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तंग गलियों में छुपे सवाल देंगे कातिल का सुराग!
राजेश ढल्ल/ अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 07 Dec 2013 01:44 AM IST
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पलसौरा की तंग गलियां बेबी मर्डर केस के हत्यारे के लिए मददगार साबित हुईं।
मामले की जांच कर रही पुलिस टीम का भी मानना है कि बच्ची का अपहरण कर उसे गांव में ही छुपा कर रखा गया और जब पकड़े जाने का डर लगा तो हत्या कर शव जंगल में फेंक दिया।
शुक्रवार को अमर उजाला की टीम ने गांव और शव स्थल का एक बार फिर से मुआयना किया तो कई सवाल सामने आए।
क्या एक किलोमीटर पैदल चला कातिल
गांव की ज्यादातर गलियां चार से पांच फुट चौड़ी हैं। फर्नीचर मार्केट के पास जिस जंगल में जहां शव मिला वह जगह पगडंडी के रास्ते से जाने पर गांव से करीब एक किलोमीटर दूर पड़ती है।
जंगल का यह रास्ता कच्चा है, बीच में झाड़ियां भी हैं। कातिल ने अगर यह रास्ता शव ठिकाने लगाने के लिए अपनाया था तो वह या तो पैदल गया होगा या साइकिल से।
कोई और वाहन इधर से नहीं निकल सकता। इस रास्ते के लिए गांव से बाहर निकलने के बाद कातिल ने सेक्टर-54 की विभागज सड़क को पार कर इस पगडंडी का प्रयोग किया होगा।
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यही वजह है कि शव के पास किसी वाहन के निशान नहीं मिले। गांव से निकलने एक मुख्य रास्ता भी है इस पर बड़े वाहन से भी जाया जा सकता है मगर इस रास्ते पर दुकाने खुली रहती हैं और देर रात तक भी पीसीआर मिल सकती है। इसलिए यह समझा जा रहा है कि कातिल इस रास्ते से बचा होगा।
उस दिन दुकान क्यों बदल दी
घर से निकलने के बाद बच्ची की तस्वीर सीसीटीवी में दो जगह कैद है। इसमें बच्ची के हाथ में कुरकुरे का पैकेट है।
बच्ची रोज जिस दुकान से खाने की चीजें खरीदती थी उस दुकानदार का कहना है कि जिस दिन बच्ची गायब हुई उस दिन उसने कुरकुरे का पैकेट उसकी दुकान से नहीं खरीदा।
हालांकि बच्ची रोज उसके पास से खाने की चीजें खरीदती थी। पुलिस भी इस दुकानदार से पूछताछ कर चुकी है।
दुकानदार की बात इसलिए सही लग रही है क्योंकि 27 नवंवबर को आखिरी बार जिस रास्ते पर सीसीटीवी फुटेज में लड़की दिखी है, वह रास्ता लड़की के घर से दुकान की तरफ हो कर नहीं जाता।
यह सवाल पुलिस तहकीकात का विषय है कि आखिर उस दिन लड़की ने रास्ता और दुकान क्यों बदल दी?
