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Hindi News ›   Chandigarh ›   SSP Dhruv Dahiya may Face Enquiry in Cash Recovery from Father Anthony Case

साढ़े छह करोड़ के गबन मामले में एसएसपी ध्रुव दहिया भी जांच के दायरे में, 7 सवाल बनेंगे परेशानी

Sun, 14 Apr 2019 01:19 PM IST
खुशबू गोयल सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब) Published by: खुशबू गोयल Updated Sun, 14 Apr 2019 01:19 PM IST
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SSP Dhruv Dahiya may Face Enquiry in Cash Recovery from Father Anthony Case
सांकेतिक तस्वीर
फादर एंथनी से करोड़ों रुपये की बरामदगी व 6.5 करोड़ के गबन के मामले में 2012 बैच के आईपीएस अधिकारी खन्ना के एसएसपी ध्रुव दहिया भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। क्योंकि मामले की जांच में कई अनियमितताएं सामने आ रही हैं। पता चला है कि चुनाव आयोग से आदेश लिए बिना ही गबन करने वाले दोनों सहायक सब इंस्पेक्टरों को विशेष तौर पर एसएसपी खन्ना के साथ तीन-चार दिन पहले ही अटैच किया गया था। इतना ही नहीं, दोनों मुलाजिमों को जालंधर के प्रतापपुरा में छापा मारने के लिए अधिकारिक रूप से रवाना नहीं किया गया था।
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2014 में लुधियाना पुलिस कमिश्नरेट में बतौर एसीपी तैनात ध्रुव ने हाईकोर्ट के जज का चालान कर दिया था, जिस कारण उनका तबादला दसूहा के एएसपी के पद पर कर दिया गया था। अगस्त 2015 के पहले सप्ताह में दसूहा में तैनात एएसपी ध्रुव फिर सुर्खियों में आए, जब उन्होंने सूबे के डिप्टी सीएम सुखबीर बादल की बस ऑरबिट का चालान कर उसे थाने में बंद कर दिया था। इतना ही नहीं, इलाके की विधायक अमरजीत कौर साही के बेटे को नाके पर रोक कर कानून का पाठ पढ़ाने पर भी चर्चा में रहे थे।
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दहिया को जुलाई 2018 में खन्ना का एसएसपी लगाया गया। अब वे अपने दो मुलाजिमों की करतूत के कारण कटघरे में आ गए हैं। उनको भी जांच के दायरे में लाया जा सकता है। सूत्रों की मानें तो ध्रुव दहिया का गबन के मामले में कोई रोल नहीं है, लेकिन फादर एंथनी से पैसों की बरामदगी में अनियमितताएं बरतने और आरोपी दोनों एएसआई पर मेहरबानी के कारण जांच टीम की उन पर तीखी नजर है। ध्रुव दहिया सीधेतौर पर खुद इस बरामदगी की मॉनिटरिंग कर रहे थे।
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सवाल जो दहिया के लिए परेशानी खड़ी करेंगे

- खन्ना से 110 किमी दूर प्रतापपुरा में रेड की क्यों जरूरत पड़ी और सिटी पुलिस को क्यों नहीं विश्वास में लिया गया।  

- 29 मार्च को खन्ना पुलिस ने पैसों की बरामदगी खन्ना में नाके से दिखाई थी, लेकिन असल में 16 करोड़ रुपये की राशि जालंधर के प्रतापपुरा स्थित कैथोलिक द्वारा संचालित आश्रम से बरामद की गई थी और फादर एंथनी को वहीं से हिरासत में लिया गया था।

- पुलिस पैसों की पकड़ या बरामदगी बिना आयकर विभाग के अधिकारियों की जानकारी के नहीं कर सकती। कानून के मुताबिक, आयकर विभाग को मौके पर प्रतापपुरा बुलाना चाहिए था, लेकिन आयकर विभाग को खन्ना में बुलाया गया।

- आरोपी एएसआई पटियाला में तैनात थे, लेकिन उनको अस्थायी तौर पर खन्ना में मार्च के आखिरी सप्ताह में तैनात किया गया। एएसआई जोगिंदर व राजप्रीत को बिना चुनाव आयोग के आदेशों के सीधा पटियाला से खन्ना के एसएसपी ध्रुव दहिया के साथ अटैच किया गया था। सवाल है कि आखिरकार दोनों एएसआई में ऐसी क्या खासियत थी कि तमाम नियमों को दरकिनार कर उनको खन्ना में तैनात किया गया और वह भी एसएसपी के साथ।

- एएसआई जोगिंदर व राजप्रीत को अधिकारिक रूप से जालंधर के प्रतापपुरा नहीं भेजा गया था। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक खन्ना पुलिस की ओर से डीएसपी हंसराज व एएसआई मोहिंदर पाल व एसएचओ दोराहा ने नाकेबंदी की थी। इस दौरान तीन कारों से 9 करोड़ 66 लाख रुपये बरामद किए गए। सवाल है कि अगर तीन कारों से पैसा बरामद कर लिया गया तो दोनों एएसआई को प्रतापपुरा किसने भेजा? उनका नाम रोचनामचे में क्यों नहीं डाला गया? उनकी रवानगी व आमद क्यों नहीं डाली गई?

- जांच में सामने आया है कि मुखबिर ने सीधी सूचना आला पुलिस अधिकारी को दी थी, वह आला अफसर कौन हैं, किसको सूचना मिली थी?

- 6.5 करोड़ के गबन की बात का जब शोर पड़ा तो भी दोनो पुलिस कर्मी ड्यूटी करते रहे, उनको हिरासत में क्यों नहीं लिया गया?

अभी बरामदगी व गिरफ्तारी पर फोकस, बाकी सब जांच का विषय: सिन्हा
आईजी क्राइम प्रवीण कुमार सिन्हा का कहना है कि अभी तो सारा फोकस दोनों एएसआई जोगिंदर व राजप्रीत की गिरफ्तारी पर है। दोनों के अलावा मुखबिर सुरिंदर की गिरफ्तारी भी करनी है, इसके बाद जांच गहराई तक की जाएगी।
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