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अस्पताल में सेक्स सेलेक्शन का खेल, 'शर्तिया लड़का'

Sun, 21 Dec 2014 05:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पानीपत(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, पानीपत(हरियाणा) Updated Sun, 21 Dec 2014 05:44 PM IST
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Sex selection in hospital, Sensational disclosure about IVF

अस्पताल में सेक्स सलेक्शन कर लड़के की मिलती थी पूरी गारंटी, स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी में सामने आया चौंकाने वाला खुलासा। दरअसल पानीपत के प्रभाकर अस्पताल का टेस्ट ट्यूब बेबी (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) में सेक्स सिलेक्शन का जाल पानीपत ही नहीं बल्कि जींद व रोहतक जिले समेत दिल्ली व यूपी में भी फैला हुआ था।

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स्वास्थ्य विभाग की पूर्व में पड़ताल व फिर अस्पताल का रिकार्ड जांचने के बाद यह खुलासा हुआ। सेक्स सिलेक्शन का मामला सामने आने के बाद यह स्वास्थ्य विभाग में हॉट टॉपिक बना रहा।
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जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शुक्रवार को जैसे ही असंध रोड स्थित प्रभाकर अस्पताल में दबिश दी तो वहां माहौल तनावपूर्ण सा हो गया। अस्पताल में काम करने वाले कई लोग व मरीज बाहर निकलने में कामयाब रहे। डिप्टी सीएमओ डा. सुधीर बतरा व उनकी टीम ने डयूटी मजिस्ट्रेट तहसीलदार अश्वनी गंभीर की अगुवाई में पूरे रिकार्ड का जांच की और एक के बाद एक जांच के दौरान सेक्स सिलेक्शन का भंडाफोड़ होता चला गया।
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स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सारा रिकार्ड जब्त कर लिया और अस्पताल का आईवीएफ सेंटर व अल्ट्रा साउंड मशीन सील कर दी। स्वास्थ्य विभाग की देर शाम तक चली कार्रवाई के बीच अस्पताल का आईवीएफ लाइसेंस सस्पेंड कर दिया।

मां को शत प्रतिशत लड़का ही पैदा होता था

Sex selection in hospital, Sensational disclosure about IVF

यह होता है आईवीएफ: आईवीएफ की फुल फार्म इन विट्रो फर्टिलाइजेशन होती है। इसको मोटी भाषा में टेस्ट टयूब बेबी भी कहा जाता है। इसमें मां की ओविरी से अंडा निकाल लिया जाता है और उस अंडे को पिता के शुक्राणु के साथ मिला दिया जाता है। मां के अंडे व पिता के शुक्राणु को टेस्ट टयूब में फर्टिलाइज कर दिया जाता है और इसके तीन दिन बाद फर्टिलाइज होने के बाद मां की बच्चादानी में डाल दिया जाता है। इस विधि में अल्ट्रासाउंड गाइड पीपेड मशीन का सहारा लिया जाता है। इसके बाद मां के गर्भ में बच्चा बड़ा होना शुरू हो जाता है और समय पूरा होने के बाद बच्चे का जन्म करा दिया जाता है।  

सीएमओ डा. इंद्रजीत धनखड़ ने बताया कि प्रभाकर अस्पताल में मां की ओविरी से अंडा ले लिया जाता था। वहीं दूसरी तरफ पिता के शुक्राणु ले लिए जाते थे। जिनमें एक्स फिमेल व वाई मेल के होते हैं। प्रभाकर अस्पताल में शुक्राणु शॉर्ट मशीन से फिमेल शुक्राणुओं को हटा दिया जाता था और मेल के शुक्राणुओं को अंडे में मिला दिया जाता था। ऐसे में किसी भी मां को शत प्रतिशत लड़का ही पैदा होता था।

निसंतान महिलाओं के हक में चलाई थी आईवीएफ
इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) निसंतान महिलाओं को संतान सुख देने के लिए अविष्कार की गई थी जिसमें मां के अंडे व पिता के शुक्राणु एक मशीन में मिला लिए जाते हैं और उनको उन्हीं की कोख से संतान सुख दे दिया जाता है। इसमें अनुमानत एक से डेढ़ लाख के बीच में खर्च आता है। प्रभाकर अस्पताल में इसके उल्ट हो रहा था। यहां पर पहले दो-तीन या आठ-नौ लड़कियों को जन्म देने वाले दंपतियों का आईवीएफ किया जा रहा था।

रभाकर अस्पताल की हैरान कर देने वाली रिपोर्ट

Sex selection in hospital, Sensational disclosure about IVF

आईवीएफ सेंटर चलाने वाले अस्पतालों को हर माह आईवीएफ की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को देनी होती है। प्रभाकर अस्पताल आईवीएफ की रिपोर्ट नहीं दे रहा था। अस्पताल से केवल अल्ट्रा साउंड की ही रिपोर्ट जाती थी। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल प्रबंधन को कई बार रिमाइंडर भी डाला, लेकिन उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को कोई जवाब नहीं दिया।

स्वास्थ्य विभाग ने अल्ट्रासाउंड कराने वाले दंपतियों से क्रॉस चेक किया और उनसे आईवीएफ कराने की पड़ताल की। स्वास्थ्य विभाग को हैरान कर देने वाली रिपोर्ट मिली। जिसमें सामने आया कि अस्पताल में संतान पैदा कर पाने वाले दंपति भी करा रहे हैं। जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने मामले की जांच की और सब मामले सामने आते चले गए।

896 पर पहुंच सका सेक्स रेशो
जिले में इस समय लिंगानुपात 896:1000 का है। यानी एक हजार लड़कों पर 896 लड़कियां। सीएमओ डा. इंद्रजीत धनखड़ ने बताया कि मई माह में यह रेशो 832:1000 था। यानी एक हजार लड़कों पर 832 लड़कियां। स्वास्थ्य विभाग को गत दिनों कई अस्पतालों पर कार्रवाई करने के बाइ इस दिशा में कुछ सफलता मिली है।

डा. इंद्रजीत धनखड़, सीएमओ, स्वास्थ्य विभाग पानीपत ने बताया कि प्रभाकर अस्पताल में आईवीएफ में सेक्स सिलेक्शन का काम लंबे समय से चल रहा था। ये लोग मशीन से मेल व फिमेल शुक्राणुओं को अलग-अलग कर देते थे और मांग अनुसार मेल शुक्राणुओं को ही मां के अंडे के साथ मिलाते थे। अस्पताल द्वारा आईवीएफ का रिकार्ड भी नहीं दिया जाता था। जिसकी जांच में सब कुछ सामने आया। जांच पूरी होने तक कई अनियमिताएं सामने आने की संभावना है।

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