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टॉयलेट घोटाला: सीबीआई की विशेष अदालत में चालान दाखिल
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 13 Oct 2016 11:10 PM IST
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घोटाले में सरकारी राजकोष को 13.66 करोड़ रुपये का नुकसान
- फोटो : demo pic
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नगर निगम से जुड़े चर्चित टॉयलेट घोटाले में सीबीआई ने वीरवार को सीबीआई की विशेष अदालत में चालान दाखिल किया। सीबीआई के अनुसार इस घोटाले में सरकारी राजकोष को 13.66 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया गया है।
जांच एजेंसी ने घोटाले के लिए पूर्व सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर रमेश चंद्र दीवान, सेलवेल मीडिया सर्विसेज के डायरेक्टर जिम्मी सुबावाला, जनरल मैनेजर बिश्वदीप दत्ता, ऑउटडोर कम्यूनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर मयसा गणेश समेत दोनों कंपनियों को आरोपी बनाया है। वहीं शुरुआत में आरोपी बनाए गए पूर्व चीफ इंजीनियर एसके बंसल, पूर्व सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर एसआर अग्रवाल को राहत देते हुए उनका नाम आरोपियों में शामिल नहीं किया है। हालांकि सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसी ने इनके खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश की है।
आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश रचने व भ्रष्टाचार अधिनियम की धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। केस की अगली सुनवाई 1 दिसंबर को आरोपियों को चालान की कॉपी सप्लाई की जाएगी।
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ये है मामला
संबंधित मामला वर्ष 2006 से 2014 के बीच शहर में 86 पब्लिक टॉयलेट्स के रखरखाव और देखरेख से जुड़ा हैै। सेलवेल मीडिया को 10 सितंबर, 2007 को नगर निगम ने दो आर्डर दिए थे। इसमें शहर के मार्केट में नवनिर्मित टॉयलेट्स और मार्ग की देखभाल और रखरखाव को सुनिश्चित करना था। हालांकि बाद में टेंडर नोटिस में एक नई शर्त लगा दी गई थी। इस बारे में जानकारी समाचार पत्रों के माध्यम से 13 जुलाई 2007 को प्रकाशित करवाई गई।
सीबीआई के मुताबिक यह ‘नई शर्त’ आमंत्रित टेंडर के विस्तृत नोटिस से अलग थी। वहीं जांच एजेंसी का कहना था कि सेलवेल मीडिया ने हर टॉयलेट का मूल्य लगभग 8 हजार रुपये तय किया था। इसमें प्रति वर्ष अगले पांच वर्षों के लिए 10 प्रतिशत वृद्धि शामिल थी। वहीं 5 वर्ष बाद मरम्मत खर्च 12 हजार रुपये प्रतिमाह हो गया। नगर निगम ने फिर से टेंडर निकाला, जिसमें तीन कंपनियों ने आवेदन किए। इनमें से 2 कंपनियां क्वालिफाई र्हुइं और फिर से सेलवेल को उन्हीं शर्तों पर 17,303 प्रति टॉयलेट के हिसाब से अनुबंध दिया गया।
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जांच एजेंसी ने घोटाले के लिए पूर्व सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर रमेश चंद्र दीवान, सेलवेल मीडिया सर्विसेज के डायरेक्टर जिम्मी सुबावाला, जनरल मैनेजर बिश्वदीप दत्ता, ऑउटडोर कम्यूनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर मयसा गणेश समेत दोनों कंपनियों को आरोपी बनाया है। वहीं शुरुआत में आरोपी बनाए गए पूर्व चीफ इंजीनियर एसके बंसल, पूर्व सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर एसआर अग्रवाल को राहत देते हुए उनका नाम आरोपियों में शामिल नहीं किया है। हालांकि सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसी ने इनके खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश की है।
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आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश रचने व भ्रष्टाचार अधिनियम की धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। केस की अगली सुनवाई 1 दिसंबर को आरोपियों को चालान की कॉपी सप्लाई की जाएगी।
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ये है मामला
संबंधित मामला वर्ष 2006 से 2014 के बीच शहर में 86 पब्लिक टॉयलेट्स के रखरखाव और देखरेख से जुड़ा हैै। सेलवेल मीडिया को 10 सितंबर, 2007 को नगर निगम ने दो आर्डर दिए थे। इसमें शहर के मार्केट में नवनिर्मित टॉयलेट्स और मार्ग की देखभाल और रखरखाव को सुनिश्चित करना था। हालांकि बाद में टेंडर नोटिस में एक नई शर्त लगा दी गई थी। इस बारे में जानकारी समाचार पत्रों के माध्यम से 13 जुलाई 2007 को प्रकाशित करवाई गई।
सीबीआई के मुताबिक यह ‘नई शर्त’ आमंत्रित टेंडर के विस्तृत नोटिस से अलग थी। वहीं जांच एजेंसी का कहना था कि सेलवेल मीडिया ने हर टॉयलेट का मूल्य लगभग 8 हजार रुपये तय किया था। इसमें प्रति वर्ष अगले पांच वर्षों के लिए 10 प्रतिशत वृद्धि शामिल थी। वहीं 5 वर्ष बाद मरम्मत खर्च 12 हजार रुपये प्रतिमाह हो गया। नगर निगम ने फिर से टेंडर निकाला, जिसमें तीन कंपनियों ने आवेदन किए। इनमें से 2 कंपनियां क्वालिफाई र्हुइं और फिर से सेलवेल को उन्हीं शर्तों पर 17,303 प्रति टॉयलेट के हिसाब से अनुबंध दिया गया।