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सात नाबालिगों को बेटा बनाकर पहुंचा दिया यूरोप, जालसाज काबू
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर।
Updated Wed, 06 Apr 2016 11:11 AM IST
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सात नाबालिग बच्चों को अपना बेटा बनाकर 28 लाख रुपये में यूरोप पहुंचाने के मामले में जालंधर पुलिस ने एक जालसाज एजेंट को काबू किया है। उक्त एजेंट जाली दस्तावेजों के सहारे पासपोर्ट तैयार कर नाबालिग बच्चों को अपना बेटा बनाता था। वह यूरोप का वीजा लगवाकर उनको वहां पर छोड़ आता था। पुलिस ने एजेंट को गिरफ्तार कर उन सात बच्चों की फोटो बरामद कर ली है, जिनको फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से अपना बेटा बनाकर विदेश पहुंचाया गया है।
ये सात बच्चे किसके हैं। यूरोप में इस समय कहां पर हैं। इसका पता स्थानीय क्राइम विभाग की पुलिस लगा रही है। इन बच्चों को एजेंट तक पहुंचाने के लिए कपूरथला के सुखविंदर सिंह ने अहम भूमिका निभाई थी, जो इस समय अमेरिका में है। सुखविंदर के माध्यम से ही उन सात बच्चों की पहचान हो पाएगी। एडीसीपी क्राइम विवेकशील सोनी ने बताया कि जालंधर की तान्या टूर एंड ट्रेवल के मालिक सर्बजीत व उसकी पत्नी निशा के बारे में गुप्त सूचना मिली थी कि ये दोनों नाबालिग बच्चों को अपना बेटा बनाकर विदेश ले जाते हैं और वहां पर छोड़कर वापस आ जाते हैं। इनके पास कुछ ही समय में काफी पैसा आ गया है। पुलिस ने सर्बजीत को तो गिरफ्तार कर लिया, लेकिन उसकी पत्नी अपनी छह साल की बच्ची को लेकर फरार हो गई है।
एडीसीपी विवेकशील के मुताबिक दोनों आरोपी बच्चों के जाली सर्टिफिकेट बनवाकर और उन्हें अपने बच्चे बताकर विदेश ले जाते थे। वहां वे बच्चों को अच्छी कीमत पर बेचते थे। नियमानुसार नाबालिग बच्चे के पासपोर्ट बनवाने के लिए पुलिस वेरिफिकेशन की जरूरत नहीं होती, इसलिए जाली पासपोर्ट बनवा लेते थे। इसके लिए जाली फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट, स्कूल सर्टिफिकेट तैयार कर लेते थे। उन्होंने बताया कि सर्बजीत व निशा के पास यूरोप के देशों का मल्टीपल वीजा था। इस वजह से वह आसानी से हर देश में पहुंच जाते थे।
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एडीसीपी विवेक सोनी ने बताया कि आरोपी की पत्नी निशा की तलाश जारी है। विदेशी दूतावासों से संपर्क किया जा रहा है, ताकि बच्चों की डिटेल भेजकर उनकी पहचान की जा सके। इसके बाद बच्चों को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सर्बजीत के साथ नगर निगम, स्कूल प्रशासन, सिविल अस्पताल प्रशासन के कई लोगों के इस जालसाजी के कारोबार में जुड़े होने की आशंका है।
एडीसीपी सोनी के मुताबिक सर्बजीत का दोस्त फ्लाई वेल टूरिस्ट सर्विस का मालिक सुखविंदर सिंह बच्चों के परिजनों को सर्बजीत से मिलाकर डील करवाता था। सुखविंदर कपूरथला पुलिस का वांटेड है। उसके खिलाफ 100 करोड़ की ठगी का मामला दर्ज है। जिन सात बच्चों को विदेश पहुंचाया गया उनके आयूष शर्मा, शाम शर्मा, सतपाल शर्मा, संदीप शर्मा, सौरभ शर्मा, नितिन शर्मा, वंश शर्मा के नाम से पासपोर्ट बने थे। सर्बजीत के नाम के साथ शर्मा लगता था, इसलिए अपना बेटा जाहिर करने के लिए बच्चों के पासपोर्ट में भी शर्मा लगाया गया था।
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ये सात बच्चे किसके हैं। यूरोप में इस समय कहां पर हैं। इसका पता स्थानीय क्राइम विभाग की पुलिस लगा रही है। इन बच्चों को एजेंट तक पहुंचाने के लिए कपूरथला के सुखविंदर सिंह ने अहम भूमिका निभाई थी, जो इस समय अमेरिका में है। सुखविंदर के माध्यम से ही उन सात बच्चों की पहचान हो पाएगी। एडीसीपी क्राइम विवेकशील सोनी ने बताया कि जालंधर की तान्या टूर एंड ट्रेवल के मालिक सर्बजीत व उसकी पत्नी निशा के बारे में गुप्त सूचना मिली थी कि ये दोनों नाबालिग बच्चों को अपना बेटा बनाकर विदेश ले जाते हैं और वहां पर छोड़कर वापस आ जाते हैं। इनके पास कुछ ही समय में काफी पैसा आ गया है। पुलिस ने सर्बजीत को तो गिरफ्तार कर लिया, लेकिन उसकी पत्नी अपनी छह साल की बच्ची को लेकर फरार हो गई है।
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एडीसीपी विवेकशील के मुताबिक दोनों आरोपी बच्चों के जाली सर्टिफिकेट बनवाकर और उन्हें अपने बच्चे बताकर विदेश ले जाते थे। वहां वे बच्चों को अच्छी कीमत पर बेचते थे। नियमानुसार नाबालिग बच्चे के पासपोर्ट बनवाने के लिए पुलिस वेरिफिकेशन की जरूरत नहीं होती, इसलिए जाली पासपोर्ट बनवा लेते थे। इसके लिए जाली फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट, स्कूल सर्टिफिकेट तैयार कर लेते थे। उन्होंने बताया कि सर्बजीत व निशा के पास यूरोप के देशों का मल्टीपल वीजा था। इस वजह से वह आसानी से हर देश में पहुंच जाते थे।
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एडीसीपी विवेक सोनी ने बताया कि आरोपी की पत्नी निशा की तलाश जारी है। विदेशी दूतावासों से संपर्क किया जा रहा है, ताकि बच्चों की डिटेल भेजकर उनकी पहचान की जा सके। इसके बाद बच्चों को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सर्बजीत के साथ नगर निगम, स्कूल प्रशासन, सिविल अस्पताल प्रशासन के कई लोगों के इस जालसाजी के कारोबार में जुड़े होने की आशंका है।
एडीसीपी सोनी के मुताबिक सर्बजीत का दोस्त फ्लाई वेल टूरिस्ट सर्विस का मालिक सुखविंदर सिंह बच्चों के परिजनों को सर्बजीत से मिलाकर डील करवाता था। सुखविंदर कपूरथला पुलिस का वांटेड है। उसके खिलाफ 100 करोड़ की ठगी का मामला दर्ज है। जिन सात बच्चों को विदेश पहुंचाया गया उनके आयूष शर्मा, शाम शर्मा, सतपाल शर्मा, संदीप शर्मा, सौरभ शर्मा, नितिन शर्मा, वंश शर्मा के नाम से पासपोर्ट बने थे। सर्बजीत के नाम के साथ शर्मा लगता था, इसलिए अपना बेटा जाहिर करने के लिए बच्चों के पासपोर्ट में भी शर्मा लगाया गया था।