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क्रेडिट कार्ड की क्लोनिंग कर युवती ने की 40 हजार की शॉपिंग

Sat, 30 Jul 2016 01:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Updated Sat, 30 Jul 2016 01:45 AM IST
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shopping with duplicate cloned credit card by a girl
साइबर क्राइम - फोटो : demo
क्रेडिट कार्ड की क्लोनिंग कर चंडीगढ़ के एक डॉक्टर के कार्ड से 271 किलोमीटर दूर नोएडा में एक लड़की ने 40 हजार रुपये की शॉपिंग कर ली। ट्रांजेक्शन के बाद जैसे ही डॉक्टर को मोबाइल पर मैसेज आया तो उन्होंने तुरंत कार्ड ब्लॉक करवा दिया। पुलिस ने मामले में अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सेक्टर-21 निवासी और पेशे से डॉक्टर अमनदीप सिंह ने बताया कि पिछले माह 26 तारीख को उनकी जेब में क्रेडिट कार्ड पड़ा था और वह घर पर बैठे आराम कर रहे थे। उसी दौरान उनके मोबाइल पर कार्ड से 40 हजार रुपये की शॉपिंग होने के चार मैसेज आए। मैसेज देखते ही अमनदीप के होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत क्रेडिट कार्ड कंपनी को फोन कर कार्ड ब्लॉक करवाया। इस वजह से चौथी ट्रांजेक्शन जोकि करीब 21 हजार रुपये की थी, वह रुक गई।
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सीसीटीवी में चेहरा नहीं दिखा
अमनदीप को पता चला कि सारी ट्रांजेक्शन नोएडा में हुई है। जिस-जिस जगह पर कार्ड का इस्तेमाल हुआ था, वहां पता करने पर जानकारी मिली कि एक 25 से 30 साल की लड़की ने डुप्लीकेट कार्ड बनाकर इस्तेमाल किया था, लेकिन लड़की ने अपना चेहरा ढका हुआ था, जिससे कि सीसीटीवी फुटेज में उसका चेहरा साफ दिखाई नहीं दिया। अमनदीप ने मामले की शिकायत सेक्टर-19 पुलिस स्टेशन में दर्ज दी। मामले की जांच के बाद अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। मामला पुलिस के साइबर सेल को जांच के लिए ट्रांसफर कर दिया गया है। 
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कैसे होती है क्रेडिट कार्ड क्लोनिंग?
क्लोनिंग एक ऐसी तकनीक है, जिससे आपके कार्ड की सभी जानकारी किसी दूसरे कार्ड में डालकर आपके कार्ड का प्रतिरूप तैयार किया जा सकता है। इस प्रक्रिया को स्किमिंग कहते हैं। स्किमिंग के लिए एक अलग कार्ड रीडर आता है जो इतना छोटा होता है कि उसे अपनी जेब में भी रख सकते हैं। ज्यादातर यह डिजिटल चोरों की जेब में रखा रहता है, या फिर अगर चोर अत्याधिक चतुर हो तो यह क्त्रस्ेडिट कार्ड मशीन से भी जोड़ दिया जाता है। इसके जरिए आपके कार्ड की मैग्नेटिक पट्टी की हूबहू कॉपी तैयार कर ली जाती है। यह उसी तरह काम करती है जैसे फोटोकॉपी की मशीन। इसके बाद बस आपका पिन नंबर चाहिए होता है। आप अगर सतर्क न हों तो कोई भी आपका पिन देख सकता है और इसके बाद वह डिजिटल चोर उस नकली कार्ड से खरीदारी कर अपना सारा बिल आपके कार्ड पर डाल सकता है।
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