आतंकी तारा की गिरफ्तारी के पीछे का सच
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पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के आरोपी जगतार सिंह तारा तक पहुंचने में पुलिस के लिए पुराने आतंकियों की गिरफ्तारी की अहम भूमिका रही।
कुछ माह पहले गिरफ्तार किए आतंकियों रत्नजोत सिंह, हरविंदर सिंह मिंटू, रमनदीप सिंह गोल्डी से पूछताछ में हुए खुलासे तारा तक पहुंचने में काफी कारगर रहे। इन खुलासों और खुफिया जानकारियों के आधार पर पंजाब पुलिस आगे बढ़ती चली गई।
आतंकियों से कड़ी दर कड़ी पूछताछ कड़ियों को जोड़ती चली गई तथा आखिर केंद्रीय एजेंसियों और इंटरपोल की मदद से तारा हत्थे चढ़ गया। हालांकि पंजाब पुलिस ने तारा के वारंट सितंबर 2014 में ही हासिल कर लिए थे।
पाकिस्तानी पासपोर्ट पर थाईलैंड में रहने की पुष्टि
तारा की गिरफ्तारी के लिए रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी हो गया था, लेकिन वह पुलिस के हाथ से बचता रहा। पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए दो बार दबिश भी दी, लेकिन वह हाथ नहीं आया।
फिर रत्नदीप भिंडरांवाला टाइगर फोर्स ऑफ खालिस्तान (बीटीएफके) का प्रमुख रत्नदीप सिंह नेपाल के बॉर्डर के पास उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार हुआ। इसके कुछ ही दिन बाद एक अन्य आतंकी रमनदीप सिंह गोल्डी पुलिस के हत्थे चढ़ा।
फिर उससे पूछताछ में खुलासा के बाद खालिस्तान लिबरेशन फोर्स चीफ हरमिंदर सिंह मिंटू को थाईलैंड से उसके साथी गुरप्रीत सिंह गोपी के साथ धर दबोचा। मिंटू से मिली सूचनाओं के आधार पर ही तारा के गुरमीत सिंह के नाम से पाकिस्तानी पासपोर्ट पर पक्के तौर पर थाईलैंड में रहने की पुष्टि हुई।