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कोरोना महामारी से लड़ने के बाद क्वारंटीन थी मणिपुर की छात्रा, घर जाकर कर ली खुदकुशी
Wed, 01 Jul 2020 11:56 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jul 2020 11:56 AM IST
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चंडीगढ़ सेक्टर-10 स्थित डीएवी कॉलेज की एक छात्रा ने मणिपुर स्थित अपने घर में आत्महत्या कर ली। कुछ समय पहले दिल्ली में वह कोरोना संक्रमित पाई गई थी। इलाज के बाद वह ठीक होकर अपने घर मणिपुर लौट गई थी। वहां नियमों के मुताबिक उसे 14 दिन तक क्वारंटीन रहने के निर्देश मिले थे। क्वारंटीन पीरियड के दौरान ही 21 वर्षीय छात्रा नाओरोइबम ने मंगलवार को आत्महत्या कर ली।
डीएवी कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. पवन शर्मा ने फेसबुक पोस्ट डालकर छात्रा नाओरोइबम के परिवार के प्रति सहानुभूति जताई है। डॉ. शर्मा ने कहा कि नाओरोइबम हमारे कॉलेज में एमए सोशियोलॉजी फोर्थ सेमेस्टर में थी। होनहार होने के साथ वह शैक्षणिक व कल्चरल गतिविधियों में हमेशा एक्टिव रहती थी।
वहीं, डिपार्टमेंट ऑफ सोशियोलॉजी के हेड जगदीश मेहता ने बताया कि नाओरोइबम तीन अन्य मणिपुरी छात्राओं के साथ रहती थी। वह काफी शांत स्वभाव की थी। ऐसे हालातों में पहले कोरोना के कारण मानसिक रूप में तनाव में रहना, फिर ठीक होने के बावजूद एकांतवास में रहने के कारण निराश होना लाजमी है।
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जैसा वर्तमान हालातों में देखने को मिल रहा है कोरोना मरीजों के लिए लोग मन में एक निगेटिव भावना बना कर रखते हैं, जिसके कारण भी मरीज मानसिक तनाव और दबाव में आ जाता है। जानकारी के अनुसार, छात्रा नाओरोइबम को कुछ समय पहले डेंगू भी हुआ था। हालांकि इलाज के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ हो गई थी।
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डीएवी कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. पवन शर्मा ने फेसबुक पोस्ट डालकर छात्रा नाओरोइबम के परिवार के प्रति सहानुभूति जताई है। डॉ. शर्मा ने कहा कि नाओरोइबम हमारे कॉलेज में एमए सोशियोलॉजी फोर्थ सेमेस्टर में थी। होनहार होने के साथ वह शैक्षणिक व कल्चरल गतिविधियों में हमेशा एक्टिव रहती थी।
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वहीं, डिपार्टमेंट ऑफ सोशियोलॉजी के हेड जगदीश मेहता ने बताया कि नाओरोइबम तीन अन्य मणिपुरी छात्राओं के साथ रहती थी। वह काफी शांत स्वभाव की थी। ऐसे हालातों में पहले कोरोना के कारण मानसिक रूप में तनाव में रहना, फिर ठीक होने के बावजूद एकांतवास में रहने के कारण निराश होना लाजमी है।
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जैसा वर्तमान हालातों में देखने को मिल रहा है कोरोना मरीजों के लिए लोग मन में एक निगेटिव भावना बना कर रखते हैं, जिसके कारण भी मरीज मानसिक तनाव और दबाव में आ जाता है। जानकारी के अनुसार, छात्रा नाओरोइबम को कुछ समय पहले डेंगू भी हुआ था। हालांकि इलाज के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ हो गई थी।