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चंडीगढ़ में आवासीय संपत्ति में अपार्टमेंट एक्ट लागू करने की मांग तेज

Wed, 04 Aug 2021 02:03 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Wed, 04 Aug 2021 02:03 AM IST
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Demand for implementation of Apartment Act in residential property in Chandigarh
चंडीगढ़। शहर में एक बार फिर अपार्टमेंट एक्ट को लागू कराने की मांग तेज हो गई है। मंगलवार को शहर की प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स एसोसिएशन ने सेक्टर-27 के प्रेस क्लब में एक प्रेस वार्ता की। इसमें कहा गया कि शहर के प्रभावशाली लोग खुद को बाकी लोगों से अलग रखना चाहते हैं, इसलिए वह अपार्टमेंट एक्ट को लागू कराने के पक्ष में नहीं हैं।
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अध्यक्ष कमल गुप्ता ने कहा कि सेक्टर-10 की आरडब्ल्यूए ने हाईकोर्ट में फ्लोर वाइज परसेंटेज सेल के खिलाफ याचिका दायर की हुई है। उसके मुताबिक शहर में अपार्टमेंट एक्ट लागू नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बॉयज हॉस्टल को माउंटव्यू होटल में तब्दील किया जा सकता है व टैगोर थिएटर का हुलिया आमूल-चूल बदला जा सकता है तो प्रशासन को आम जनता की जरूरतों को ध्यान में रख कर पॉलिसी तैयार करने में क्या दिक्कत है? प्रशासन का तर्क है कि अपार्टमेंट एक्ट के लागू होने पर उत्तर के सेक्टरों में सीवरेज, पार्किंग आदि की समस्या हो जाएगी। इस पर कमल गुप्ता ने कहा कि तीन मंजिला मकान में मालिक रहे या किरायेदार रहे, इससे सीवरेज या पार्किंग पर क्या फर्क पड़ेगा। संस्था महासचिव जतिंदर सिंह ने कहा कि चंडीगढ़ को बने हुए 60 साल से ज्यादा हो गए हैं। इस दौरान माता-पिता के नहीं रहने से अगली पीढ़ी को प्रॉपर्टी ट्रांसफर हो गई, जो समय के साथ-साथ 4-5 भाई बहनों में बंट गई। ज्यादातर मामलों में परिवार से लोग संपत्ति नहीं खरीदना चाहते। कुछ मामलों में खरीदने में समर्थ नहीं होते। अगर अपार्टमेंट एक्ट लागू होगा तो ऐसे लोगों का काफी फायदा होगा।
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250 वकीलों-अफसरों की सूची मौजूद, जरूरत पड़ी को करेंगे सार्वजनिक
चेयरमैन तरलोचन सिंह बिट्टू ने कहा कि आने वाले दिनों में वह प्रशासक वीपी सिंह बदनौर, उनके सलाहकार व अन्य अधिकारियों से भी मिलेंगे। इसके अलावा अगर जरूरत पड़ी तो सड़कों पर भी आएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ समर्थ लोग जिनके पास कई घर हैं, बहुत सारी गाड़ियां हैं और अपना ध्यान रखने में खुद सक्षम हैं, वे ही इस फैसले को अपने हिसाब से करवाना चाहते हैं। तरलोचन सिंह ने कहा कि एसोसिएशन ने करीब 250 ऐसे वकीलों व अफसरों की सूची तैयार की है, जिन्होंने खुद शेयर आधारित संपत्तियां खरीदी हैं। जरूरत पड़ी तो वह उसे भी सार्वजनिक करेंगे।
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हाउसिंग बोर्ड के मकान व सोसायटियों के फ्लैट भी अपार्टमेंट, फिर भेदभाव क्यों?
वाइस चेयरमैन सुनील कुमार ने कहा कि हाउसिंग बोर्ड के मकान व सोसायटियों के फ्लैट भी अपार्टमेंट ही तो हैं, फिर भेदभाव क्यों किया जा रहा है। सेक्टर-19, 24, 27, 37, 38, 40 व 41 की रेहड़ी मार्केट्स भी अपार्टमेंट के रूप में ही बेची गई है। एलांते मॉल, गोदरेज मॉल सहित ऐसे कई मॉल हैं जहां सरकार ने अपार्टमेंट के तौर पर बेचने की इजाजत दे रखी है तो फिर आवासीय संपत्तियों के साथ ऐसा क्यों किया जा रहा है।
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