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शरीर ने नहीं दिया मेयनी का साथ, कठिन मुकाबले में जीते साकेत
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 16 Jul 2016 09:52 AM IST
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‘मेरे लिए आज का मैच सबसे कठिन मुकाबलों में से एक रहा। मांसपेशी में खिंचाव से जूझते हुए एक बार तो लगा कि मैच के दौरान शायद दोबारा कोर्ट पर नहीं लौट पाऊंगा। लेकिन हिम्मत नहीं हारा और दृढ़ निश्चय करते हुए कोर्ट पर लौटा और जीत दर्ज कर की।’
यह कहना था भारतीय खिलाड़ी साकेत मेयनी का, जिन्होंने शुक्रवार को डेविस कप के सिंगल्स मुकाबले में कोरियाई खिलाड़ी योंग क्यू लिम को मात दी। मैच में साकेत बीच-बीच में मांसपेशी के खिंचाव से परेशान नजर आए। ऊपर से पसीने और गर्मी ने परेशान किया। उन्हें बीच-बीच में बर्फ और स्प्रे कर तारोताजा होना पड़ा।
नॉन प्लेइंग कैप्टन आनंद अमृतराज भी एक समय चिंतित थे कि साकेत पूरा मैच खेल भी पाएंगे या नहीं। मैच के अंतिम चरण में साकेत लड़खड़ाते हुए खेल रहे थे और मैच जीतने में सफल रहे। साकेत के मैच जीतने के बाद आनंद अमृतराज ने उनकी दृढ़ इच्छा शक्ति की तारीफ की।
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पांच सेट तक खेलना चाहते थे
मैच के बाद साकेत ने कहा कि वह तो मैच को पांच सेट तक पूरा खेल कर खत्म करना चाहते थे, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि यह सब काफी चुनौतीपूर्ण था, उनके हाथ और पैर दोनों में खिंचाव आ गया था। उन्होंने सोच लिया था कि हिम्मत नही हारनी है।
उन्होंने जीत का श्रेय भारतीय टीम के पूरे स्टाफ को दिया जिन्होंने कठिन समय में उनकी खेल जारी रखने में मदद की। साकेत की मानें तो वह लय हासिल करने की कोशिश कर रहे थे।
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यह कहना था भारतीय खिलाड़ी साकेत मेयनी का, जिन्होंने शुक्रवार को डेविस कप के सिंगल्स मुकाबले में कोरियाई खिलाड़ी योंग क्यू लिम को मात दी। मैच में साकेत बीच-बीच में मांसपेशी के खिंचाव से परेशान नजर आए। ऊपर से पसीने और गर्मी ने परेशान किया। उन्हें बीच-बीच में बर्फ और स्प्रे कर तारोताजा होना पड़ा।
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नॉन प्लेइंग कैप्टन आनंद अमृतराज भी एक समय चिंतित थे कि साकेत पूरा मैच खेल भी पाएंगे या नहीं। मैच के अंतिम चरण में साकेत लड़खड़ाते हुए खेल रहे थे और मैच जीतने में सफल रहे। साकेत के मैच जीतने के बाद आनंद अमृतराज ने उनकी दृढ़ इच्छा शक्ति की तारीफ की।
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पांच सेट तक खेलना चाहते थे
मैच के बाद साकेत ने कहा कि वह तो मैच को पांच सेट तक पूरा खेल कर खत्म करना चाहते थे, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि यह सब काफी चुनौतीपूर्ण था, उनके हाथ और पैर दोनों में खिंचाव आ गया था। उन्होंने सोच लिया था कि हिम्मत नही हारनी है।
उन्होंने जीत का श्रेय भारतीय टीम के पूरे स्टाफ को दिया जिन्होंने कठिन समय में उनकी खेल जारी रखने में मदद की। साकेत की मानें तो वह लय हासिल करने की कोशिश कर रहे थे।