चंडीगढ़: बाबा रामदेव के खिलाफ केस दायर, एलोपैथी पर विवादित बयान देने के मामले में शिकायत
शिकायत में कहा गया कि इस दौरान सरकार की तरफ से बार-बार ये आदेश जारी हुआ है, कि अफवाह फैलाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में बाबा रामदेव ने एलोपैथी और डॉक्टरों के खिलाफ जो भी अफवाह फैलाई, उस पर सरकार को सख्ती बरतकर कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।
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एलोपैथी और डॉक्टरों पर विवादित बयान पर योग गुरु बाबा रामदेव की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। मंगलवार को चंडीगढ़ जिला अदालत में बाबा रामदेव के खिलाफ आपराधिक शिकायत याचिका दायर कर केस दर्ज करने की मांग की गई है। यह शिकायत चंडीगढ़ डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान व एडवोकेट रविंदर सिंह बस्सी की तरफ से की गई है।
शिकायतकर्ता ने बाबा रामदेव पर कई आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना की वैश्विक महामारी के चलते पूरे देश में लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं। कई लोग इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं, जबकि लाखों लोगों के दम तोड़ने से उनके घर उजड़ गए हैं। ऐसे माहौल में भी बाबा रामदेव लगातार झूठी बयानबाजी कर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने एलोपैथी और डॉक्टरों के खिलाफ विवादित बयान दिया है। बयान में बाबा रामदेव ने डॉक्टरों को मूर्ख कहा है और एलोपैथी को झूठा बताया है।
रामदेव का यह बयान कई मीडिया और सोशल मीडिया पर पब्लिश हुआ है। रामदेव ने एलोपैथी के खिलाफ जनता के विश्वास को तोड़ने का काम और डॉक्टरों की काबिलियत पर सवाल उठाया है। ऐसे में उन डॉक्टरों का भी मनोबल टूटा है, जो अपनी जान की परवाह किए बिना नि:स्वार्थ भाव से लोगों को बचाने में लगे हुए हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय से मांगी थी माफी
रविंदर सिंह बस्सी ने शिकायत में यह भी कहा कि बाबा रामदेव ने माना है कि उन्होंने एलोपैथी और डॉक्टरों के खिलाफ विवादित बयान दिया। हालांकि बाद में अपने इस बयान के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय से माफी मांगी थी। साथ ही रामदेव ने स्वास्थ्य मंत्रालय को माफीनामा भी भेजा था। शिकायत में कहा गया कि इस दौरान सरकार की तरफ से बार-बार ये आदेश जारी हुआ है, कि अफवाह फैलाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में बाबा रामदेव ने एलोपैथी और डॉक्टरों के खिलाफ जो भी अफवाह फैलाई, उस पर सरकार को सख्ती बरतकर कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।
इन धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग
बस्सी ने शिकायत में अदालत से मांग की है कि बाबा रामदेव के खिलाफ आईपीसी की धारा 188 (डीसी के नियमों के उल्लंघन करना) 269, 270 (जानबूझकर बीमारी फैलाना) 276 (किसी दवा की जगह दूसरी दवा देना) और डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट की धारा 51, 52, और 54 के तहत केस चलाया जाए।
एक केस पहले ही विचाराधीन
बीते वर्ष योग गुरु बाबा रामदेव ने कोरोनिल नामक दवा बनाई थी और दावा किया था कि यह दवा कोरोना की बीमारी में काफी लाभकारी है, लेकिन बाद में इस दावे से इनकार कर दिया गया था और इसे सिर्फ इम्युनिटी बूस्टर दवा बताया गया था। बाबा रामेदव के खिलाफ चंडीगढ़ में ही एक एडवोकेट नवजीत बराड़ ने भी केस फाइल किया था। यह केस भी अभी कोर्ट में विचाराधीन बताया जा रहा है। दूसरी शिकायत आने से बाबा रामदेव की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।