क्या थी 27 नवंबर की दिनचर्या
बच्ची की मां ने बताया कि बच्ची सुबह स्कूल गई थी। स्कूल से लौटने के बाद वह दोपहर को छत पर धूप में उसके साथ ही बैठी थी।
शाम चार बजे के करीब वह हाथ में एक जलेबी लेकर सहेली के घर जाने के लिए निकली। वह पर्स से 20 रुपये भी ले गई थी। इसकी जानकारी उसे बच्ची के जाने के बाद ही मिली।
रविवार को है भोग
बच्ची का भोग रविवार को 12 से 1 बजे रखा गया है। भोग का आयोजन पलसौरा गांव के गुरुद्वारे में होगा। गांव निवासी रवि सिंह ने बताया कि 11 साल की बच्ची प्रतिदिन शाम को अपनी तीन छोटी बहनों को साथ लेकर इस गुरुद्वारे आती थी।
महिला टीम का गठन
एसआईटी की टीम को यह शक है कि इस वारदात में कोई महिला भी शामिल हो सकती है इसलिए पुलिस ने अब महिला पुलिस कर्मचारियों की टीम का भी गठन किया है जो कि गांव की महिलाओं से पूछताछ कर रही हैं।
शुक्रवार को भी पुलिस ने आधा दर्जन संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है।
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मामले की जांच कर रही पुलिस टीम का भी मानना है कि बच्ची का अपहरण कर उसे गांव में ही छुपा कर रखा गया और जब पकड़े जाने का डर लगा तो हत्या कर शव जंगल में फेंक दिया।
शुक्रवार को अमर उजाला की टीम ने गांव और शव स्थल का एक बार फिर से मुआयना किया तो कई सवाल सामने आए।
क्या एक किलोमीटर पैदल चला कातिल
गांव की ज्यादातर गलियां चार से पांच फुट चौड़ी हैं। फर्नीचर मार्केट के पास जिस जंगल में जहां शव मिला वह जगह पगडंडी के रास्ते से जाने पर गांव से करीब एक किलोमीटर दूर पड़ती है।
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जंगल का यह रास्ता कच्चा है, बीच में झाड़ियां भी हैं। कातिल ने अगर यह रास्ता शव ठिकाने लगाने के लिए अपनाया था तो वह या तो पैदल गया होगा या साइकिल से।
कोई और वाहन इधर से नहीं निकल सकता। इस रास्ते के लिए गांव से बाहर निकलने के बाद कातिल ने सेक्टर-54 की विभागज सड़क को पार कर इस पगडंडी का प्रयोग किया होगा।
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यही वजह है कि शव के पास किसी वाहन के निशान नहीं मिले। गांव से निकलने एक मुख्य रास्ता भी है इस पर बड़े वाहन से भी जाया जा सकता है मगर इस रास्ते पर दुकाने खुली रहती हैं और देर रात तक भी पीसीआर मिल सकती है। इसलिए यह समझा जा रहा है कि कातिल इस रास्ते से बचा होगा।
उस दिन दुकान क्यों बदल दी
घर से निकलने के बाद बच्ची की तस्वीर सीसीटीवी में दो जगह कैद है। इसमें बच्ची के हाथ में कुरकुरे का पैकेट है।
बच्ची रोज जिस दुकान से खाने की चीजें खरीदती थी उस दुकानदार का कहना है कि जिस दिन बच्ची गायब हुई उस दिन उसने कुरकुरे का पैकेट उसकी दुकान से नहीं खरीदा।
हालांकि बच्ची रोज उसके पास से खाने की चीजें खरीदती थी। पुलिस भी इस दुकानदार से पूछताछ कर चुकी है।
दुकानदार की बात इसलिए सही लग रही है क्योंकि 27 नवंवबर को आखिरी बार जिस रास्ते पर सीसीटीवी फुटेज में लड़की दिखी है, वह रास्ता लड़की के घर से दुकान की तरफ हो कर नहीं जाता।
यह सवाल पुलिस तहकीकात का विषय है कि आखिर उस दिन लड़की ने रास्ता और दुकान क्यों बदल दी?
क्या थी 27 नवंबर की दिनचर्या
बच्ची की मां ने बताया कि बच्ची सुबह स्कूल गई थी। स्कूल से लौटने के बाद वह दोपहर को छत पर धूप में उसके साथ ही बैठी थी।
शाम चार बजे के करीब वह हाथ में एक जलेबी लेकर सहेली के घर जाने के लिए निकली। वह पर्स से 20 रुपये भी ले गई थी। इसकी जानकारी उसे बच्ची के जाने के बाद ही मिली।
रविवार को है भोग
बच्ची का भोग रविवार को 12 से 1 बजे रखा गया है। भोग का आयोजन पलसौरा गांव के गुरुद्वारे में होगा। गांव निवासी रवि सिंह ने बताया कि 11 साल की बच्ची प्रतिदिन शाम को अपनी तीन छोटी बहनों को साथ लेकर इस गुरुद्वारे आती थी।
महिला टीम का गठन
एसआईटी की टीम को यह शक है कि इस वारदात में कोई महिला भी शामिल हो सकती है इसलिए पुलिस ने अब महिला पुलिस कर्मचारियों की टीम का भी गठन किया है जो कि गांव की महिलाओं से पूछताछ कर रही हैं।
शुक्रवार को भी पुलिस ने आधा दर्जन संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है।