समझौता बम कांडः 8वीं बरसी, चौंकाने वाला सच
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समझौता एक्सप्रेस में धमाके को आठ साल बीत गए हैं। इन आठ सालों में न तो मृत लोगों की शिनाख्त हो सकी और न ही राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी मामले का खुलासा कर सकी। हादसे के बाद साल बाद भी आज भी जहन में एक ही सवाल दौड़ रहा है।
18 फरवरी 2007 को दिल्ली-लाहौर के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में धमाके की याद ताजा हो जाती हैं। इस दिन ट्रेन में दिल्ली से पाकिस्तान जाते समय 68 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था और कई दर्जन लोग घायल हो गए थे। इससे देश ही नहीं, बल्कि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान समेत पूरा विश्व हिल गया था।
दोनों देशों की सरकारों ने धमाके की निंदा करने के साथ मामले को जल्द सुलझाने की भी बात कही थी, लेकिन 18 फरवरी बुधवार को हादसे को पूरे आठ साल हो गए हैं। इन आठ सालों में धमाके की जांच जीआरपी से राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी तक पहुंच चुकी हैं, लेकिन मामले का खुलासा आज तक नहीं हो सका है।
68 में से 19 ही पहचान नहीं
एडवोकेट मोमिन मलिक ने बताया कि समझौता एक्सप्रेस की दो बोगियों में धमाके में 68 लोगों की मौत हो गई थी। इनमें से 45 शवों की उसी वक्त पहचान कर ली गई थी और बाकी 23 शवों को शिनाख्त न होने पर महराना के कब्रिस्तान में दफन कर दिया था। इनमें से चार के परिजनों के डीएनए टेस्ट को सैंपल ले लिए थे, लेकिन उनकी भी रिपोर्ट नहीं आ सकी है। इसके अलावा 19 शवों की आज तक कोई शिनाख्त नहीं हो सकी है।
मोहम्मद वकील को लेकर स्थिति नहीं स्पष्ट
पाकिस्तान के हाबजाबाद जिले के मोहम्मद वकील को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। उसके परिजनों ने बताया कि मोहम्मद वकील के पूर्वज करनाल के घरौंडा के हैं और उसकी शामली में ससुराल है। परिजनों ने उसके भारत की किसी जेल में बंद होने की भी आशंका जताई।
मोमिन मलिक ने बताया कि वे देश की कई जेलों में उसकी जानकारी ले चुके हैं, लेकिन उसकी कोई जानकारी नहीं लग रही। उसको आशंका है कि मोहम्मद वकील भी समझौता धमाके में मौत का शिकार हो गया। इसको लेकर 20 फरवरी को रेलवे कोर्ट में सुनवाई है।
रेलवे आज तक रिजर्वेशन चार्ट नहीं दे सकी
एडवोकेट मोमिन मलिक ने बताया कि हादसे के बाद पाकिस्तान के लोगों ने उसके साथ संपर्क किया। उन्होंने रेलवे से रिजर्वेशन चार्ट मांगा, लेकिन रेलवे द्वारा चार्ट उपलब्ध नहीं कराया। उसने फिर आरटीआई के तहत रिजर्वेशन चार्ट मांगा, लेकिन रेलवे ने आरटीआई में भी रिजर्वेशन चार्ट नहीं दिया।
एसपी को राष्ट्रपति मेडल की मांग
एडवोकेट मोमिन मलिक एसपी बी. सतीश बालन को राष्ट्रपति मेडल देने की मांग की। उन्होंने बताया कि बी. सतीश बालन हादसे के दिन पानीपत में बतौर एएसपी तैनात थे। वे हादसे की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे और घायलों को बाहर निकलवाकर अस्पताल में दाखिल कराया। इसके अलावा शवों की शिनाख्त कराने और उनको दफनाने में भी काफी सहयोग किया।
दिल्ली-लाहौर समझौता एक्सप्रेस में ब्लास्ट
दिल्ली-लाहौर समझौता एक्सप्रेस में 18 फरवरी 2007 को रात 11:52 बजे सिवाह और दीवाना के बीच मुख्य रेलवे लाइन पर धमाका हो गया था। इसकी दो बोगियों में सवार 68 लोगों की मौत हो गई थी और दर्जनों यात्री घायल हो गए थे।
वकील ने छह मांगों को रखा
1. 2008 और 2010 में डीएनए ब्लड सैंपल का रिजल्ट जल्द ही दिया जाए।
2. डीएनए के ब्लड सैंपल गुम होने या मैच न करने की स्थिति में नए सिरे जांच की जाए।
3. पीड़ितों को आसानी से भारत आने दिया जाए। वे इससे ब्लड सैंपल देने के साथ कानूनी कार्रवाई भी कर सकें।
4. राष्ट्रीय जांच एजेंसी पीड़ितों की हर संभव मदद करें और हादसे के वक्त बरामद सामान की निशानदेही पीड़ित परिवार से कराएं।
5. हादसे में मारे 19 लोगों की शिनाख्त कराने का प्रयास किया जाएं और घायल लोगों के बयान दर्ज कराए जाए।
6. मोहम्मद वकील के हादसे में मारे जाने या न मारे जाने की स्थिति को स्पष्ट करें