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दादा-पोती के शव एक ही अर्थी पर गए श्मशान घाट
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो-पंचकूला
Updated Sun, 09 Feb 2014 01:31 AM IST
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अंबाला-शिमला राजमार्ग पर पिंजौर के मुख्य बाजार में शुक्रवार को एक दर्दनाक दुर्घटना में दादा व पोती की मौत के बाद पिंजौर के बैरागी मोहल्ले में शनिवार को भी सन्नाटा पसरा रहा। स्कूल से लौटते समय डीपीएस की पहली कक्षा की छात्रा झलक (7) और उसके दादा को तेज रफ्तार ट्रक रौंदते हुए निकल गया था। झलक के शव का कालका सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम करवाया गया, वहीं उसके दादा होम बहादुर (62) के शव का पोस्टमार्टम पीजीआई चंडीगढ़ में करवाकर पिंजौर लाया गया। पोती दादा के लिए एक ही अर्थी बनाई गई, उसी अर्थी पर दोनों को पिंजौर के रामबाग श्मशान घाट ले जाया गया। वहां दोनों की एक ही चिता बनाकर झलक के पिता कुलदीप थापर व चाचा सुनील थापर ने मुखागिभन दी। दोनाें की चिता को अग्नि देते समय झलक की दादी और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। शव यात्रा में पिंजौर के पार्षद सतविद्र टोनी, पूर्व पार्षद रमेश चंद भट्टी, नगर पालिका पूर्व प्रधान कुलदीप सिंह किक्का और पूर्व पार्षद निर्मला के पति फतेह शर्मा मौजूद थे। वहीं, डीपीएस का स्टाफ में श्मशान घाट पहुंचा, लेकिन प्रिसिंपल सैमसन मसीह कही नजर नहीं आए।
मम्मी कढ़ी-चावल बनाकर रखना...
झलक परिवार में इकलौती संतान थी, जिसे दादा-दादी के अलावा परिवार के सभी सदस्य बहुत प्यार करते थे। वह पढ़ाई में तेज होने के साथ-साथ अन्य क्रिया-कलापों में तेज थी। दुर्घटना वाले दिन स्कूल जाते समय झलक अपनी मम्मी से कहकर गई थी कि उसके लिए कड़ी चावल बनाकर रखना वह आकर खाएगी। उसके लिए कड़ी चावल भी बनाए गए जो ऐसे ही रह गए। परिवार के सदस्य रमेश चंद भट्टी ने बताया कि दादा पोती के प्यार को देखते हुए उन दोनों की एक ही दुर्घटना में मौत होने पर एक होने पर ही परिवार ने निर्णय लिया की एक ही अर्थी व एक ही चिता में संस्कार किया जाए।
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मम्मी कढ़ी-चावल बनाकर रखना...
झलक परिवार में इकलौती संतान थी, जिसे दादा-दादी के अलावा परिवार के सभी सदस्य बहुत प्यार करते थे। वह पढ़ाई में तेज होने के साथ-साथ अन्य क्रिया-कलापों में तेज थी। दुर्घटना वाले दिन स्कूल जाते समय झलक अपनी मम्मी से कहकर गई थी कि उसके लिए कड़ी चावल बनाकर रखना वह आकर खाएगी। उसके लिए कड़ी चावल भी बनाए गए जो ऐसे ही रह गए। परिवार के सदस्य रमेश चंद भट्टी ने बताया कि दादा पोती के प्यार को देखते हुए उन दोनों की एक ही दुर्घटना में मौत होने पर एक होने पर ही परिवार ने निर्णय लिया की एक ही अर्थी व एक ही चिता में संस्कार किया जाए।
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