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चंडीगढ़: कोरोना से हालात सामान्य, पंजाब विश्वविद्यालय में उठी सीनेट चुनाव करवाने की मांग

Sun, 27 Jun 2021 01:15 PM IST
ajay kumar सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 27 Jun 2021 01:15 PM IST
सार

सीनेट व सिंडिकेट का कार्यकाल खत्म हो गया है। इनकी शक्तियां वीसी के पास हैं। शासन संचालन समितियों के न होने से पीयू को 11 डीन नहीं मिल पा रहे हैं। डीन ही विभागों का बेहतर संचालन करते हैं। पाठ्यक्रम नया शुरू करना होगा या फिर शोधार्थियों को थीसिस के लिए अतिरिक्त समय देना हो, यह कार्य डीन के जरिए होता है जो तैनात नहीं हो सके। 

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Demand for conducting Senate elections in Panjab University
पंजाब विश्वविद्यालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना की दूसरी लहर खत्म हो गई है। हालात भी लगभग सामान्य हो रहे हैं। होटल-ढाबे से लेकर बाजार खुल गए हैं। कार्यालयों में भी काम पूरे स्टाफ के साथ होने लगा है। पीयू में सीनेट चुनाव करवाने की मांग उठ गई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक लगभग एक माह तक हालात सामान्य रहने की संभावना है। इस समय यह चुनाव आसानी से हो सकते हैं। पूर्व सीनेटर भी यही चाहते हैं कि अब पीयू इस पर जल्द निर्णय ले ताकि तीसरी लहर के आने से पहले सब प्रक्रियाएं पूरी की जा सकें। 

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पीयू सीनेट का कार्यकाल पूरा होने से पहले चुनाव करवाए जाते हैं। इसलिए पिछले साल जुलाई से ही प्रक्रिया शुरू की गई। अगस्त आते-आते चुनाव कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया और 31 अक्तूबर 2020 को सीनेट का कार्यकाल खत्म हो गया। सीनेट चुनाव करवाने के लिए धरना-प्रदर्शन हुए। हंगामा काफी हुआ। बात नहीं बनी तो मामला हाईकोर्ट पहुंच गया। हाईकोर्ट ने भी चुनाव करवाने के आदेश दिए लेकिन कोरोना की दूसरी लहर आने के कारण चुनाव का कार्यक्रम स्थगित कर दिया।

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बिना सीनेट के ये कार्य प्रभावित

शिक्षकों की पदोन्नतियां काफी समय से अटकी हुई थीं, जिन्हें अब मंजूरी मिली है। रोस्टर लागू न होना, शिक्षकों की तैनाती न होना, विभागों का विलय आदि कार्य अटका हुआ है। इसका असर रैंकिंग पर भी पड़ेगा। सीनेट के न होने से फैसले एकतरफा होने का अंदेशा होता है। इसको लेकर पूर्व सीनेटरों ने आरोप भी लगाए हैं। बड़े वित्तीय कार्यों को लेकर भी मनमाने फैसलों की आशंका रहती है। पारदर्शिता नहीं बनी रहती। ऐसे में सीनेट का होना जरूरी माना जा रहा है।

शासन सुधार का इंतजार तो नहीं
पीयू शासन सुधार के लिए उच्चस्तरीय कमेटी बनाई गई थी। उन्होंने अपनी सिफारिशें चांसलर को भेज दीं। सूत्रों का कहना है कि चांसलर कार्यालय की ओर से शासन सुधार के जो आदेश आएंगे उसके मुताबिक पीयू चुनाव करवाएगी। हालांकि पीयू ने यह साफ नहीं किया है। यदि शासन सुधार होता है तो फिर बड़े पैमाने पर बदलाव होंगे। उन सुधारों के जरिए चुनाव की प्रक्रिया सिमट जाएगी। 

हालात कुछ सामान्य... करवाए जा सकते हैं चुनाव
पीयू का संचालन सीनेट के जरिए होता है। ऐसे में सीनेट का चुनाव अब करवाया जा सकता है। हालात कुछ सामान्य हैं अन्यथा कोरोना की तीसरी लहर भी आ सकती है। पीयू को चुनाव की प्रक्रिया अब जल्द शुरू कर देनी चाहिए। - प्रो. रोनकी राम

जल्द से जल्द चुनाव हों
पीयू सीनेट चुनाव काफी पहले ही हो जाने चाहिए थे। कई बार मौके मिले थे लेकिन इच्छाशक्ति जागृत नहीं हुई। अब कोरोना की दूसरी लहर खत्म हो गई। पीयू जल्द से जल्द चुनाव करवाए ताकि कार्य प्रभावित न हो सकें। - डीपीएस रंधावा

सीनेट है पुरानी व्यवस्था
पीयू में सीनेट का होना जरूरी है। यह पुरानी व्यवस्था है। इस समय चुनाव आसानी से करवाए जा सकते हैं। पीयू को इसकी प्रक्रिया बिना देरी के शुरू करनी चाहिए। सीनेट चुनकर आएगी तो अन्य मुद्दे हल हो सकेंगे। - डॉ. अजय रंगा

सीनेट चुनाव का मामला हाईकोर्ट में चल रहा है। जैसे ही वहां से निर्णय आएगा उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। - रेनुका बी सलवान, डीपीआर पीयू।

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