स्थिति गंभीर: चंडीगढ़ के कोरोना संक्रमित 61 प्रतिशत मरीजों में डेल्टा तो 30 फीसदी में मिला अल्फा वेरिएंट
भारत में दूसरी लहर के दौरान कहर ढा चुका कोरोना का डेल्टा वेरिएंट अब पूरी दुनिया में फैल गया है। अब तक दुनिया भर में इस वेरिएंट के 156 नमूने सामने आए हैं। इसका पहला नमूना मार्च में यूरोप में पाया गया था। डेल्टा ने भारत में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जमकर तबाही मचाई है।
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कोरोना की दूसरी लहर में शहर के मरीजों में डेल्टा और अल्फा वेरिएंट पाया गया है। पीजीआई की ओर से नई दिल्ली एनसीडीसी में भेजे गए 61 प्रतिशत नमूनों में डेल्टा और 30 फीसदी में अल्फा वेरिएंट मिला है। डेल्टा स्ट्रेन (बी 1.617.2) व अल्फा (बी.1.1.7) कोरोना वायरस के ही प्रकार हैं, जो काफी घातक हैं। पीजीआई निदेशक प्रो. जगतराम ने कहा है कि इससे दूसरी लहर की गंभीरता की पुष्टि हो चुकी है। इससे बचने के लिए जरूरी है कि लोग संक्रमण से बचाव के लिए मानकों का पालन करें और टीकाकरण करवाएं।
92 फीसदी चंडीगढ़ के मरीज
पीजीआई ने दूसरी लहर में वायरस के बदलते प्रकार का पता लगाने के लिए 25 पॉजिटिव नमूने जांच के लिए एनसीडीसी नई दिल्ली भेजे थे। इन नमूनों में 92 फीसदी नमूने शहर के लोगों के थे, जबकि बाकी बाहरी शामिल रहे। अधिकारियों ने बताया कि पीजीआई के नेहरू अस्पताल में भर्ती कोरोना के गंभीर मरीजों में 80 फीसदी में डेल्टा वेरिएंट पाया गया। हालांकि, डेल्टा प्लस वेरिएंट नहीं मिला है।
मार्च 2020 से अब तक ढाई लाख लोगों की कोरोना जांच की जा चुकी है। यह भी बताया कि कोविड से मरने वाले 80 फीसदी रोगियों में अल्फा वेरिएंट मिला है। डीन अकादमिक प्रो. जीडी पुरी ने भी आंकड़ों को सामने रखा। इसके साथ ही तीसरी लहर से बचने के तरीकों को बताया। चिकित्सकों का कहना है कि दूसरी लहर के कम होते केस को देखकर यह न सोचें कि कोरोना चला गया, इसके प्रति हमेशा सजग रहना होगा, तभी तीसरी लहर को रोका जा सकेगा।
डेल्टा वेरिएंट बेहद खतरनाक
दूसरी लहर में कोरोना की गंभीर संक्रमणता के कारणों का पता लगा रहे विभिन्न भारतीय संस्थानों के वैज्ञानिकों की एक टीम ने डेल्टा वेरिएंट (बी.1.617.2) के बारे में खोज की। वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में पाया गया कि डेल्टा वेरिएंट (बी.1.617.2) अन्य वेरिएंट की तुलना में काफी खतरनाक है। अल्फा वेरिएंट की तुलना में इसका ट्रांसमिशन 50 फीसदी से अधिक होने का अनुमान है। इसके अलावा अल्फा की तुलना में डेल्टा वेरिएंट का वायरल लोड अधिक पाया गया है।
सावधानी जरूरी
इससे खुद को सुरक्षित रखने के लिए मास्क पहनें, सामाजिक दूरी रखें। इम्युनिटी पर भी निर्भर करता है, जिसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है, उनके लिए घातक साबित हो सकती है। डेल्टा वेरिएंट श्वसन तंत्र (रेस्पिरेटरी ट्रैक) और पेट में इंफेक्शन (जीआई ट्रैक) को ज्यादा प्रभावित करता है।