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Hindi News ›   Chandigarh ›   tampering case: brave sisters 'false truth' and chargesheet

रोहतक सिस्टर्स की 'बहादुरी' की पोल खुलते ही नया पंगा

Sun, 23 Aug 2015 05:32 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, रोहतक(हरियाणा)
ब्यूरो/अमरउजाला, रोहतक(हरियाणा) Updated Sun, 23 Aug 2015 05:32 PM IST
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tampering case: brave sisters 'false truth' and chargesheet

रोडवेज बस में दो बहनों से कथित छेड़छाड़ के मामले ने चार्जशीट दाखिल होने के साथ ही तूल पकड़ लिया है। अब दोनों बहनें पॉलीग्राफ टेस्ट रिपोर्ट को चालान के साथ पेश करने के विरोध में आ गई हैं।

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दोनों का कहना है कि पॉलीग्राफ टेस्ट के दौरान उनसे अधिकारियों ने कई बेतुके सवाल पूछे थे। हमसे पूछा गया था कि कितने ब्वायफ्रेंड हैं और दिन में कितनी बार शराब पीती हो। पूछा गया कि तुम दोनों ने अभी तक कितने लोगों को झूठे मामलों में फंसाया है।
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पीड़ित पक्ष का कहना है कि हमने एसपी के सामने टेस्ट में पूछे गए सवालों पर आपत्ति जताई थी और एसपी ने टेस्ट रिपोर्ट को चालान में शामिल नहीं करने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद पुलिस ने चालान में रिपोर्ट शामिल कर दी। दोनों बहनों ने इसका विरोध किया है।
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रिपोर्ट शामिल की तो अभद्र सवाल क्यों नहीं: पूजा और आरती का कहना है कि जब पुलिस ने रिपोर्ट शामिल ही कर दी तो उसमें से आपत्तिजनक सवालों को क्यों हटाया गया। यदि आपत्तिजनक सवालों को भी शामिल किया जाता तो टेस्ट की सारी सच्चाई सामने आ जाती। केवल केस को कमजोर करने के लिए सब कुछ किया गया है।

बहनों ने पॉलीग्राफ टेस्ट पर उठाए सवाल

tampering case: brave sisters 'false truth' and chargesheet

5 नहीं 9 सवाल किए थे: दोनों का दावा है कि टेस्ट में 5 नहीं बल्कि 9 सवाल पूछे गए थे। पुलिस ने अपनी मर्जी से अभद्र सवालों को रिपोर्ट से हटा दिया। ताकि सच्चाई सामने न आ सके।

चालान में तीनों युवकों को छेड़छाड़ और मारपीट का आरोपी माना: वहीं, पुलिस द्वारा कोर्ट में पेश किए गए चालान में तीनों युवकों को आईपीसी की धारा 354 ए (छूकर छेड़छाड़ करना), 323 (मारपीट) में आरोपी माना गया है। इन्हीं धाराओं में चालान पेश किया गया है।

एडवोके ट अतर सिंह पंवार, दोनों बहनों के वकील ने बताया कि चार्जशीट में जो भी पुलिस जांच के तथ्य शामिल किए गए हैं, वे सारे दोनों बहनों के खिलाफ तैयार किए गए हैं। मामले में स्टेट क्राइम ब्रांच ने कोई भी जांच पड़ताल नहीं की। केवल बहनों को चुप करने के लिए यह कदम उठाया गया था। यदि पुलिस के खिलाफ कोई सबूत सामने आता है तो हाईकोर्ट में गुहार लगाई जाएगी।

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