बहनों की 'बहादुरी' को महिला आयोग की 'ऑक्सीजन'
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रोडवेज बस में दो बहनों की बहादुरी पर उठे सवालों के बीच अब महिला आयोग ने भी बड़ा बयान दे दिया है। आयोग उपाध्यक्ष ने कहा कि उन पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं बनने दिया जाएगा। इस मामले में आयोग ने प्रधानमंत्री तक पत्राचार किया है।
गौर हो कि रोडवेज बस में कथित छेड़छाड़ और मारपीट मामले में पीड़ित छात्रा आरती और पूजा शनिवार को राज्य महिला आयोग की टीम से मिलीं थीं। बहनों ने शिकायत की कि सीबीआई के पॉलीग्राफ टेस्ट में उनसे अनर्गल प्रश्न पूछे गए। आयोग उपाध्यक्ष सुमन ने कहा कि उन पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं बनने दिया जाएगा। इस मामले में आयोग ने प्रधानमंत्री तक पत्राचार किया है।
पीएमओ को मामले की पूरी जानकारी दी गई है। मामले में महापंचायत को लेकर उपाध्यक्ष सुमन दहिया ने कहा कि महापंचायत में समाज के लोग हैं। यदि समझौते की बात दोनों ओर से सहमति से होती है तो एक अलग बात है, लेकिन किसी को भी लड़कियों पर दबाव बनाने नहीं दिया जाएगा।
पीड़ित का उपचार कराया जाए सरकारी खर्चे पर
सांपला खंड के एक गांव में मंदबुद्धि लड़की से दुराचार मामले में महिला आयोग की टीम पीड़ित से मिलने गांव में पहुंची। बातचीत में सामने आया कि दुराचार के कारण गर्भवती पीड़ित के एमटीपी (मेडिकली टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी) गर्भपात कराने के लिए अदालत में अर्जी दाखिल करने में अड़चन आ रही है। इनमें सबसे दिक्कत है कि कि युवती पूरी तरह मानसिक रूप से अक्षम है, लेकिन उसका मेडिकल सर्टिफिकेट नहीं है।
परिजनों ने बताया कि यह सर्टिफिकेट बुधवार को ही बनता है। इस पर दहिया ने निर्देश दिए कि पीजीआई में सभी चिकित्सक हैं और सभी तरह की सुविधाएं हैं तो बुधवार का इंतजार क्यों किया जाए। निर्देश दिए कि पीड़ित का उपचार सरकारी खर्च पर किया जाए और मेडिकल प्रमाण पत्र भी पीजीआई से ही बनवाया जाए। इसके साथ ही याचिका दायर कराई जाए।