रोहतक निर्भया केसः कोर्ट में मुख्यारोपी नाबालिग करार
नेपाली मूल की युवती से गैंग रेप और हत्या के मामले में पुलिस को करारा झटका लगा है। स्थानीय कोर्ट ने नेपाली आरोपी को नाबालिग करार दे दिया। अब उसकी सुनवाई जुवेनाइल कोर्ट में होगी।
इसके साथ ही पुलिस के नेपाली आरोपी को सख्त सजा दिलाने के अरमान टूट गए। पुलिस ने आठों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। लेकिन कोर्ट के आदेश आते ही नाबालिग को बाल सुधार गृह में भेज दिया गया।
आरोपी पक्ष के वकील दीपक भारद्वाज ने बताया कि जेएमआईसी विकास की अदालत ने सात बालिग आरोपियों के केस को सेशन कोर्ट के लिए कमिट (ट्रांसफर) किया है। अगली सुनवाई 18 जुलाई को सेशन कोर्ट में होगी।
मामले में पुलिस का भी किरकिरी हो रही
इस जघन्य वारदात में पुलिस की लगातार किरकिरी हो रही है। वारदात के बाद पकड़े गए नेपाली आरोपी को पुलिस प्रारंभ से ही बालिग (20 से 22 साल) बताती रही लेकिन प्रमाणित कभी नहीं कर सकी।
वहीं, आरोपी की मां ने कोर्ट में उसके नाबालिग होने के दस्तावेज पेश कर दिए। कोर्ट के आदेश पर मेडिकल टेस्ट हुआ तो वहां भी आरोपी की उम्र 14 से 16 साल पाई गई। जब पुलिस के पास कोई रास्ता नहीं बचा तो कोर्ट में बचाव पक्ष की ओर से पेश नाबालिग आरोपी के जन्म प्रमाणपत्र की जांच करने नेपाल रवाना हो गई।
लेकिन लंबी प्रक्रिया के बाद भी पुलिस कोई ठोस सबूत नहीं पेश सकी जो यह सिद्ध कर सके कि नेपाली आरोपी बालिग है। यही नहीं पुलिस की ओर से 2 जुलाई को कोर्ट में पेश किए गए आयु संबंधी दस्तावेजों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर ही आरोपी की उम्र करीब 15 साल मानी गई।
यह है मामला
फरवरी 2015 में चिन्योट कॉलोनी निवासी नेपाली मूल की युवती की गैंगरेप के बाद बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मानसिक अशक्त युवती के शरीर में आरोपियों ने नुकीले पत्थर तक डाले। पूरे प्रदेश में हल्ला मचा।
मामले में पुलिस ने गद्दी खेड़ी गांव के आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया, जबकि 9वें आरोपी ने भागकर दिल्ली में आत्महत्या कर ली। इसमें से एक आरोपी नेपाली मूल का है, जिसे बुधवार को कोर्ट ने नाबालिग माना है।