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Haryana: आखिर मान गए विज, कल से शुरू कर सकते हैं स्वास्थ्य विभाग का काम
Sun, 10 Dec 2023 12:02 AM IST
भूपेंद्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Sun, 10 Dec 2023 12:02 AM IST
सार
महानिदेशक को कहीं और एडजस्ट करने की तैयारी है। विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले गतिरोध टूटा है। महानिदेशक (द्वितीय) डॉ. पूनिया को विभाग की जिम्मेदारी दी जाएगी।
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हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज।
- फोटो : फाइल
विस्तार
हरियाणा में स्वास्थ्य विभाग को लेकर मंत्री अनिल विज और मुख्यमंत्री कार्यालय के बीच चल रहा गतिरोध 66 दिन बाद आखिरकार टूट गया। सरकार स्वास्थ्य महानिदेशक डा. सोनिया त्रिखा खुल्लर को कहीं और एडजस्ट करने की तैयारी कर रही है। उनकी जगह महानिदेशक (द्वितीय) डाॅ. आरएस पूनिया को पूरी जिम्मेदारी दी जाएगी। शुरुआत में डा. त्रिखा को छुट्टी पर भी भेजा जा सकता है।
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विज ने 7 दिसंबर को मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मुलाकात की थी। सूत्रों के अनुसार, सीएम ने उनको आश्वासन दिया है कि जल्द ही स्वास्थ्य विभाग महानिदेशक को विभाग से अलग कर दिया जाएगा। आश्वासन के बाद अब अनिल विज संतुष्ट हैं। संभवतया वह सोमवार से विभाग की फाइलें भी देखना शुरू कर देंगे।
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विज स्वास्थ्य विभाग छोड़ने की चेतावनी दे चुके थे। उन्होंने यह तक कह दिया था वह 15 दिसंबर से शुरू होने वाले शीतकालीन सत्र में स्वास्थ्य विभाग से संबंधित कोई जवाब नहीं देंगे। ऐसे में सरकार चिंतित थी कि विपक्षी दल सदन में इसे मुद्दा बना सकते हैं, लेकिन इससे पहले ही सरकार ने गतिरोध खत्म कर दिया। इस बारे में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज का कहना है कि मुख्यमंत्री ने जो आश्वासन दिया, उससे वह संतुष्ट हैं।
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पांच अक्तूबर से चल रहा था विवाद
डा. सोनिया त्रिखा खुल्लर के पति राजेश खुल्लर मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव हैं। राजेश खुल्लर ने पांच अक्तूबर को स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की समीक्षा बैठक की थी। इसमें निदेशक, महानिदेशक से लेकर एसीएस तक अधिकारी मौजूद थे। विज को यही बात नागवार गुजरी। उन्होंने मामले की शिकायत सीएम और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष से कर विभाग से किनारा कर लिया था।
अफसरशाही की शिकायतें करते रहे हैं विधायक, विज के रुख से सीएम पर बना दबाव
विज के अलावा कई मंत्री और विधायक सरकार से अफसरशाही की शिकायतें करते रहे हैं। विज के रुख से मुख्यमंत्री पर दबाव बना। विज को मनाने के लिए विभाग के मुखिया को बदलने का फैसला लेना ही पड़ा। यह अफसरशाही को भी बड़ा संकेत है।