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सिप्पी मर्डर केस: पुलिस को कोर्ट से तगड़ा झटका, दोनों मांग खारिज
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
Updated Tue, 31 May 2016 11:43 AM IST
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सिप्पी सिद्धू मर्डर
- फोटो : file photo
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इंटरनेशनल शूटर सुखमनप्रीत सिंह उर्फ सिप्पी मर्डर केस में पुलिस की ओर से संदिग्ध हाईकोर्ट जज की बेटी के लाई डिटेक्शन और ब्रैन मैपिंग टेस्ट कराने संबंधी याचिका सोमवार को एसीजेएम कोर्ट ने खारिज कर दी।
इससे पहले सीबीआई की ओर से कोर्ट में पेश हुए डीएसपी ने अदालत में केस की जांच एजेंसी को ट्रांसफर होने संबंधी आदेश की कॉपी सौंपी। साथ ही कहा कि केस की जांच पुलिस से अब सीबीआई को ट्रांसफर हो चुकी है।
वहीं मामले में संदिग्ध हाईकोर्ट जज की बेटी की ओर से पेश हुए एडवोकेट एनके नंदा ने कहा कि केस की जांच सीबीआई को ट्रांसफर होने के बाद से पुलिस की याचिका का कोई आधार नहीं बनता। इसलिए इसे पुलिस या तो वापस ले या फिर कोर्ट इसे खारिज कर दे। इसके बाद एसीजेएम ने पुलिस की याचिका को खारिज कर दिया। अब जांच एजेंसी केस ट्रांसफर होने के बाद याचिका को सीबीआई की विशेष अदालत या सीजेएम कोर्ट ले जा सकती है।
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इससे पहले पिछली सुनवाई पर पुलिस ने अदालत को अवगत कराया था कि केस केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को ट्रांसफर हो चुका है। इस पर अदालत ने मर्डर केस जांच एजेंसी को ट्रांसफर होने की लिखित में जानकारी देने को कहा था। साथ ही इसके आधिकारिक आदेश के कागजात जमा करवाने को कहा था।
इसके बाद केस के जांच अधिकारी और सीबीआई के डीएसपी अदालत में पेश हुए थे। उन्होंने अदालत से इसके लिए एक महीने का समय मांगा था। इसके बाद अदालत ने जांच एजेंसी को 30 मई तक डाक्यूमेंट्स कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए थे।
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इससे पहले सीबीआई की ओर से कोर्ट में पेश हुए डीएसपी ने अदालत में केस की जांच एजेंसी को ट्रांसफर होने संबंधी आदेश की कॉपी सौंपी। साथ ही कहा कि केस की जांच पुलिस से अब सीबीआई को ट्रांसफर हो चुकी है।
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वहीं मामले में संदिग्ध हाईकोर्ट जज की बेटी की ओर से पेश हुए एडवोकेट एनके नंदा ने कहा कि केस की जांच सीबीआई को ट्रांसफर होने के बाद से पुलिस की याचिका का कोई आधार नहीं बनता। इसलिए इसे पुलिस या तो वापस ले या फिर कोर्ट इसे खारिज कर दे। इसके बाद एसीजेएम ने पुलिस की याचिका को खारिज कर दिया। अब जांच एजेंसी केस ट्रांसफर होने के बाद याचिका को सीबीआई की विशेष अदालत या सीजेएम कोर्ट ले जा सकती है।
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इससे पहले पिछली सुनवाई पर पुलिस ने अदालत को अवगत कराया था कि केस केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को ट्रांसफर हो चुका है। इस पर अदालत ने मर्डर केस जांच एजेंसी को ट्रांसफर होने की लिखित में जानकारी देने को कहा था। साथ ही इसके आधिकारिक आदेश के कागजात जमा करवाने को कहा था।
इसके बाद केस के जांच अधिकारी और सीबीआई के डीएसपी अदालत में पेश हुए थे। उन्होंने अदालत से इसके लिए एक महीने का समय मांगा था। इसके बाद अदालत ने जांच एजेंसी को 30 मई तक डाक्यूमेंट्स कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए थे।
जनवरी में हो गए थे केस ट्रांसफर के आर्डर
सिप्पी की मां दिपेंदर सिद्धू
- फोटो : amarujala
इससे पहले जनवरी में सिप्पी मर्डर केस सीबीआई को ट्रांसफर होने के आदेश हो चुके थे। इसके बाद पिछले महीने ही सीबीआई ने केस की जांच शुरू की थी। सेक्टर-26 थाना पुलिस ने संबंधित केस दर्ज किया था। इसके बाद केस सीबीआई को सौंपा गया था।
इससे पहले पुलिस ने अदालत में मामले में संदिग्ध हाईकोर्ट जज की बेटी का लाई डिटेक्शन और ब्रैन मैपिंग टेस्ट करवाने के लिए पिछले साल 14 दिसंबर को अर्जी दायर की थी। इस पर एसीजेएम कोर्ट ने संदिग्ध को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा था।
जज की बेटी ने याचिका को चुनौती देते हुए पुलिस द्वारा उसका लाई डिटेक्शन और ब्रेन मैपिंग टेस्ट करवाने को असंवैधानिक बताया था। साथ ही इस अर्जी को खारिज करने की अपील की थी। उसका यह भी कहना था कि, ‘अगर उसका टेस्ट करवाना ही है तो पुलिस पहले सिप्पी की मां दीपेंदर कौर और उसके भाई जसमनप्रीत सिंह का भी टेस्ट करवाए, ताकि सच सामने आ सके’।
इससे पहले पुलिस ने अदालत में मामले में संदिग्ध हाईकोर्ट जज की बेटी का लाई डिटेक्शन और ब्रैन मैपिंग टेस्ट करवाने के लिए पिछले साल 14 दिसंबर को अर्जी दायर की थी। इस पर एसीजेएम कोर्ट ने संदिग्ध को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा था।
जज की बेटी ने याचिका को चुनौती देते हुए पुलिस द्वारा उसका लाई डिटेक्शन और ब्रेन मैपिंग टेस्ट करवाने को असंवैधानिक बताया था। साथ ही इस अर्जी को खारिज करने की अपील की थी। उसका यह भी कहना था कि, ‘अगर उसका टेस्ट करवाना ही है तो पुलिस पहले सिप्पी की मां दीपेंदर कौर और उसके भाई जसमनप्रीत सिंह का भी टेस्ट करवाए, ताकि सच सामने आ सके’।