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पीयू में सालों से नहीं बदला पाठ्यक्रम, अब नई शिक्षा नीति के आधार पर होगा बदलाव
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में करीब तीन साल से पाठ्यक्रम में बदलाव नहीं हुआ है। बीच में कई बार पाठ्यक्रम में बदलाव करने की मांग भी उठी थी, लेकिन सिर्फ विचार-चर्चा ही हुई। इसके बाद दो साल कोरोना महामारी के कारण कोई बदलाव नहीं हो पाया। मौजूदा समय में चल रहा पाठ्यक्रम स्किल बेस्ड नहीं होने के कारण रोजगार प्रभावी नहीं है। इस कारण छात्रों को नौकरी लेने में मुश्किलें होती हैं। अभी पीयू ने नई शिक्षा नीति के आधार पर पाठ्यक्रम में बदलाव करने की योजना बनानी शुरू की है।
पंजाब यूनिवर्सिटी में पाठयक्रम में बदलाव अकादमिक काउंसिल करती है। पिछले लंबे समय से अकादमिक काउंसिल की बैठक नहीं हुई, इसलिए पीयू के विभागों सहित कॉलेजों के पाठ्यक्रम में बदलाव नहीं हुआ है। कॉलेजों का कहना है कि पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव की जरूरत है क्योंकि कोर्स बाजार की मांग के अनुसार प्रभावी नहीं हैं। छात्र स्नातक कर लेते हैं, लेकिन हम उन्हें नौकरी योग्य नहीं बना पाते। पाठ्यक्रम नई स्किल और इंडस्ट्री में हो रहे नए बदलावों के आधार पर नहीं बना है जिसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ता है। छात्र अपने स्तर पर ही नई स्किल सीखकर नौकरी ले रहे हैं। कॉलेज अपने स्तर पर पाठ्यक्रम में कुछ नए बदलाव नहीं कर सकते हैं, इसलिए उनकी निगाहें पीयू की ओर हैं।
कई विभाग ले रहे एलुमनी से प्रतिक्रिया
पीयू के कई विभाग इंडस्ट्री में काम करने वाले एलुमनी से प्रतिक्रिया ले रहे हैं। पीयू से पढ़ने के बाद उनके अनुसार कोर्स में क्या नए बदलाव करने की जरूरत है या बाजार में किस स्किल की अधिक मांग है। विद्यार्थियों को पढ़ाने के तरीके में क्या बदलाव किए जाने चाहिए। कला विभाग के शिक्षक ने बताया कि एलुमनी से अच्छी प्रतिक्रिया कोई नहीं दे सकता। पाठ्यक्रम बदलते समय उनका सहयोग जरूर लिया जाना चाहिए।
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क्या कहते हैं अधिकारी
नई शिक्षा नीति के आधार पर ऑनर्स स्कूल के लिए पाठ्यक्रम बदलने के लिए ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। इसे जल्द ही विभागों के अध्यक्ष के पास भेजा जाएगा। कोर्स को स्किल बेस्ड, मल्टीडिस्पलनरी, इंटरडिस्पलनरी बनाया जाएगा। इसके साथ ही छात्र को कभी भी कोर्स छोड़ने की आजादी (एंट्री-एग्जिट) होगी। उसे उसके साल के आधार पर डिप्लोमा या शोध की डिग्री दी जाएगी। -डॉ. रेणु विग, डीयूआई, पीयू
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पंजाब यूनिवर्सिटी में पाठयक्रम में बदलाव अकादमिक काउंसिल करती है। पिछले लंबे समय से अकादमिक काउंसिल की बैठक नहीं हुई, इसलिए पीयू के विभागों सहित कॉलेजों के पाठ्यक्रम में बदलाव नहीं हुआ है। कॉलेजों का कहना है कि पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव की जरूरत है क्योंकि कोर्स बाजार की मांग के अनुसार प्रभावी नहीं हैं। छात्र स्नातक कर लेते हैं, लेकिन हम उन्हें नौकरी योग्य नहीं बना पाते। पाठ्यक्रम नई स्किल और इंडस्ट्री में हो रहे नए बदलावों के आधार पर नहीं बना है जिसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ता है। छात्र अपने स्तर पर ही नई स्किल सीखकर नौकरी ले रहे हैं। कॉलेज अपने स्तर पर पाठ्यक्रम में कुछ नए बदलाव नहीं कर सकते हैं, इसलिए उनकी निगाहें पीयू की ओर हैं।
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कई विभाग ले रहे एलुमनी से प्रतिक्रिया
पीयू के कई विभाग इंडस्ट्री में काम करने वाले एलुमनी से प्रतिक्रिया ले रहे हैं। पीयू से पढ़ने के बाद उनके अनुसार कोर्स में क्या नए बदलाव करने की जरूरत है या बाजार में किस स्किल की अधिक मांग है। विद्यार्थियों को पढ़ाने के तरीके में क्या बदलाव किए जाने चाहिए। कला विभाग के शिक्षक ने बताया कि एलुमनी से अच्छी प्रतिक्रिया कोई नहीं दे सकता। पाठ्यक्रम बदलते समय उनका सहयोग जरूर लिया जाना चाहिए।
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क्या कहते हैं अधिकारी
नई शिक्षा नीति के आधार पर ऑनर्स स्कूल के लिए पाठ्यक्रम बदलने के लिए ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। इसे जल्द ही विभागों के अध्यक्ष के पास भेजा जाएगा। कोर्स को स्किल बेस्ड, मल्टीडिस्पलनरी, इंटरडिस्पलनरी बनाया जाएगा। इसके साथ ही छात्र को कभी भी कोर्स छोड़ने की आजादी (एंट्री-एग्जिट) होगी। उसे उसके साल के आधार पर डिप्लोमा या शोध की डिग्री दी जाएगी। -डॉ. रेणु विग, डीयूआई, पीयू