चंडीगढ़: पाबंदियां हटते ही हादसे भी बढ़े, पिछले साल के मुकाबले ढाई गुना बढ़ा मौतों का आंकड़ा
चंडीगढ़ में इस साल सड़क हादसे पिछले साल की तुलना में लगभग डेढ़ गुना बढ़ गए हैं। इसकी मुख्य वजह ज्यादातर मामलों में तेज रफ्तार माना गया है। पुलिस का मानना है कि पिछली बार हादसे कम होने की वजह शहर में लॉकडाउन और कर्फ्यू था, लेकिन लॉकडाउन के हटते ही जिंदगी पटरी पर आई और फिर से सड़क हादसे तेजी से बढ़ने लगे।
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विस्तार
साल 2021 सड़क हादसों के लिहाज से चंडीगढ़वासियों के लिए बुरा साबित हो रहा है। शहर में पांच ऐसे लाइट प्वाइंट हैं, जो ज्यादातर हादसों के लिए जाने जाते हैं। इनमें प्रेस लाइट प्वाइंट, ट्रांसपोर्ट लाइट, सेंट्रा मॉल लाइट प्वाइंट, पोल्ट्रीफार्म चौक और सेक्टर-45/46/47/48 लाइट प्वाइंट शामिल हैं। इसका मुख्य कारण है कि इन जगहों पर वाहन देर रात तेज रफ्तार में फर्राटे भरते हैं। इन जगहों पर हादसे आम हो गए हैं। इससे यातायात पुलिस का भी सिरदर्द बढ़ गया है। पिछले साल जनवरी से 23 जून तक शहर के अलग-अलग जगहों पर हुए सड़क हादसों में 20 लोगों ने जान गंवाई थीं, लेकिन इस साल इतने ही समय में आंकड़ा बढ़कर 48 पहुंच गया है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब ढाई गुना ज्यादा है।
जनवरी 2020 से 23 जून तक शहर के अलग अलग जगहों पर 62 सड़क हादसे हुए थे। इनमें से 55 वाहन चालक जख्मी हुए थे, जबकि इस साल अब तक 93 हादसों में 75 लोग जख्मी हुए हैं। इस साल सड़क हादसे लगभग डेढ़ गुना बढ़ गए हैं। इसकी मुख्य वजह ज्यादातर मामलों में तेज रफ्तार माना गया है। पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों के अनुसार, पिछली बार हादसा कम होने की वजह शहर में लॉकडाउन और कर्फ्यू था, लेकिन लॉकडाउन के हटते ही जिंदगी पटरी पर आई और फिर से सड़क हादसे तेजी से बढ़ने लगे। लगातार बढ़ते हादसों की वजह से अब यातायात पुलिस की भी मुश्किलें बढ़ गई हैं। पहले आठ दिन, लेकिन अब 3 दिन में एक मौत हो रही है।
45 से 60 वर्ष के बीच वाले 40 फीसदी लोगों की हुई मौत
रफ्तार पर लगाम कसने में पुलिस नाकाम
यातायात पुलिस रात को नाइट विजन स्पीड रडार लगाकर रफ्तार पर लगाम लगाने का प्रयास कर रही थी, लेकिन यह स्पीड रडार हाई सिक्योरिटी नंबर को ही पकड़ती है। ऐसे में कई गाड़ियां चालान कटे बगैर ही नाके से निकल जाती हैं। यातायात पुलिस ने अब इन दिक्कतों को दूर करने के लिए नए स्पीड रडार का प्रस्ताव भेजा है। इसके बाद ही देर रात को दौड़ते वाहनों पर लगाम लगाई जा सकेगी।
हादसों को रोकने के लिए योजना नहीं : विशेषज्ञ
अराइव सेफ संस्था के संस्थापक हरमन सिंह सिद्धू का कहना है कि सड़क हादसे की बढ़ती वजह रफ्तार का कहर तो है ही साथ ही यातायात पुलिस के पास ऐसी कोई योजना नहीं है, जिससे देर रात को होने वाले हादसों को रोका जा सके। इसके साथ ही मुख्य सड़क, विभाजित सड़क और अंदरूनी सड़क पर चलने वाले वाहनों के रफ्तार की लिमिट तय की गई है, लेकिन इसे ध्यान में रखकर लिमिट को कम करने की जरूरत है। वहीं, चालक की मुस्तैदी से भी हादसों पर लगाम लगाया जा सकता है।
इन बातों का रखें ध्यान
2. शराब पीकर ड्राइव न करें
3. पीली और रेड लाइट का सिग्नल तोड़ने से बचें
4. ओवरटेक सोच-समझ कर ही करें
5. वाहन चलाने के दौरान मोबाइल पर बात न करें
6. रात को भी अपने वाहनों की रफ्तार पर कंट्रोल करें
7. बिना पीछे देखे वाहन को मोड़ने से बचें
किन-किन समय पर हुआ हादसा
समय मौत
सुबह 6 से 12 10
दोपहर 12 से 3 06
दोपहर 3 से 6 07
शाम 6 से 9 11
रात 9 से 12 10
रात 12 से 3 03
तड़के 3 से 6 01
बॉक्स
वाहन मौत
पैदल 13
साइकिल 08
रेहड़ी 01
दो पहिया 20
चार पहिया 05
तीन पहिया 01
इन डिवीजन में इतने हुए घायल और मौत
डिवीजन हादसा घायल मौत
ईस्ट 38 31 20
सेंट्रल 13 12 06
साउथ ईस्ट 17 11 09
साउथ वेस्ट 25 21 13
ये हैं ब्लैक स्पॉट
2.सेक्टर-46/47/48/49
3. पोल्ट्री फार्म चौक
4. सेंट्रा मॉल लाइट प्वाइंट
5. सेक्टर-26 ट्रांसपोर्ट लाइट प्वाइंट
6. कलाग्राम लाइट प्वाइंट
7. ट्रिब्यून चौक
8. सेक्टर-52/43 डिवाइडिंग रोड
9.सेक्टर-40/41/54/55 (बड़हेड़ी चौक)
10. पीजीआई क्रासिंग
11.हल्लोमाजरा लाइट प्वाइंट
12. सेक्टर-25/38 लाइट
13. सेक्टर-48/49 स्मॉल चौक
14. एयरपोर्ट लाइट प्वाइंट
15. रेलवे ब्रिज मौलीजागरां
सड़क हादसों को रोकने के लिए यातायात पुलिस का पूरा प्रयास रहता है। साथ ही आए दिन वाहन चालकों को जागरूक भी किया जाता है, ताकि सड़क हादसे को रोका जा सके। -एसपीएस सोंधी, डीएसपी यातायात पुलिस