भगत सिंह की बहन को 25 साल बाद इंसाफ
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शहीद-ए-आजम भगत सिंह की बहन 98 वर्षीय प्रकाश कौर के दामाद के भाई कुलजीत सिंह के फर्जी एनकाउंटर में मारे जाने के बहुचर्चित मामले में अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए पांच-पांच साल कैद और दो लाख दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पूनम आर जोशी की अदालत ने शुक्रवार शाम को यह सजा सुनाई। अदालत में दोनों ही पक्षों की तरफ से गवाहों व बयानों को लेकर बहस पहले ही संपन्न हो चुकी थी। अदालत ने दो मई को मामले का फैसला सुनाने के लिए तारीख तय की थी।
दो तारीख को अदालत ने मामले की अगली तारीख आठ मई 2014 मुकर्रर की और आठ मई को अदालत ने शुक्रवार का दिन तय किया था। फैसला सुनाते हुए अदालत ने दसूहा में तत्कालीन डीएसपी रहे जसपाल सिंह, रिटायर्ड आईजी व तत्कालीन एसपी (ऑपरेशन) एसपीएस बसरा और तत्कालीन गढ़दीवाला चौकी इंचार्ज सीता राम को दोषी करार दे दिया।
पांच-पांच साल कैद और जुर्माने की सजा
सहायक जिला अटार्नी टीएस गरेवाल ने बताया कि अदालत ने तीनों को ही धारा 364 के तहत दोषी करार देते हुए पांच-पांच साल कैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
इसी तरह धारा 120 बी के तहत भी उन्हें दोषी करार देते हुए पांच साल कैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। साथ ही अदालत ने धारा 218 के तहत उन्हें दोषी करार देते हुए दो साल कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
तीनों सजाएं एक साथ चलेंगी। मामले के दो आरोपियों सरदूल सिंपाह और एएस संधू की पहले ही मौत हो चुकी है।
शहीद-ए-आजम की बहन ने किया था सुप्रीम कोर्ट का रूख
शहीद-ए-आजम भगत सिंह की बहन और मृतक कुलजीत सिंह के भाई की सास प्रकाश कौर इस समय कनाडा के शहर टोरंटो में अपने बेटे रुपिंद्र सिंह के साथ रह रही हैं।
प्रकाश कौर ने ही पुलिस हिरासत में मारे गए भोगपुर चीनी मिल के पूर्व डायरेक्टर और गांव अंबाला जंट्टां के सरपंच रह चुके कुलजीत सिंह के मामले की सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। कुलजीत सिंह निवासी अंबाला जट्टां को 23 जुलाई, 1989 में होशियारपुर पुलिस ने अगवा करके कैद कर लिया था।
पुलिस ने आरोप लगाया था कि कुलजीत सिंह का संबंध आतंकवादियों से था। पुलिस के अनुसार जब कुलजीत सिंह को हथियारों की बरामदगी के लिए ले जाया जा रहा था तो वह ब्यास दरिया में कूदकर भाग गया था।
पुलिस के दावे को अदालत में चुनौती
मामले के चश्मदीद गवाह प्यारा सिंह की मौत हो चुकी है और अन्य दो गवाह गुरमेल सिंह व गुरमीत सिंह की आयु अब 90 साल के करीब जा पहुंची है।
पुलिस हिरासत में कुलजीत सिंह ढट्ठके रिश्तेदारों ने पुलिस के दावे को अदालत में चुनौती दी कि कुलजीत का फर्जी एनकाउंटर करके उसकी लाश को खुर्दबुर्द कर दिया गया था।
सर्वोच्च न्यायालय की ओर से नौ सितंबर, 1990 में रिटा. जस्टिस एचएल रणदेव की अध्यक्षता में गठित न्यायिक कमीशन की ओर से 1993 में सौंपी रिपोर्ट के बाद तत्कालीन एसपी ऑपरेशन एसपीएस बसरा, दसूहा के तत्कालीन एसएचओ जसपाल सिंह व गढ़दीवाला चौकी के इंचार्ज सीता राम को अदालत के आदेशों के बाद गिरफ्तार किया गया था।