पुलिस ने मारे डंडे तो सामने से पड़े पत्थर
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गांव नौल्था में बीपीएल के सौ-सौ गज के प्लॉटों पर कब्जा दिलाने के मामले में कहीं सुनवाई नहीं होने पर ग्रामीणों का सब्र का बांध टूट गया। उन्होंने पानीपत-गोहाना हाईवे पर पहुंच कर जाम लगा दिया। इससे वाहनों की कतार लग गई।
पुलिस प्रभारी के कहने पर भी प्रदर्शनकारियों के जाम नहीं खोलने पर पुलिस ने हलका लाठी चार्ज कर दिया। लाठीचार्ज से मामला बिगड़ गया और प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव कर किया। पथराव में तीन पुलिस कर्मी घायल हो गए, जबकि पुलिस के लाठीचार्ज में करीब आधा दर्जन ग्रामीणों को भी चोटें लगीं हैं।
गांव नौल्था में बीपीएल परिवारों को करीब छह साल पहले 402 प्लॉट अलॉट किए थे। ये प्लॉट करीब 16 एकड़ जमीन पर काटे थे। बाद में प्लॉटों की अलॉटमेंट करीब चार साल पहले के पात्र लोगों को कर दी। मगर अभी तक उनको कब्जा नहीं दिया गया। बीपीएल प्लॉटधारकों के बार-बार प्रशासन से प्लॉटों की निशानदेही कराकर प्लॉटों का कब्जा दिलवाने की मांग करते चले आ रहे हैं। मगर मामला सिरे नहीं चढ़ा।
आज जब प्रशासन की टीम प्लॉटों की निशानदेही के लिए गांव में पहुंची। ग्रामीणों ने प्लॉटों पर कब्जा दिलाने की बात कही। इस दौरान ग्रामीणों और पुलिस की बहस बढ़ गई। गुस्साए बीपीएल प्लॉटों धारकों ने पास के पानीपत-गोहाना हाईवे पर जमा लगा दिया। करीब डेढ़ घंटे तक जाम से वाहनों की कतार लग गई। सूचना मिलने पर एसडीएम सुभाष श्योराण और डीएसपी सुरेंद्र सिंह पीएचसी जाकर बैठ गए और वहीं से पुलिस कर्मियों को निर्देश देते रहे।
पुलिस और ग्रामीणों में टकराव
ग्रामीण इस बात पर अड़े रहे कि जब एसडीएम और डीएसपी पीएचसी में बैठे हैं तो उनकी बात आकर क्यों नहीं सुनते। पुलिस अधिकारी बार बार पीएचसी में बैठे प्रशासन को हालात से अवगत कराने के बाद भी कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। उधर थाना प्रभारी बिजेंद्र भी करीब डेढ़ घंटे तक हालात को बातचीत कर संभाले रहे।
एक पक्ष हाईवे पर जाम खोलने को तैयार नहीं हुआ। पुलिस हटने के लिए बार-बार जोर दे रही थी। इससे हालात बिगड़ गए। पुलिस और ग्रामीणों में टकराव शुरू हो गया। पुलिस ने लोगों को खदेड़ने के लिए हल्का बल इस्तेमाल किया तो ग्रामीणों ने भी पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। दोनों ओर से हुए टकराव में तीन पुलिसकर्मी और दूसरी तरफ से भी कई लोगों को चोटें आई हैं। इनमें महिलाएं भी शामिल हैं। टकराव के बाद लोगों को खदेड़ने के बाद ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे।
रुक सकता था टकराव
एसडीएम और डीएसपी के साथ सरकारी अमला पीएचसी में बैठा रहा दूसरी तरफ उसी दौरान ग्रामीण हाईवे पर जाम लगाते रहे। अगर प्रशासन सूझबूझ का परिचय देते हुए मौके पर जा कर लोगों से बात कर रास्ता निकालता तो टकराव बच सकता था। अकेले थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ करीब डेढ़ घंटे तक लोगों को समझाने में लगे रहे। लोगों के बार बार आग्रह पर अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे तो पुलिस और लोगों में झड़प हो गई।
भीड़ के आगे पुलिस बेबस नजर आ रही थी। पूर्व जिला पार्षद रामपाल सिंह, बिजेंद्र सिंह और शांति का कहना है कि गांव में अधिकारियों की मौजूदगी और लापरवाही के कारण टकराव हुआ और इसी से हालात बिगड़े है। हालात बिगड़ने के बाद एडीसी सुजान सिंह, डीआरओ बाठला, एसडीएम सुभाष श्योराण और डीएसपी सुरेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे और पुलिस तैनात कर दी गई।