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रिपोर्ट: हादसों में मरने वालों का आंकड़ा चौंकाने वाला

Mon, 12 May 2014 12:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 12 May 2014 12:34 PM IST
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देश में हर साल जिस तेजी से मोटर वाहन बढ़ रहे हैं उसी तेजी से इन वाहनों की सवारी करने वालों की जिंदगी कम हो रही है। पिछले दस साल में देश भर में हुए सड़क हादसे बारह लाख लोगों की जान ले चुके हैं यानी एक साल में करीब सवा लाख लोगों की मौत हो जाती है।

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वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) की हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार सड़क हादसों के मामले में भारत का विश्व भर में पहला स्थान है। विश्व भर में हो रहे सड़क हादसों में 11 प्रतिशत हादसे भारत में होते हैं। यहां हर एक मिनट में एक सड़क हादसा होता है और हर तीन मिनट में इन हादसों के कारण एक जान चली जाती है।
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वर्ष 2004-13 तक के आंकड़ों पर गौर करें तो 2004 की तुलना में 2013 में हुए हादसों में 53.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, 2004-13 तक आबादी में 13.6 प्रतिशत इजाफा हुआ जबकि सड़क हादसे 35.2 प्रतिशत तक बढ़ गए। सड़क हादसों के मद्देजनर संयुक्त राष्ट्र ने 2011-20 के दशक में सड़क सुरक्षा के उपायों के प्रति जागरूकता अभियान चलाया है, इसके बावजूद भारत ने अब तक इस ओर कोई ठोस कदम नहीं बढ़ाया।
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आतंकवाद से भी बड़ा खतरा

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सड़क हादसों में होने वाली मौतों पर गौर किया जाए तो यह भारत के लिए आतंकवाद से कहीं बड़ा खतरा है। आतंकवाद हर साल 2,000 लोगों की जान ले लेता है लेकिन सड़क हादसों में हो रही लाखों लोगों की मौत को कभी गंभीरता से नहीं लिया गया।

जीने का अधिकार दे सरकार
सड़क हादसों पर सरकार की लापरवाही को देखते हुए प्रतीत होता है कि सरकार लोगों से जीने का अधिकार छीन रही है। हम देश के युवाओं को इस तरह सड़कों पर दम तोड़ते नहीं देख सकते। ऐसे में नई सरकार को सड़क सुरक्षा उपायों पर विशेष जोर देना होगा।

सुरक्षा उपायों की अनदेखी बड़ी वजह

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अधिकतर भारतीय सड़क सुरक्षा उपायों की अनदेखी करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, महज 30 प्रतिशत ड्राइवर और उनकी बगल में बैठने वालों में से दस फीसदी लोग ही सीट बेल्ट लगाते हैं।

इसी तरह दोपहिया वाहन चालक हेलमेट पहनने को सुरक्षा नहीं बल्कि मुसीबत समझते हैं।

इन पर देना होगा विशेष ध्यान

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-स्पीड कंट्रोल
-सुरक्षित सड़कें
-सुरक्षित वाहन
-सुरक्षित चालक
-हादसे के बाद जल्द इलाज

-(लेखक पंजाब स्टेट रोड सेफ्टी काउंसिल के वाइस चेयरमैन हैं)

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