बीज खाने से सौ बच्चों की हालत बिगड़ी
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राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के कक्षा तत्परता कार्यक्रम के तहत शनिवार को हर्बल पार्क में भ्रमण करने गए करीब 100 स्कूली छात्रों की जठरोफा के बीज खाने से तबीयत बिगड़ गई।
बच्चों की हालत बिगड़ने से अध्यापकों में अफरातफरी मच गई। बिना देरी के किसी तरह बच्चों को स्थानीय सीएचसी में भर्ती करवाया गया। बच्चों के बीमार होने की सूचना मिलने से अभिभावकों में हड़कंप मच गया। घटना का पता चलते ही परिजनों का सीएचसी में जमावड़ा लग गया। मामले की सूचना प्रशासनिक अधिकारियों को मिली तो उपायुक्त बलराज सिंह, सीएमओ वंदना भाटिया, डीएसपी राजकुमार, डीईओ आशा मुंजाल, तहसीलदार निर्मल दहिया सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। समाचार लिखे जाने तक उपचार के बाद करीब चार दर्जन बच्चों को छुट्टी दे दी गई।
स्कूल में अफरातफरी का माहौल
कस्बे के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के छठी से आठवीं कक्षा तक के बच्चे कक्षा तत्परता कार्यक्रम के तहत हर्बल पार्क में शैक्षणिक भ्रमण के लिए गए थे। अध्यापकों ने बच्चों को जड़ी बूटियों के बारे में बताया।
कुछ देर के बाद बच्चे घूमते हुए जठरोफा के पेड़ के पास जा पहुंचे। वहां बच्चों ने जठरोफाके बीज खाने शुरू कर दिए। बीज खाने में बादाम की तरह लग रहे थे। भ्रमण के बाद सभी बच्चे स्कूल में ले जाए गए। स्कूल में पहुंचने के बाद बच्चों ने पेट में दर्द की शिकायत की। काफी बच्चों को उल्टियां शुरू हो गई।
बच्चों की हालत खराब होते ही पूरे स्कूल में अफरातफरी का माहौल हो गया। अध्यापक बुरी तरह घबरा गए। बच्चोें को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती करवाया। इतने बच्चों को बीमार देख अस्पताल में डॉक्टरों की कमी पड़ गई और इलाज के लिए बाहर से डॉक्टरों को बुलाया गया।
औषधियों की जानकारी के लिए गए थे पार्क
पार्क में बच्चों ने कुछ बादाम जैसी औषधि को खा लिया। इस कारण उनको उल्टी व पेटदर्द शुरू हो गया। छात्रों ने अध्यापकों को पूरा मामला बताया तो अध्यापकों ने बिना समय गवाएं उन्हें अस्पताल में भर्ती करवा दिया।
देखते ही देखते अस्पताल के खाली पड़े बिस्तर स्कूली बच्चों से भर गए। डॉक्टरों ने बच्चों को ग्लूकोज के साथ साथ इंजेक्शन भी लगाए। इससे बच्चों की हालत में कुछ सुधार हुआ।
मौके पर पहुंचकर डीसी ने बच्चों का हाल जाना और अस्पताल के डॉक्टरों को किसी प्रकार की कोताही न बरतने के निर्देश दिए। डॉक्टरों की कमी को देखते हुए करनाल से तुरंत डॉक्टरों की एक टीम को बुलवाया गया।
हाथों में पकड़नी पड़ी ग्लूकोज की बोतलें
अचानक अस्पताल में सैकड़ों बच्चों की तादाद को देखकर अस्पताल प्रशासन के हाथ पांव फूल गए और इस बात को समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर बच्चों को हुआ क्या है? देखते ही देखते अस्पताल के सभी बेड छात्रों से खचाखच भर गए।
बेडों की कमी होने के कारण एक बेड पर चार से छह बच्चों का उपचार किया गया। अस्पताल के मेज, स्ट्रेचरों पर लेटाकर बच्चों का इलाज किया गया, लेकिन फिर भी बच्चों की तादाद बढ़ने पर घरों फोलडिंग मंगवाकर काम चलाया गया। इतना ही नही ग्लूकोज स्टैंड कम होने की वजह से अभिभावकों, अध्यापकों व अस्पताल के स्टाफ सदस्यों ने ग्लूकोज की बोतलों को हाथ में पकड़ना पड़ा।
पुलिस ने संभाला मोर्चा
छात्रों की हालत खराब होने की जैसे ही अभिभावकों को सूचना मिली तो अभिभावकों का अस्पताल में जमावड़ा लगना शुरू हो गया। अपने बच्चों की हालत खराब देख अभिभावकों का स्कूल प्रशासन के खिलाफ गुस्सा साफ नजर आ रहा था।
परिजनों का गुस्सा देख अस्पताल में पुलिस बल तैनात किया गया। डीएसपी राजकुमार ने बताया कि अस्पताल में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है। स्थिति नियंत्रण में है।