बारिश व ओलावृष्टि से तबाही: खेतों में फसल बिछी, पानी में डूबा मंडियों पर पड़ा धान, फिरोजपुर में किसानों का बड़ा नुकसान
पंजाब के फिरोजपुर में बारिश और ओलावृष्टि किसानों के लिए आफत बनकर आई। एक ओर जहां मंडियों में पड़ा धान भीग गया तो वहीं दूसरी ओर खेत में खड़ी फसल बिछ गई। किसानों ने सरकार से उचित मुआवजे की मांग की है।
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मूसलाधार बारिश से मंडियों में खुले में पड़ा धान भीग गया। बोरियों में भरा धान भी नीचे से भीग गया है। बारिश से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। धान गीला होने के कारण रविवार को मंडियों में खरीद नहीं की गई। किसानों का कहना है कि प्रति क्विंटल तकरीबन पांच किलो धान की फसल नष्ट हुई है।
किसान रेशम सिंह व संतोख सिंह ने बताया कि उनकी फसल शहर की मंडी में पड़ी है। जिसकी अभी खरीद नहीं हुई है। शनिवार देर शाम अचानक मूसलाधार बारिश होने से मंडी में खुले आसमान तले पड़े धान के ढेर पानी में डूब गए हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें प्रति क्विंटल लगभग पांच किलो धान का नुकसान हुआ है। जब तक धान की फसल सूखेगी नहीं, तब तक खरीद एजेंसियों के अधिकारी उनकी धान खरीदेंगे नहीं।
जलालाबाद में किसान नेता गुरविंदर सिंह मन्नेवाला ने पंजाब सरकार से फसल के हुए नुकसान की गिरदावरी करवाकर किसानों को मुआवजा देने की मांग की है। मंडियों में किसानों का धान गिला होने से रविवार को धान की खरीद नहीं हुई है। ज्यादातर किसानों के पास तिरपाल नहीं होने के कारण बारिश में धान गिला हो गया। मंडियों में पानी भरने से धान के ढेर भी जलमग्न हो गए।
ओलावृष्टि और तेज आंधी से बासमती को भी भारी नुकसान
ओलावृष्टि और तेज आंधी के कारण खेतों में खड़ी बासमती की फसल जमीन पर बिछ गई। ओलावृष्टि से धान की बालियों के दाने जमीन पर गिर गए, जिन्हें देख किसानों के चेहरों पर उदासी छा गई। किसानों का कहना है कि उनकी आधी फसल नष्ट हो गई है। खेतों में बिछी बासमती की फसल अब मशीन नहीं बल्कि हाथों से काटनी पड़ेगी। जिले में गुरुहरसहाए, झोक हरिहर के अलावा जलालाबाद व मंडी लाधुका में ओलावृष्टि से बासमती को भारी नुकसान पहुंचा है।
किसान हरकृष्ण सिंह, निशान सिंह, करनैल सिंह व जिले सिंह ने बताया कि ओलावृष्टि और तेज आंधी से बासमती को भारी नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि से बासमती की बालियों के दाने झड़कर जमीन पर गिर गए। इससे झाड़ कम होगा। हरकृष्ण सिंह ने बताया कि उनकी 54 एकड़ जमीन पर बासमती की फसल लगी है। ओलावृष्टि व तेज आंधी से एक तिहाई हिस्सा खराब हो चुका है। इससे उसे काफी नुकसान झेलना पड़ेगा।
तेज आंधी से बासमती की फसल जमीन पर बिछ गई है। अब इसे कंबाइन के बजाय हाथों से कटाई करनी होगी। मशीन से कम लागत लगती थी और हाथ से कटाई करने पर ज्यादा मजदूरी देनी होगी। किसान सुरजन सिंह, कृपाल सिंह, महेंद्र सिंह ने बताया कि बरसात के कारण अब कटाई और देरी से करनी होगी। ओलावृष्टि से बासमती फसल का झाड़ पर काफी असर पड़ेगा। उनकी मांग है कि सरकार ओलावृष्टि से नुकसान हुई फसल की गिरदावरी कर उचित मुआवजा दे।