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बहनों की 'बहादुरी' को महिला आयोग की 'ऑक्सीजन'

Sun, 11 Jan 2015 09:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Sun, 11 Jan 2015 09:34 AM IST
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rohtak sister molestation case

रोडवेज बस में दो बहनों की बहादुरी पर उठे सवालों के बीच अब महिला आयोग ने भी बड़ा बयान दे दिया है। आयोग उपाध्यक्ष ने कहा कि उन पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं बनने दिया जाएगा। इस मामले में आयोग ने प्रधानमंत्री तक पत्राचार किया है।

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गौर हो कि रोडवेज बस में कथित छेड़छाड़ और मारपीट मामले में पीड़ित छात्रा आरती और पूजा शनिवार को राज्य महिला आयोग की टीम से मिलीं थीं। बहनों ने शिकायत की कि सीबीआई के पॉलीग्राफ टेस्ट में उनसे अनर्गल प्रश्न पूछे गए। आयोग उपाध्यक्ष सुमन ने कहा कि उन पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं बनने दिया जाएगा। इस मामले में आयोग ने प्रधानमंत्री तक पत्राचार किया है।
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पीएमओ को मामले की पूरी जानकारी दी गई है। मामले में महापंचायत को लेकर उपाध्यक्ष सुमन दहिया ने कहा कि महापंचायत में समाज के लोग हैं। यदि समझौते की बात दोनों ओर से सहमति से होती है तो एक अलग बात है, लेकिन किसी को भी लड़कियों पर दबाव बनाने नहीं दिया जाएगा।
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पीड़ित का उपचार कराया जाए सरकारी खर्चे पर

rohtak sister molestation case

सांपला खंड के एक गांव में मंदबुद्धि लड़की से दुराचार मामले में महिला आयोग की टीम पीड़ित से मिलने गांव में पहुंची। बातचीत में सामने आया कि दुराचार के कारण गर्भवती पीड़ित के एमटीपी (मेडिकली टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी) गर्भपात कराने के लिए अदालत में अर्जी दाखिल करने में अड़चन आ रही है। इनमें सबसे दिक्कत है कि कि युवती पूरी तरह मानसिक रूप से अक्षम है, लेकिन उसका मेडिकल सर्टिफिकेट नहीं है।

परिजनों ने बताया कि यह सर्टिफिकेट बुधवार को ही बनता है। इस पर दहिया ने निर्देश दिए कि पीजीआई में सभी चिकित्सक हैं और सभी तरह की सुविधाएं हैं तो बुधवार का इंतजार क्यों किया जाए। निर्देश दिए कि पीड़ित का उपचार सरकारी खर्च पर किया जाए और मेडिकल प्रमाण पत्र भी पीजीआई से ही बनवाया जाए। इसके साथ ही याचिका दायर कराई जाए।

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