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मोगा बस कांड का पूरा सच आया सामने, क्या हुआ उस दिन?

Tue, 05 May 2015 10:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मोगा/फतेहगढ़ साहिब/चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, मोगा/फतेहगढ़ साहिब/चंडीगढ़ Updated Tue, 05 May 2015 10:51 AM IST
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sensational truth exposed in moga bus molestion case

मोगा बस कांड में मारी गई युवती अर्शदीप कौर का मौत का असली सच सामने आ गया है। ये सच बेहद चौंकाने वाला है।

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गांव लंडेके की अर्शदीप कौर की मौत बादलों की बस से कंडक्टर और हेल्पर की तरफ से धक्का मारने से हुई है। मौत का ये कारण मृत देह संभाल (प्रिजर्वेशन) केंद्र के रिकार्ड में दर्ज किया गया है।

गांव सिंघावाला स्थित केंद्र के रिकार्ड के अनुसार अर्शदीप का शव उसके वारिसों के हस्ताक्षर के साथ 29 अप्रैल शाम 8.30 बजे केंद्र में रखा गया। तीन मई को शव पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया।
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केंद्र के रिकार्ड में मौत का कारण वाले कॉलम में दर्ज किया है मौत गांव गिल के पशु अस्पताल के पास बादलों की बस में कंडक्टर और हेल्पर की तरफ से धक्का मारने से हुई।
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केंद्र में तैनात पूर्व फौजी मुखत्यार सिंह ने बताया कि शव रखने के समय पर कोई पुलिस कर्मी मौजूद नहीं था। विवरण परिजनों ने दर्ज करवाया है।

विपक्ष को समझौते से लगा करारा झटका

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मोगा कांड को लेकर पंजाब सरकार पर जोरदार हमले की तैयारी में बैठे विपक्ष को समझौते से करारा झटका लगा है। विपक्षी दल अब इस मुद्दे पर नए सिरे से रणनीति तय करने में जुट गए हैं। मोगा कांड को लेकर पिछले कई दिनों से प्रदेश सरकार कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के निशाने पर थी। दोनों ही पार्टियों के प्रदेश के शीर्ष नेताओं ने मोगा में ही डेरा डाल रखा था।

सरकार हर तरफ से घिरती नजर आ रही थी, लेकिन रविवार शाम के घटनाक्रम के बाद परिस्थितियां बिल्कुल बदल गईं। विपक्ष की पहली मांग ऑर्बिट की बसें रोकना था। यूथ कांग्रेस ने इसका ऐलान भी किया था। डिप्टी सीएम सुखबीर बादल ने खुद ही बसें सड़कों से हटाने का ऐलान कर दिया।

दूसरी मांग मुआवजे की थी। परिजनों की सहमति से सरकार उसमें कामयाब रही। मुआवजे के ऐलान के साथ ही कांग्रेस प्रवक्ता सुखपाल खैरा ने कहा कि सरकार लोगों के पैसे से परिवार को एक तरह से रिश्वत दे रही है।

हाईकोर्ट ने मामले में संज्ञान लिया

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प्रदेश कांग्रेस प्रधान प्रताप बाजवा ने पांच मई को मोगा में सर्वदलीय बैठक भी बुलाई थी, लेकिन अब वह अधर में ही रह गई। उधर, आप के सूबा कन्वीनर सुच्चा सिंह छोटेपुर ने कहा कि हाईकोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लिया है।

उधर, पंजाब यूथ विकास बोर्ड के चेयरमैन एवं एसओआई (सोई) के को-ऑर्डिनेटर परमबंस सिंह रोमाणा ने आप और कांग्रेस से कहा है कि निजी दुख का सियासीकरण करना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस और आप ने मोगा घटना को सियासी रंगत देनी बंद न की तो सोई की ओर से सांसद भगवंत मान व कांग्रेसियों के घरों का घेराव किया जाएगा।

वहीं, पंजाब सरकार ने सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में महिला मुसाफिरों की सुरक्षा को विश्वसनीय बनाने के लिए सिफारिशें देने के लिए पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता के अनुसार यह फैसला सीएम प्रकाश सिंह बादल ने लिया।

ऑर्बिट हादसे में सुखबीर को समन

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जहां एक तरफ मोगा बस कांड के बाद ऑर्बिट बसों का मुद्दा पूरे देश में गरमा गया, वहीं दो साल पहले हुए एक हादसे में आर्बिट कंपनी के एमडी सुखबीर सिंह बादल और बस ड्राइवर को अदालत में पेश होने के समन जारी किए गए हैं।

हादसे में घायल हुए तफजलपुरा निवासी हरदेव सिंह के एडवोकेट जसविंदर सिंह गरेवाल ने बताया कि दो मई को फतेहगढ़ साहिब की अदालत ने ऑर्बिट बस के ड्राइवर कुलवंत सिंह निवासी जलालाबाद गांव भवनीवाला को दो जुलाई को अदालत में पेश होने पर समन जारी किए।

घायल हरदेव सिंह की ओर से डाले एक अन्य इंश्योरेंस केस में इंश्योरेंस कंपनी के साथ-साथ ऑर्बिट बस कंपनी के एमडी सुखबीर बादल को भी समन कर अदालत में पेश होने के लिए कहा गया है। उन्होंने बताया कि यह हादसा 2013 में सरहिंद-पटियाला रोड पर हुआ था जिसमें ऑर्बिट बस ने उनकी ऑल्टो कार को पीछे से टक्कर मार दी थी।

इसके बाद उसकी कैंटर से टक्कर हो गई थी। एडवोकेट जसविंदर सिंह गरेवाल ने बताया कि हरदेव सिंह ने पुलिस को दिए अपने बयान में बस का नंबर और ड्राइवर के नाम सहित शिकायत दर्ज करवाई थी।

बाद में सरहिंद पुलिस ने अदालत में पेश चालान के दौरान ऑर्बिट बस को बाहर निकाल दिया था। सरहिंद पुलिस ने पूरा मामला एक कैंटर पर डाल उसके चालक पटियाला निवासी कमल सचदेवा को आरोपी बना दिया था।

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