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विस चुनावः सभी का टारगेट दलित वोट बैंक, जो पंजाब में सबसे ज्यादा
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 16 Jan 2017 04:15 PM IST
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पंजाब विधानसभा चुनाव
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देश भर में दलित वर्ग की सबसे ज्यादा संख्या पंजाब में है। ऐसे में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर हर किसी का टारगेट दलित वोट बैंक ही है। प्रदेश में करीब 34 फीसदी दलित जनसंख्या रहती है।
सभी राजनीतिक दल इस वर्ग के वोटों को अपने पक्ष पर करने की जीतोड़ कोशिश करता दिखाई दे रहा है लेकिन पंजाब के इन चुनावों में खास बात यह है कि दलित वोटों पर इस बार केवल नेताओं की ही नजर नहीं है, बल्कि कई दलित वर्ग से संबंधित रिटायर्ड उच्चाधिकारी भी चुनाव मैदान में उतर गए हैं।
वे खुद को दलित वर्ग से संबंधित बताकर इन वोटों के सहारे चुनाव जीतना चाहते हैं। फिलहाल राज्य की 117 विधानसभा सीटों में 34 रिजर्व सीटें हैं। दलित वर्ग से आए ऐसे उच्चाधिकारियों में, आईएएस अफसर एसआर कलेर जगराओं से अकाली विधायक रह चुके हैं और इस बार निहाल सिंह वाला विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में हैं।
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सभी राजनीतिक दल इस वर्ग के वोटों को अपने पक्ष पर करने की जीतोड़ कोशिश करता दिखाई दे रहा है लेकिन पंजाब के इन चुनावों में खास बात यह है कि दलित वोटों पर इस बार केवल नेताओं की ही नजर नहीं है, बल्कि कई दलित वर्ग से संबंधित रिटायर्ड उच्चाधिकारी भी चुनाव मैदान में उतर गए हैं।
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वे खुद को दलित वर्ग से संबंधित बताकर इन वोटों के सहारे चुनाव जीतना चाहते हैं। फिलहाल राज्य की 117 विधानसभा सीटों में 34 रिजर्व सीटें हैं। दलित वर्ग से आए ऐसे उच्चाधिकारियों में, आईएएस अफसर एसआर कलेर जगराओं से अकाली विधायक रह चुके हैं और इस बार निहाल सिंह वाला विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में हैं।
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बादल बस्सी पठाना से आजमा रहे किस्मत
पंजाब विधानसभा चुनाव
उधर, मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के प्रमुख सचिव रहे दरबारा सिंह गुरु पिछली बार भदोड़ सीट से चुनाव हार गए थे, लेकिन इस बार वे बस्सी पठाना सीट से एक बार फिर किस्मत आजमाने जा रहे हैं। मोगा के डीसी रहे कुलदीप सिंह वैद्य तो सियासत में भाग्य आजमाने के लिए अपने पद से इस्तीफा देकर चुनाव मैदान में उतरे हैं। कांग्रेस ने उन्हें गिल विधानसभा सीट से टिकट दे दिया है।
कांग्रेस के ही टिकट पर रिटायर्ड पीसीएस अधिकारी एएस भट्टी भी दूसरी बार चुनाव मैदान में उतरे हैं। उन्हें मलोट से टिकट दिया गया है। कांग्रेस ने ही इस बार अटारी रिजर्व सीट से तरसेम सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है जोकि प्रदेश के कई जिलों के डीसी रह चुके हैं। मध्य प्रदेश में सचिव पद पर रह चुके डॉ. अमर सिंह को भी इस बार कांग्रेस ने रायकोट सीट से टिकट दिया है।
अकाली दल की बात करें तो जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस निर्मल सिंह को पार्टी ने दूसरी बार चुनाव मैदान में उतारते हुए चमकौर साहिब सीट से टिकट दिया है। जस्टिस निर्मल सिंह पिछली बार बस्सी पठाणा सीट से शिअद के विधायक चुने गए थे। चमकौर साहिब सीट पर इस बार उनका मुकाबला चरनजीत सिंह चन्नी से है। अकाली दल के टिकट पर ही आईपीएस अधिकारी सनमीत कौर के पति अमित रतन को बठिंडा रूरल सीट से चुनाव में उतारा गया है।
कांग्रेस के ही टिकट पर रिटायर्ड पीसीएस अधिकारी एएस भट्टी भी दूसरी बार चुनाव मैदान में उतरे हैं। उन्हें मलोट से टिकट दिया गया है। कांग्रेस ने ही इस बार अटारी रिजर्व सीट से तरसेम सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है जोकि प्रदेश के कई जिलों के डीसी रह चुके हैं। मध्य प्रदेश में सचिव पद पर रह चुके डॉ. अमर सिंह को भी इस बार कांग्रेस ने रायकोट सीट से टिकट दिया है।
अकाली दल की बात करें तो जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस निर्मल सिंह को पार्टी ने दूसरी बार चुनाव मैदान में उतारते हुए चमकौर साहिब सीट से टिकट दिया है। जस्टिस निर्मल सिंह पिछली बार बस्सी पठाणा सीट से शिअद के विधायक चुने गए थे। चमकौर साहिब सीट पर इस बार उनका मुकाबला चरनजीत सिंह चन्नी से है। अकाली दल के टिकट पर ही आईपीएस अधिकारी सनमीत कौर के पति अमित रतन को बठिंडा रूरल सीट से चुनाव में उतारा गया है।