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Haryana: एचएसजीएमसी के चुनाव का इंतजार, न हलकाबंदी हुई, न बने नए वोट... अभी तदर्थ कमेटी की ही सरकार

Mon, 06 Mar 2023 02:18 PM IST
निवेदिता वर्मा राजेश शांडिल्य, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजेश शांडिल्य, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 06 Mar 2023 02:18 PM IST
सार

हरियाणा की अलग प्रबंधक कमेटी के लिए संघर्ष, फिर अधिनियम और अब जिम्मा संभालने के बाद अगला बड़ा काम हरियाणा में पहली बार स्वतंत्र रूप से होने जा रहे प्रबंधक कमेटी के चुनाव का है। इसमें चुने गए 40 सदस्यों के अलावा 11 मनोनीत सदस्यों का हाउस आगामी बड़े फैसले ले सकेगा।

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Date of elections for Haryana Gurdwara Management Committee is not decided yet
जगदीश झींडा

विस्तार

हरियाणा में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव होना तय हैं, लेकिन अभी तक ना हलकाबंदी हुई और न ही नए वोट बनने का सिलसिला शुरू हुआ। हालांकि यह पहली बार होगा, जब प्रबंधक कमेटी के चुनाव समस्त हरियाणा के 40 हलकों में होंगे, लेकिन यह हलके कौन-कौन से होंगे, यह तस्वीर हलकाबंदी के बाद साफ होगी। यहां बता दें कि पंजाब, हिमाचल, चंडीगढ़ में भी हरियाणा की तरह 2011 में एसजीपीसी की आम सभा के 170 सीटों के लिए चुनाव हुए थे, जिसकी अवधि दिसंबर 2016 को समाप्त हो चुकी है। उसके बाद अब चुनाव नहीं हुए।
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अब से पहले इन चारों जगहों पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अमृतसर आम सभा के जो चुनाव होते थे, इनमें हरियाणा बाहर हो चुका है। क्योंकि यहां 2014 में ही अलग हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन अधिनियम बन चुका है। अधिनियम बनने के बाद एक तदर्थ कमेटी तो बनी, मगर संचालन का जिम्मा अभी तक एसजीपीसी अमृतसर के हाथों में रहा। खैर, अब लंबे संघर्ष के बाद 2023 में तदर्थ कमेटी के हाथों में हरियाणा के गुरुद्वारों के संचालन का जिम्मा आ चुका है। हरियाणा की अलग प्रबंधक कमेटी के लिए संघर्ष, फिर अधिनियम और अब जिम्मा संभालने के बाद अगला बड़ा काम हरियाणा में पहली बार स्वतंत्र रूप से होने जा रहे प्रबंधक कमेटी के चुनाव का है। इसमें चुने गए 40 सदस्यों के अलावा 11 मनोनीत सदस्यों का हाउस आगामी बड़े फैसले ले सकेगा। मगर इससे पहले चुनावी प्रक्रिया के लिए हलकाबंदी और वोट बनाने का काम होगा, जोकि अभी तक शुरू भी नहीं हुआ।
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तदर्थ कमेटी के पहले अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा की मानें तो तदर्थ कमेटी सरकार द्वारा बनाई गई कमेटी है। असली कमेटी वो होगी, जिन्हें संगत चुन कर हाउस में भेजेगी। वह चाहते हैं कि जल्द हरियाणा में प्रबंधक कमेटी के चुनाव हों। इसके लिए वह होली के बाद गुरुद्वारा चुनाव आयुक्त जस्टिस एचएस भल्ला से मिलेंगे, ताकि चुनाव से पहले की प्रक्रिया को समय रहते पूरा किया जा सके और चुनाव अगले छह माह के भीतर हो सकें।
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पांच साल में होने वाले चुनाव 1978 के बाद केवल तीन बार हुए
गुरुद्वारा एक्ट के अनुसार जनरल हाउस का चुनाव हर पांच साल बाद होना चाहिए था। हालांकि आम सभा का चुनाव नहीं होने की स्थिति में पुरानी आम सभा ही तमाम गतिविधियों को संचालित करती है। यह पहला मौका नहीं है जब चुनाव में देरी हुई है। बता दें कि 1978 के बाद यह स्थिति कई बार उत्पन्न हुई, क्योंकि 1978 के बाद 2023 तक केवल 1996 और 2004 के बाद आखिरी बार 2011 में प्रबंधक कमेटी साधारण सभा की 170 सीटों के चुनाव पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और हिमाचल में हुए थे। हालांकि हरियाणा में अब यह प्रक्रिया नए सिरे से पहले चुनाव के बाद शुरू होगी। इसी के साथ देखना यह भी होगा कि यहां भी हर पांच साल बाद आम सभा के चुनाव होंगे या पहले वाले जैसे हालात रहेंगे।

दस लाख पार हो सकती है वोटरों की संख्या : अजराना
सिख नेता कंवलजीत सिंह अजराना के मुताबिक 2011 में हरियाणा में करीब साढ़े तीन लाख वोटर थे। अब अलग कमेटी बनने से वोटरों की संख्या बढ़ने का अनुमान है। हरियाणा में अब वोटरों की संख्या दस लाख पार जा सकती है। उनके मुताबिक हरियाणा में इस समय सिखों की संख्या 17 लाख से भी ज्यादा है।


हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन अधिनियम-2014 की वैधता बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन अधिनियम-2014 की वैधता को बरकरार रखा है। यह अधिनियम राज्य के गुरुद्वारों का प्रबंध करने के लिए एसजीपीसी अमृतसर से अलग बनाई कमेटी को अधिकार देता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस अधिनियम की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था। दरअसल हरियाणा में 2014 में अलग कमेटी बनने के बाद अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज दिया था।
 
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