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अमरनाथ यात्रा 2019 में श्रद्धालुओं की मौत की संख्या बढ़ी, एक जुलाई से अब तक गई 30 की जान
Fri, 26 Jul 2019 11:28 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजपुर(पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजपुर(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 26 Jul 2019 11:28 AM IST
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अमरनाथ यात्रा
- फोटो : अमर उजाला
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अमरनाथ यात्रा 2019 चल रही है और इसे लेकर एक बड़ी बात सामने आई है और वो ये कि इस बार श्रद्धालुओं की मौत होने की संख्या काफी बढ़ गई है। एक जुलाई से अब तक 30 लोगों की जान जा चुकी है। इन मौतों का कारण श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड की तरफ से यात्रा शुरू होने से दो माह पहले श्रद्धालुओं को जागरूक नहीं किया जाना बताया जा रहा है।
श्री अमरनाथ बर्फानी लंगर आर्गेनाइजेशन (एसएबीएलओ) ने कई बार बोर्ड के साथ हुई बैठक के दौरान श्रद्धालुओं को सोशल मीडिया और अखबारों में विज्ञापन के माध्यम से जागरूक करने की सलाह दी, लेकिन इस पर अमल नहीं किया गया। यही कारण है कि तीस श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है।
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श्री अमरनाथ बर्फानी लंगर आर्गेनाइजेशन (एसएबीएलओ) ने कई बार बोर्ड के साथ हुई बैठक के दौरान श्रद्धालुओं को सोशल मीडिया और अखबारों में विज्ञापन के माध्यम से जागरूक करने की सलाह दी, लेकिन इस पर अमल नहीं किया गया। यही कारण है कि तीस श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है।
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2012 में 107 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी। उस समय मामला अदालत में गया था और उसके बाद प्रयास करके ग्राफ कम किया गया। एसएबीएलओ के प्रधान विजय ठाकुर और महासचिव राजन गुप्ता ने बताया कि अमरनाथ यात्रा के दौरान नौजवानों की ज्यादा मौतें होती हैं, क्योंकि ये लोग मौसम के मुताबिक कपड़े नहीं पहनते हैं।
2012 में हुई मौतों का मामला अदालत में जाने के बाद बोर्ड ने सावधानियां बरतने संबंधी कई नियम लागू किए। ठाकुर ने बताया कि कई बार उनकी बोर्ड के साथ बैठक हुई और उसमें अधिकारियों को सुझाव दिया गया कि यात्रा शुरू होने से दो माह पहले सोशल मीडिया और अखबारों में विज्ञापन के माध्यम लोगों को जागरूक किया जाए कि यात्रा के लिए आते समय गर्म कपड़े, बूट और गर्म जुराबों के अलावा अपनी दवा साथ लेकर चलें।
2012 में हुई मौतों का मामला अदालत में जाने के बाद बोर्ड ने सावधानियां बरतने संबंधी कई नियम लागू किए। ठाकुर ने बताया कि कई बार उनकी बोर्ड के साथ बैठक हुई और उसमें अधिकारियों को सुझाव दिया गया कि यात्रा शुरू होने से दो माह पहले सोशल मीडिया और अखबारों में विज्ञापन के माध्यम लोगों को जागरूक किया जाए कि यात्रा के लिए आते समय गर्म कपड़े, बूट और गर्म जुराबों के अलावा अपनी दवा साथ लेकर चलें।
ठाकुर ने कहा कि बोर्ड को ये सुझाव भी दिया गया कि जिन राज्यों से श्रद्धालु अधिक आते हैं, वहां की भाषा में प्रकाशित होने वाले अखबार में विज्ञापन दिया जाए। श्रद्धालु किन राज्यों से अधिक आते हैं, इसका आंकड़ा बोर्ड के पास है।
ठाकुर ने बताया कि कुछ दिन पहले जब वह अमरनाथ यात्रा पर गए थे और गुफा की सीढ़ियों पर दर्शन के लिए खड़े थे। उनके पास एक नौजवान कैपरी पहने खड़ा था, जो बाद में ठंड से मर गया। महासचिव गुप्ता ने बताया कि 1996 में भी उन्हीं लोगों की मौत हुई थी, जिन्होंने मौसम के मुताबिक कपड़े नहीं पहने हुए थे।
ठाकुर ने बताया कि कुछ दिन पहले जब वह अमरनाथ यात्रा पर गए थे और गुफा की सीढ़ियों पर दर्शन के लिए खड़े थे। उनके पास एक नौजवान कैपरी पहने खड़ा था, जो बाद में ठंड से मर गया। महासचिव गुप्ता ने बताया कि 1996 में भी उन्हीं लोगों की मौत हुई थी, जिन्होंने मौसम के मुताबिक कपड़े नहीं पहने हुए थे।