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मर्सरत आलम के समर्थन में उतरे स्वामी अग्निवेश!

Mon, 16 Mar 2015 05:35 PM IST
विजेंद्र कौशिक/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
विजेंद्र कौशिक/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा) Updated Mon, 16 Mar 2015 05:35 PM IST
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swami agnivesh controversial statement on masrat alam

अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चाओं में रहने वाले स्वामी अग्निवेश ने एक बार फिर से चौंकाने वाला बयान दिया है। रविवार को हरियाणा के टिटौली गांव में सार्वदेशिक आर्य युवक परिषद द्वारा स्वामी इंद्रवेश के 78वें जन्मदिवस पर चल रहे बेटी बचाओ चतुर्वेद पारायण महायज्ञ में पहुंचे स्वामी अग्निवेश ने जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा मसर्रत आलम को छोड़ने को सही ठहराया है।

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उन्होंने कहा कि सरकार का फैसला बिल्कुल सही है। कब तक एक व्यक्ति को यूं जेल में बंद करके रखा जा सकता है। पीडीपी व भाजपा का जम्मू-कश्मीर में गठबंधन ऐतिहासिक है। दोनों दलों को मिलकर काम करना चाहिए।
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इससे पहले स्वामी अग्निवेश ने मारिशस की यात्रा के दौरान पीएम मोदी द्वारा मूर्ति पूजा करने को स्वामी अग्निवेश ने गलत ठहराया है।

उन्होंने महाराष्ट्र के बाद प्रदेश की खट्टर सरकार द्वारा गौ हत्या पर प्रतिबंध लगाने के प्रयासों का स्वागत किया है।  अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार आने के बाद देश से मीट का निर्यात 15 प्रतिशत बढ़ा है, जो चिंताजनक है।
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भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पास नहीं करवा पाएगी भाजपा

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अग्निवेश ने कहा कि लोगों को डेरों से दूर रहना चाहिए। रामपाल व आसाराम बापू का जनता हश्र देख चुकी है। डेरा सच्चा सौदा के सवाल पर स्वामी अग्निवेश ने कहा कि, केंद्र सरकार को चाहिए कि गुरमीत राम-रहीम पर जो आरोप है, उनकी सीबीआई गहराई से जांच करें। वोट बैंक के लिए भाजपा को ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए, जिससे गुरमीत राम रहीम के खिलाफ चल रही सीबीआई की जांच प्रभावित हो।

प्रदेश में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए प्रदर्शन कर रहे किसानों का समर्थन करते हुए स्वामी अग्निवेश ने कहा कि भाजपा के गृहमंत्री राजनाथ सिंह व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने 2013 में भूमि अधिग्रहण बिल का विरोध किया था। कहा था कि किसान से उसकी जमीन न छीनी जाए।

अब अध्यादेश लाकर यह प्रावधान किया जा रहा है कि पांच साल तक अधिग्रहण की गई जमीन खाली रहती है तो किसान उस जमीन को वापस नहीं ले सकता। जबकि पहले यह प्रावधान रखा हुआ है। उन्होंने कहा कि अध्यादेश को पास कराने के लिए राज्यसभा में भी बहुमत चाहिए, लेकिन 2019 तक भाजपा का दोनों सदन में बहुमत नहीं बन पाएगा। ऐसे में मामला ठंडे बस्ते में जाने की संभावना है।

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