढ़ के पार्षदों का मानदेय
Updated Sat, 28 Nov 2015 12:21 AM IST
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नगर निगम के मेयर समेत पार्षदों को भी पंजाब की तर्ज पर ही मानदेय चाहिए। पार्षदों का कहना है कि पंजाब म्यूनिसिपल एक्ट के अनुसार अगर सभी नियम लागू हो रहे हैं, तो उनका मानदेय भी बढ़ना चाहिए।
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इसलिए 30 नवंबर को होने वाली सदन की बैठक में पार्षदों के मानदेय को बढ़ाने का प्रस्ताव मंजूरी के लिए आ रहा है। इस समय मेयर को हर माह 20 हजार, सीनियर डिप्टी मेयर को 16 और डिप्टी मेयर को साढ़े 12 हजार रुपये मानदेय मिलता है, जबकि पार्षदों को हर माह 10 हजार रुपये मानदेय मिलता है।
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अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो मेयर का मानदेय हर माह 30 हजार, सीनियर डिप्टी मेयर को 24 हजार और डिप्टी मेयर को 18 हजार 725 रुपये मिलेंगे, जबकि पार्षदों का मानदेय 50 प्रतिशत बढ़कर 10 से 15 हजार रुपये हो जाएगा।
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मानदेय के साथ मेयर समेत पार्षदों को मिलने वाला अलाउंस भी बढ़ जाएगा जो कि पार्षदों को सदन, कमेटियों की बैठक में शामिल होने के लिए मिलता है। टेलीफोन का बिल जो हर माह दो हजार रुपये मिलता है वह बढ़कर तीन हजार हो जाएगा। इस समय नगर निगम में कुल 35 पार्षद हैं, जिनमें 9 मनोनीत पार्षद हैं।
अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता है तो पार्षदों को इस माह के जून से बढ़ा हुआ मानदेय मिलेगा क्योंकि पंजाब में जून से इस फैसले की नोटिफिकेशन हुई है।
मेयर को ही मिलती है सरकारी गाड़ी
इस समय मेयर को ही सरकारी गाड़ी और कार्यालय का स्टाफ मिलता है, जबकि सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर को कोई सुविधा प्राप्त नहीं है। सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पास सिर्फ नगर निगम में कमरा है लेकिन कोई फाइल भी इन दोनों कमरे में नहीं आती है।
सिर्फ मेयर की पास फाइलें हस्ताक्षर के लिए आती हैं। जबकि पार्षदों का कहना है कि जब नगर निगम में काम करने वाले एसडीओ स्तर के अधिकारियों को सरकारी वाहन मिल सकता है तो सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर को भी मिलना चाहिए। यह प्रस्ताव भी चार साल पहले पास होकर प्रशासन के पास जा चुका है, लेकिन प्रशासन पार्षदों की इस मांग को खारिज कर चुका है।