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पीजीआई में महंगी बिक रही दवाओं की शिकायत दिल्ली में
ब्यूरो, अमर उजाला/चंडीगढ़
Updated Wed, 13 Apr 2016 10:45 AM IST
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दवा
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पीजीआई की केमिस्ट शॉप से मिलने वाली दवाओं के एमआरपी रेट में गड़बड़झाला मिलने पर पीजीआई मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट (एमटीए) ने इस मामले की शिकायत दिल्ली स्थित सेंट्रल विजिलेंस कमिश्नर (सीवीओ) से की है। पीजीआई एमटीए के जनरल सेक्रेटरी अश्विनी मुंजाल ने कहा कि यह मरीजों के साथ धोखा है।
केमिस्ट शॉप मरीजों से ठगी कर रही हैं, लेकिन पीजीआई प्रशासन की ओर से कार्रवाई नहीं की जाती। यह एक बड़ा घोटाला है। इसमें बड़े लोग शामिल हो सकते हैं। इसलिए इस पूरे मामले की जांच जरूरी है।
यह था मामला
एमटीए ने दावा किया था कि उनके हाथ दो सर्जिकल ट्यूब लगी थी। एक ट्यूब पीजीआई के केमिस्ट शॉप से खरीदी गई तो दूसरी पीजीआई के बाहर से। जो दवा पीजीआई से खरीदी गई, उसका एमआरपी 150 रुपये ज्यादा है। दोनों एक ही कंपनी की हैं। दोनों का बैच नंबर एक ही है। दोनों की मैन्यूफैक्चरिंग, एक्सपायरी व बार कोडिंग भी एक ही है, लेकिन दोनों का एमआरपी अलग-अलग है। जो दवा बाहर से खरीदी गई है, उस पर एमआरपी 300 रुपये है और जो पीजीआई से खरीदी गई, उसका एमआरपी रेट 450 है। एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी ने सवाल उठाया है कि जब दोनों दवाओं का एक ही बैच नंबर है तो एमआरपी अलग कैसे हो सकता है।
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केमिस्ट शॉप मरीजों से ठगी कर रही हैं, लेकिन पीजीआई प्रशासन की ओर से कार्रवाई नहीं की जाती। यह एक बड़ा घोटाला है। इसमें बड़े लोग शामिल हो सकते हैं। इसलिए इस पूरे मामले की जांच जरूरी है।
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यह था मामला
एमटीए ने दावा किया था कि उनके हाथ दो सर्जिकल ट्यूब लगी थी। एक ट्यूब पीजीआई के केमिस्ट शॉप से खरीदी गई तो दूसरी पीजीआई के बाहर से। जो दवा पीजीआई से खरीदी गई, उसका एमआरपी 150 रुपये ज्यादा है। दोनों एक ही कंपनी की हैं। दोनों का बैच नंबर एक ही है। दोनों की मैन्यूफैक्चरिंग, एक्सपायरी व बार कोडिंग भी एक ही है, लेकिन दोनों का एमआरपी अलग-अलग है। जो दवा बाहर से खरीदी गई है, उस पर एमआरपी 300 रुपये है और जो पीजीआई से खरीदी गई, उसका एमआरपी रेट 450 है। एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी ने सवाल उठाया है कि जब दोनों दवाओं का एक ही बैच नंबर है तो एमआरपी अलग कैसे हो सकता है।
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