फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Debris of dhruv helicopter recovered 36 days after crash from Ranjit Sagar Dam

पठानकोट: हादसे के 36 दिन बाद बाहर निकाला गया हेलीकॉप्टर का मलबा, को-पालयट जयंत जोशी अब भी लापता

Thu, 09 Sep 2021 08:03 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Thu, 09 Sep 2021 08:03 PM IST
सार

तीन अगस्त को पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर गश्त के दौरान सेना का ध्रुव हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। अनियंत्रित होकर हेलीकॉप्टर रणजीत सागर बांध की झील में जा गिरा था। तभी से झील में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। गुरुवार को झील से 36 दिन बाद हेलीकॉप्टर का मलबा बाहर निकाला गया। 

विज्ञापन
Debris of dhruv helicopter recovered 36 days after crash from Ranjit Sagar Dam
हेलीकॉप्टर का मलबा निकालते सेना के जवान। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

रणजीत सागर बांध (आरएसडी) की झील में सेना के हादसाग्रस्त ध्रुव हेलीकॉप्टर के अधिकांश मलबे को 36 दिन बाद निकाल लिया गया। नौसेना ने आधुनिक यंत्रों से पहले हेलीकॉप्टर की स्थिति का अंदाजा लगाया गया और दोपहर 2:30 बजे हेलीकॉप्टर के मलबे को बाहर निकाल लिया गया। हालांकि, को-पायलट कैप्टन जयंत जोशी का अभी भी कुछ पता नहीं चल पाया है।

विज्ञापन

 
बता दें कि सेना ने अभी अपना रेस्क्यू ऑपरेशन बंद नहीं किया। थल, वायु और नौसेना के विशेषज्ञों के अलावा एनडीआरएफ और मार्कोस कमांडो की अलग-अलग टीमें लगातार झील में उतरकर जांच कर रही हैं। तीन अगस्त को मामून कैंट से हेलीकॉप्टर ने उड़ान भरी थी। हेलीकॉप्टर पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर निगरानी अभियान में जुटा था। 
विज्ञापन


सुबह 10:50 बजे यह झील के स्तर से काफी नजदीक था। तभी अचानक इसका संतुलन बिगड़ गया और हादसे का शिकार हो गया। उसके बाद से लगातार बचाव अभियान चलाया जा रहा था। चालक दल के पायलट लेफ्टिनेंट कर्नल अभीत सिंह बाठ का शव 15 अगस्त को ढूंढ निकाला गया था जबकि को-पायलट जयंत जोशी का अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


सैन्य सूत्रों का कहना है कि सेना व एनडीआरएफ के गोताखोरों की विशेष टीमें कैप्टन जयंत जोशी की तलाश कर रही हैं। खोज में जुटी टीमों का कहना है कि झील में गाद (सिल्ट) मुख्य समस्या बन रही है। इसके अलावा झील में 60 मीटर से नीचे जा पाना मुश्किल है। ऐसे में कैप्टन जयंत जोशी का पता लगाने के लिए नई तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed