Chandigarh: चंडीगढ़ में खुला देश का पहला वायुसेना विरासत केंद्र, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने किया उद्घाटन
वायुसेना का पहला विरासत केंद्र चंडीगढ़ के सेक्टर-18 स्थित गवर्नमेंट प्रेस बिल्डिंग में बनाया गया है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के साथ राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित और सांसद किरण खेर भी उद्घाटन समारोह में मौजूद रहे। रक्षा मंत्री ने यहां स्थापित मिग 21 का जायजा भी लिया।
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को चंडीगढ़ सेक्टर-18 स्थित गवर्नमेंट प्रेस बिल्डिंग में अपनी तरह के पहले भारतीय वायुसेना के विरासत केंद्र का उद्घाटन किया। इसकी स्थापना केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ और भारतीय वायुसेना के बीच एक समझौता ज्ञापन के तहत की गई है, जिस पर पिछले साल हस्ताक्षर किए गए थे।
इस मौके पर पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित, एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी और सांसद किरण खेर भी मौजूद थीं। इनकी मौजूदगी में वायुसेना ने इस केंद्र को चंडीगढ़ प्रशासन को हस्तांतरित किया ताकि पर्यटक यहां भारतीय वायुसेना की समृद्ध विरासत और इतिहास को देख सकें।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विरासत केंद्र में दर्शाए गए भारतीय वायुसेना के समृद्ध इतिहास को देखा और इसकी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह केंद्र युवाओं को सशस्त्र सेनाओं में सेवा के प्रति आकर्षित करेगा। उन्होंने उड़ान का जीवंत अनुभव लेने के लिए यहां स्थापित सिमुलेटर में बैठकर इसका अनुभव लिया। इसके अलावा रक्षा मंत्री मिग-21 के कॉकपिट में भी बैठे। 17,000 वर्ग फुट में फैले इस विरासत केंद्र के उद्घाटन अवसर पर वायुसेना के अधिकारियों ने कहा कि यह भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ ने किया ट्वीट
रक्षा मंत्री ने ट्वीट किया कि देश का पहला आईएएफ विरासत केंद्र राष्ट्र को समर्पित किया गया है। उन्होंने लिखा कि यह केंद्र उन सभी लोगों के साहस और समर्पण का वसीयतनामा है, जिन्होंने भारतीय वायुसेना में सेवा की है और राष्ट्र की रक्षा में उनके अमूल्य योगदान की याद दिलाई है। यह केंद्र 1965, 1971, कारगिल युद्ध और बालाकोट हवाई हमले सहित विभिन्न युद्धों में भारतीय वायुसेना की भूमिका को भित्ति चित्रों और यादगार के माध्यम से दर्शाता है। यह केंद्र न केवल चंडीगढ़ के लोगों के लिए बल्कि यहां रहने वाले लोगों के लिए भी एक बड़ा आकर्षण होगा। राजनाथ सिंह ने एक अन्य ट्वीट में कहा- यह अद्भुत पहल भारतीय वायुसेना की समृद्ध विरासत को संरक्षित करने में मदद करेगी और युवाओं को सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित करेगी।
विरासत केंद्र के मुख्य आकर्षण
विभिन्न वर्गों में विभाजित विरासत केंद्र में कई आकर्षण हैं। इनमें विमान के मॉडल, एयरो इंजन और हथियारों समेत ग्रियाजेव-शिपुनोव ट्विन-बैरेल गन शामिल हैं। केंद्र में फ्लाइंग सिमुलेटर हैं जो आगंतुकों को उड़ान का अनुभव प्रदान करेंगे। हेरिटेज सेंटर के आकर्षणों में पांच पुराने विमान और SAM-III पिकोरा मिसाइल भी शामिल हैं।
केंद्र में एक हिंदुस्तान पिस्टन ट्रेनर-32 प्राथमिक उड़ान प्रशिक्षण विमान प्रदर्शित किया गया है। भारतीय वायुसेना में इसके संचालन की अवधि 1977 से 2009 तक थी। एक मिग 21 सिंगल सीट फाइटर को भी रखा गया है। इसके अलावा एयर वाइस मार्शल हरजिंदर सिंह की ओर से 1958 में बनाए गए एयरफोर्स कानपुर-1 को स्थापित किया गया है। एक जीएनएटी विमान (सेब्रे स्लेयर) 1971 को भी प्रदर्शित किया गया है। केंद्र में एक विशेष खंड भी है, जो भारतीय वायुसेना में महिला अधिकारियों को राष्ट्र की सेवा में उनके योगदान के लिए समर्पित किया गया है।
इन विमानों की प्रदर्शनी
केंद्र में नेत्र विमान, प्रचंड हेलीकॉप्टर, एमआई-26, मिग 29, स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान, सी-130 जे हरक्यूलिस, एमकेआई एरियल रिफ्यूलर, सुखोई एसयू-30 एमकेआई, उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर-ध्रुव और एकीकृत वायु कमान के स्केल मॉडल भी हैं। इसके अलावा नियंत्रण प्रणाली वर्कस्टेशन की जानकारी भी शामिल है।